इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि यूपी पुलिस की हालत बहुत खराब है. पुलिस के अधिकारियों को लगता है कि वे कुछ भी करेंगे और बच निकलेंगे. जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेवा की बेंच ने इस दौरान नोएडा के एसीपी2 कमलकांत को फटकार भी लगाई. कोर्ट ने नोएडा पुलिस के सहायक उपायुक्त कमलकांत से कहा कि आपको शर्म नहीं आती है? पूरा मामला अवैध हिरासत से जुड़ा हुआ है.

नोएडा के निवासी दीपक ने बंदी प्रत्यक्षीकरण के तहत हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. दीपक का आरोप था कि 23 अगस्त को उसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया, लेकिन उसे दस्तावेज में नहीं दिखाया गया.
पहले पूरा मामला समझिए
दीपक के वकील अधिवक्ता अर्पित मालवीय और अवधेश कुमार मालवीय ने कहा कि दो गुटों में 23 अगस्त को लड़ाई हुई. इसी दिन दीपक को शाम 7.34 बजे दीपक को हिरासत में लिया गया. जब वो पुलिस हिरासत में था, तब इस मामले में एक एफआईआर दर्ज हुई.
दीपक का कहना है कि इस एफआईआर में उसका नाम नहीं था. दीपक का कहना था कि अगले दिन उसे धारा 130 के तहत नोटिस दिया गया, जबकि उस वक्त वे पुलिस हिरासत में थे.
दीपक का आरोप है कि पूछताछ के दौरान उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि आप किसी वकील से मिल सकते हैं या सलाह ले सकते हैं. कोर्ट ने इस दौरान जमानत बॉन्ड के बारे में मौखिक रूप से पूछा.
कोर्ट ने पाया कि पुलिस रिकॉर्ड में यह स्पष्ट नहीं था कि आरोपी से जमानत बांड की किसी निश्चित रकम को जमा करने की इच्छा के बारे में पूछा गया था. गिरफ्तारी रिकॉर्ड में भी कोई निश्चित राशि दर्ज नहीं थी.
सुनवाई के बाद जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेवा की बेंच ने तुरंत प्रभाव से दीपक को रिहा करने का आदेश दिया है.
नोएडा के एसीपी1 को तलब किया
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सही जवाब नोएडा के एसीपी1 ही दे सकते हैं. इसलिए उन्हें तलब किया जाता है. अगली सुनवाई के दौरान वे पूरे दस्तावेज के सामने कोर्ट में पेश होंगे. हम उनसे सवाल जवाब करेंगे. सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने प्रक्रिया के दस्तावेजीकरण के तरीके पर असंतोष व्यक्त किया.
यह पहली बार नहीं है, जब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अवैध हिरासत को लेकर यूपी पुलिस की खिंचाई की है. इस साल अब तक अवैध हिरासत के अलगअलग मामलों में इलाहाबाद हाई कोर्ट यूपी पुलिस पर 27 लाख रुपये का जुर्माना लगा चुका है.
एक दिन पहले ही यानी मंगलवार को अवैध हिरासत के रवि चौरसिया के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी पुलिस पर 30 हजार का जुर्माना लगाया था.