Mohan Bhagwat Dussehra: हम जब भी बंटे कमजोर हुए, आचरण बदले बिना परिवर्तन लाना कोई उपाय नहीं है। ये बात नागपुर विजयादशमी कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कही। उन्होंने कहा जब तक आचरण नहीं बदलेंगे परिवर्तन नहीं आएगा। इसलिए परिवर्तन के लिए आचरण बदलना बहुत जरूरी है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष विजयदशमी उत्सव और शस्त्र पूजन कार्यक्रम नागपुर में आयोजित किया गया। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में शस्त्र पूजा की है। उन्होंने स्मृति मंदिर में RSS संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की प्रतिमा पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।
RSS प्रमुख मोहन भागवत कार्यक्रम को संबोधित कर रहे हैं. उन्होंने कार्यक्रम में बंगाल के राज नायारण बसु का जिक्र किया. उनके जन्म को 200 साल पूरे हो रहे हैं. उन्होंने कहा, समाज में स्वदेशी मेलों के जरिए लोगों को अपनी संस्कृति और पहचान के प्रति जागरूक करने के लिए राज नायारण बसु ने हिंदू मेले की शुरुआत की थी.
‘जब देश विदेशी आक्रमण का सामना कर रहा था…’
RSS के विजयादशमी समारोह में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संत रविदास के योगदान को भी याद किया. उन्होंने कहा, ‘जब देश विदेशी आक्रमणकारियों के हमलों का सामना कर रहा था और लोगों पर अत्याचार हो रहे थे तब चारों ओर डर का माहौल था। ऐसे समय में संत रविदास ने स्वधर्म के प्रति निष्ठा, सामाजिक समरसता और भक्ति का संदेश दिया।’
नागपुर में Mohan भागवत ने की शस्त्र पूजा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विजयादशमी उत्सव नागपुर में आयोजित किया गया। इस मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पारंपरिक विधि से शस्त्र पूजा की। दशहरे पर शस्त्र पूजन करना RSS की पुरानी परंपरा रही है। संघ हर साल इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजित करता है। इस बार शताब्दी वर्ष के उत्सव के चलते नागपुर में हुए आयोजन पर विशेष ध्यान रहा। कार्यक्रम के जरिए संघ ने अपनी परंपराओं और संगठनात्मक गतिविधियों को सामने रखा।
संघ संस्थापक हेडगेवार को दी श्रद्धांजलि
शस्त्र पूजन से पहले मोहन भागवत ने नागपुर स्थित स्मृति मंदिर में RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। हेडगेवार ने वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। संघ के इतिहास में विजयादशमी का दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन संगठन की शुरुआत हुई थी। हर साल दशहरे के अवसर पर संघ की ओर से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
विजयादशमी पर पथ संचलन की भी परंपरा
RSS दशहरे के मौके पर देश के अलगअलग हिस्सों में पथ संचलन के कार्यक्रम भी आयोजित करता है। इन कार्यक्रमों में स्वयंसेवक अनुशासित तरीके से एक साथ संचलन करते हैं।
संघ इसे अपनी संगठनात्मक परंपरा और सांस्कृतिक गतिविधियों का हिस्सा मानता है। विजयादशमी के अवसर पर होने वाले शस्त्र पूजन और पथ संचलन को संघ की स्थापना से जुड़ी परंपराओं के रूप में देखा जाता है।
1925 में दशहरे के दिन हुई थी RSS की स्थापना
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। संघ की स्थापना विजयादशमी के दिन हुई थी, इसलिए यह अवसर संगठन के लिए हर साल खास रहता है। शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित विजयादशमी उत्सव में शस्त्र पूजन और संस्थापक को श्रद्धांजलि देने जैसे कार्यक्रमों के जरिए संघ ने अपनी ऐतिहासिक परंपराओं को याद किया।