दिवाली को लेकर हर कोई खूब एक्साइटेड रहता है, लेकिन बच्चों में अलग ही उमंगउत्साह देखने को मिलता है. जैसेजैसे हम बड़े होते जाते हैं तो जिम्मेदारियां भी बढ़ती जाती हैं. वो बेफिक्री वाला त्योहार अब बहुत सारी तैयारियां करते हुए निकलता है. इसी के साथ आज के समय में मोबाइल की दुनिया में लोग खोए रहते हैं. इस बार दीपवाली फेस्टिवल पर वही पुराने दिनों की यादें आप फिर जिएं. चलिए जान लेते हैं कि मोबाइल से दूर किस तरह मनाएं दिवाली कि फिर से बचपन को महसूस कर पाएं.

पहले दिवाली पर न सिर्फ दीपक जलाने की जल्दी रहती थी, बल्कि अगले दिन सुबह जल्दी जाग जाते थे ताकि सारे दीपक इकट्ठा कर लें. इससे तराजू बनाने से लेकर पिरामिड डिजाइन तक बनाकर खेलते थे. जान लेते हैं कि कैसे एक बार फिर से आप दिवाली पर बचपन वाली रौनक का अहसास कर सकते हैं.
परिवार संग खेलें पुराने गेम्स
पूजन करने के बाद सबसे पहले सभी मिलकर मिट्टी के दिए जलाएं. पूरे घर का हर कोना जगमगाने के बाद घर में बने पारंपरिक व्यंजन चखें और फिर परिवार संग पुराने गेम्स खेलें, जैसे अंताक्षरी, तांबोला, डम्बशैरेड्स, म्यूजिकल चेयर ये सारे खेल आपकी दिवाली की पुराने यादों को ताजा कर देंगे और पूरी फैमिली का बॉन्ड और भी मजबूत बनेगा.
पुरानी यादों को ताजा करें
दिवाली पर मोबाइल से थोड़ी दूरी बनाएं और यादों का पिटारा खोलें. सारे मिलकर एल्बम खोलें और तस्वीरें देखें. इससे हर फोटो के साथ की प्यारी कहानी और जुड़ाव भी आपको याद आएगा. इसके बाद अपने पूरे परिवार की तस्वीर खींचकर उसे भी स्टूडियो से निकलवा लें और इस एल्बम में एड कर दें.
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पुराने किस्सेकहानियां
दिवाली पर अमूमन लोग देर रात तक जागते हैं और कुछ रात्रि जागरण करते हैं. ऐसे में गेम्स खेलने के साथ ही आप अपने दादा, पापा, मम्मी और दादी से जानकारी लेकर पुरानी पहेलियां एकदूसरे से पूछ सकते हैं. पहले के समय की किस्से कहानियां अपने घर के बड़ों से सुनें, कि कैसे उस जमाने में दिवाली सेलिब्रेट की जाती थी.
बच्चों संग करें एक्टिविटी
इस दिवाली पर आप बच्चों संग खुद भी बच्चे बन जाएं. उनके संग रंगोली बनाने से लेकर दीए सजाएं. बहुत सारी लाइटिंग की जगह ट्रे़डिशनल तरीके से अपने घर को सजाएं. ग्रीटिंग कार्ड्स को खुद ही तैयार करें और अपने घर में सभी को इससे ही शुभकामनाएं दें.