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रूस में एक महिला की मौत ने पूरी दुनिया को चिंता में डाला, भारत में 24 साल पहले डरा चुका है न्यूमोनिक प्लेग​

रूस की एंटी प्लेग लैब में काम करने वाली प्लेग शोधकर्ता महिला की मौत हो गई. हालांकि, महिला की मौत का सीधा कारण प्लेग नहीं बताया गया है. उसके शरीर में प्लेग बैक्टीरिया मिलने की बात भी सामने नहीं आई है, लेकिन एहतियाती तौर पर लैब के बड़े हिस्से को आइसोलेशन में रखा गया है, […]

रूस की एंटी प्लेग लैब में काम करने वाली प्लेग शोधकर्ता महिला की मौत हो गई. हालांकि, महिला की मौत का सीधा कारण प्लेग नहीं बताया गया है. उसके शरीर में प्लेग बैक्टीरिया मिलने की बात भी सामने नहीं आई है, लेकिन एहतियाती तौर पर लैब के बड़े हिस्से को आइसोलेशन में रखा गया है, जहां वो महिला कर्मचारी काम कर रही थी. प्लेग को लेकर डर क्या होता है, भारत में यह देखा जा चुका है. कच्छ, मुंबई, पुणे, पाली समेत कई हिस्सों में सामने आ चुकेहैं, लेकिन जब इसके मामले हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से गांव में पहुंचे तो यह बात चौंकाने वाली रही.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, 4 फरवरी, 2002 से प्रकोप की शुरुआत हुई. 19 फरवरी 2002 तक निमोनिक प्लेग के मामले बढ़कर 16 मामले पहुंच गए. जिसमें 4 मौतें हुईं. नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज ने लगातार टेस्टिंग की. जांच रिपोर्ट में येरसिनिया पेस्टिस की उपस्थिति की पुष्टि की हुई.

रोगियों के संपर्क में आए लोगों, प्रभावित और पड़ोसी गांवों के निवासियों, डॉक्टरों/पैरामेडिक्स और स्वास्थ्य कर्मियों को कीमोप्रोफिलैक्सिस दिया गया. प्रभावित गांवों के लिए अलर्ट जारी किया गया. जन जागरूकता अभियान चलाया गया. नतीजा, इसे फैलने से रोका जा सका.

पूरे देश में फैली दहशत

फरवरी 2002 के पहले हफ्ते में शिमला जिले के रोहड़ू इलाके के हाटकोटी गांव में तेज़ बुखार और छाती के गंभीर लक्षणों वाली बीमारी फैली. स्थानीय डॉक्टरों ने 13 फरवरी को दिल्ली के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज को इसकी गंभीरता बताई. कुछ ही दिनों में पूरे देश में दहशत फैल गई, क्योंकि जांच में यह बीमारी न्यूमोनिक प्लेग निकली.

पहली मौत और परिवार में संक्रमण

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रणधीर नाम के व्यक्ति की सबसे पहले इस बीमारी से मौत हुई और उसी से परिवार के सदस्यों में न्यूमोनिक रूप में संक्रमण फैला. न्यूमोनिक प्लेग फेफड़ों को निशाना बनाता है और खांसी के जरिए इंसान से इंसान में फैल सकता है, इसलिए परिवार और देखभाल करने वाले सबसे ज्यादा खतरे में थे.

रणधीर की पत्नी पुष्पा, जो उत्तरांचल के चकराता इलाके की थी, को गंभीर हालत में रोहड़ू अस्पताल लाया गया और चार घंटे के भीतर उसकी मौत हो गई. इसी वजह से बीमारी के पड़ोसी राज्य तक पहुंचने की खबर आई. हाटकोटी गांव में एक महिला और उसके बेटे को भी बलगम में खून जैसे लक्षणों के साथ अस्पताल पहुंचाया गया.

शुरुआती मरीजों की जान बचाने में रोहड़ू के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. राम लाल की अहम भूमिका रही. उन्होंने शुरुआती मरीजों को तुरंत एंटीबायोटिक दीं, जिससे कई जानें बच सकीं. NICD की टीम 14 फरवरी को प्रभावित इलाके पहुंची और जांच की सिलसिलेवार रिपोर्टों से पुष्टि हुई कि यह येरसिनिया पेस्टिस से होने वाला न्यूमोनिक प्लेग है.

पुष्टि से पहले ही कई जगह हड़कंप मच गया. स्कूल बंद कर दिए गए. प्रशासन ने लोगों को कुछ दिन घरों में रहने की सलाह दी. विशेषज्ञों का कहना था रोहड़ू और जुब्बल इलाके के जंगली चूहे संक्रमण फैला रहे हैं, इसलिए निगरानी जरूरी है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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