भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 2007 का एकदिवसीय विश्व कप आज भी प्रशंसकों को निराशा की याद दिलाता है। मजबूत खिलाड़ियों से सजी भारतीय टीम पहले ही दौर में बाहर हो गई थी। उस समय टीम के हेड कोच रहे ऑस्ट्रेलिया के ग्रेग चैपल भी काफी विवादों में रहे थे। अब पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह ने उस दौर को याद करते हुए चैपल पर टीम के खिलाड़ियों के बीच फूट डालने का गंभीर आरोप लगाया है।

हरभजन सिंह ने प्रखर गुप्ता के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान कहा कि चैपल के कार्यकाल में भारतीय टीम की एकता को बड़ा नुकसान पहुंचा था। उनके मुताबिक, चैपल ने ऐसी रणनीति अपनाई, जिसमें खिलाड़ियों के बीच मतभेद बढ़े और टीम का आपसी तालमेल कमजोर हो गया। हरभजन ने इसे भारतीय क्रिकेट के सबसे खराब दौर में से एक बताया। उन्होंने यह भी कहा कि चैपल को मुख्य कोच बनाना भारतीय क्रिकेट प्रबंधन के सबसे गलत फैसलों में शामिल था।
हरभजन के अनुसार, 2003 के एकदिवसीय विश्व कप में उपविजेता रही भारतीय टीम के खिलाड़ी आपस में काफी अच्छे संबंध रखते थे। उस समय खिलाड़ियों के बीच मजबूत तालमेल था और सभी मिलकर खेलते थे। लेकिन चैपल के आने के बाद स्थिति बदलने लगी। हरभजन का दावा है कि जो खिलाड़ी पहले एकदूसरे के साथ मिलकर खेलते थे, उनके बीच बातचीत तक कम हो गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चैपल ने टीम को अंदर से कमजोर कर दिया।
बता दें कि ग्रेग चैपल और तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली के बीच विवाद उस समय भारतीय क्रिकेट की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक था। चैपल के कोच रहते गांगुली को पहले एकदिवसीय टीम और फिर टेस्ट टीम से बाहर होना पड़ा था। इसके बाद राहुल द्रविड़ को भारतीय टीम की कप्तानी सौंपी गई थी। इस पूरे घटनाक्रम ने क्रिकेट जगत में काफी चर्चा बटोरी थी।
विवाद उस समय और बढ़ गया, जब बीसीसीआई को भेजे गए चैपल के एक ईमेल की बातें सार्वजनिक हो गईं। इसमें गांगुली के प्रदर्शन और नेतृत्व को लेकर आलोचनात्मक बातें सामने आई थीं। गांगुली भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली कप्तानों में गिने जाते थे, इसलिए उन्हें टीम से बाहर किए जाने का मुद्दा काफी बड़ा बन गया था। उनकी टीम से अनुपस्थिति पर संसद में भी चर्चा हुई थी।
हरभजन सिंह ने बातचीत में यह भी आशंका जताई कि भारतीय टीम में फूट डालने के पीछे चैपल का कोई दूसरा मकसद हो सकता था। उन्होंने कहा कि उस समय भारतीय टीम ही ऐसी टीमों में शामिल थी, जो ऑस्ट्रेलिया को लगातार कड़ी चुनौती दे सकती थी। हरभजन के विचार में, अगर भारतीय खिलाड़ी एकजुट नहीं रहते तो मैदान पर उनका प्रदर्शन प्रभावित होना स्वाभाविक था।
उन्होंने यह संभावना भी जताई कि टीम के भीतर मतभेद पैदा होने से ऑस्ट्रेलिया को फायदा मिल सकता था। हालांकि, चैपल ने जानबूझकर ऐसा ऑस्ट्रेलियाई टीम के लाभ के लिए किया था या नहीं, इस बारे में हरभजन ने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। यह उनकी व्यक्तिगत राय और उस दौर के अनुभवों पर आधारित आरोप है।
गौरतलब है कि 2007 के विश्व कप में भारत बांग्लादेश से हारने के बाद ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ पाया था। इसके बाद देशभर में प्रशंसकों ने खिलाड़ियों के खिलाफ नाराजगी जताई थी और कई जगह उनके पुतले तक जलाए गए थे। हरभजन के ताजा बयान ने एक बार फिर उस निराशाजनक दौर, चैपलगांगुली विवाद और भारतीय टीम के भीतर के माहौल को चर्चा में ला दिया है।