कई बार आपने भी महसूस किया होगा कि परफ्यूम लगाते ही जो तेज और ताजी खुशबू आती है, कुछ घंटों बाद वह बदल जाती है. कई लोग इसे परफ्यूम की गड़बड़ी समझ लेते हैं, लेकिन असल में यह उसकी बनावट और हमारे शरीर के विज्ञान का नतीजा है. दरअसल, परफ्यूम कई खुशबुओं का मेल होता है. परफ्यूम में सिर्फ एक खुशबू नहीं होती. इसमें कई सुगंधित अणुओं का मिश्रण होता है, जिन्हें परफ्यूम बनाने वाले तीन परतों या नोट्स में बांटते हैं.

यही इसकी खुशबू में बदलाव की वजह होता है. हल्के अणु जल्दी हवा में उड़ते हैं, जबकि भारी अणु त्वचा पर देर तक रुके रहते हैं. जब आप परफ्यूम लगाते हैं, तो सबसे पहले टॉप नोट्स उड़ते हैं, फिर मिडिल नोट्स और आखिर में बेस नोट्स बचते हैं. इसलिए हर घंटे परफ्यूम की खुशबू थोड़ी बदल जाती है. यह खुशबू का बदलना है, इसे खराब नहीं कहते. अब इसे एक्सपर्ट से समझ लेते हैं.
लगाने के कुछ देर बाद क्यों बदल जाती है खुशबू?
कंज्यूमर बिहेवियर स्टडीज के अनुसार, 65% से 70% ग्राहक शुरुआती 2 मिनट की खुशबू के आधार पर परफ्यूम खरीद लेते हैं. हार्ट्स डिजायर लग्जरी के फाउंडर और सीईओ ऋषि सिंह के मुताबिक, खुशबू का बदलना क्वालिटी की कमी नहीं, बल्कि रसायन विज्ञान की एक सटीक प्रक्रिया है. इसे आसान आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं.
परफ्यूम कई खुशबुओं का मेल होता है. फोटो: Pexels
परफ्यूम तीन चरणों में खुशबू बिखेरता है. स्प्रे करते ही आने वाली पहली खुशबू ‘टॉप नोट्स’ होती है, जो 1530 मिनट में उड़ जाती है. इसके बाद ‘हार्ट नोट्स’ उभरते हैं, जो परफ्यूम का 40%60% हिस्सा होते हैं और 34 घंटे टिकते हैं. अंत में भारी अणुओं वाले ‘बेस नोट्स’ सामने आते हैं, जो 6 से 24 घंटे तक रहते हैं. घर पहुंचने पर महसूस होने वाली खुशबू यही बेस नोट है.
स्किन की केमिस्ट्री
मानव त्वचा का pH स्तर 4.7 से 5.75 और तापमान 98.6°F है. परफ्यूम के प्राकृतिक तेल परफ्यूम के साथ अलग प्रतिक्रिया करते हैं. ऑयली स्किन खुशबू को बांधकर रखती है, जबकि ड्राई स्किन पर यह जल्दी उड़ जाती है. हर इंसान की स्किन के अनुसार खुशबू में भी थोड़ा परिवर्तन हो सकता है.न्यूरोसाइंस के मुताबिक, हमारी नाक 1520 मिनट में किसी भी गंध की आदी हो जाती है. इसलिए कुछ घंटों बाद खुशबू हमें नहीं, बल्कि दूसरों को महसूस होती है.
खुशबू बदलने का एक कारण परफ्यूम से ज्यादा आपकी नाक भी हो सकती है. फोटो: Pexels
कभीकभी बदलाव आपकी नाक में होता है
खुशबू बदलने का एक कारण परफ्यूम से ज्यादा आपकी नाक भी हो सकती है. इसे ऑल्फैक्ट्री फटीग यानी सूंघने की थकान कहते हैं. जब कोई गंध लगातार आपके आसपास रहती है, तो दिमाग उसे धीरेधीरे नजरअंदाज करने लगता है. इसी वजह से कुछ देर बाद आपको लगता है कि खुशबू फीकी पड़ गई, जबकि दूसरे लोग उसे अब भी महसूस कर सकते हैं. यह कमी परफ्यूम में नहीं, आपकी नाक के अनुकूलन में होती है.
सही चुनाव कैसे करें?
परफ्यूम खरीदते समय ’30मिनट का नियम’ अपनाएं. इसे कलाई पर स्प्रे करें और बेस नोट्स के उभरने तक कम से कम आधे घंटे का इंतजार करके ही फैसला लें.