Wednesday, April 15, 2026
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Lata Mangeshkar Vs Asha Bhosle: आशा को बढ़ने नहीं देती तो उसका इतना नाम होता क्या? बहन से तल्खी पर जब बोलीं लता मंगेशकर

Lata Mangeshkar On Relation With Sister Asha Bhosle: आशा भोसले अब इस दुनिया में नहीं हैं. शनिवार को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. मगर एक दिन बाद ही उनका निधन हो गया. आशा भोसले के गुज़रने से संगीत के एक दौर का अंत हो गया. आशा भोसले खुद बेहतरीन सिंगर तो थी ही, साथ ही वो स्वर कोकिला लता मंगेशकर की छोटी बहन भी थीं. ऐसे में उन्हें शुरुआत कुछ सालों तक खूब संघर्ष करना पड़ा था. आशा भोसले ने भी कुछ ऐसी बातें कहीं जिससे दोनों की तल्खी आम हो गई थी. हालांलिक एक इंटरव्यू में आशा से तल्खी पर लता मंगेशकर ने कुछ और ही कहा था.

Lata Mangeshkar Vs Asha Bhosle: आशा को बढ़ने नहीं देती तो उसका इतना नाम होता क्या? बहन से तल्खी पर जब बोलीं लता मंगेशकर
Lata Mangeshkar Vs Asha Bhosle: आशा को बढ़ने नहीं देती तो उसका इतना नाम होता क्या? बहन से तल्खी पर जब बोलीं लता मंगेशकर

कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला जब पत्रकार हुआ करते थे तो उन्होंने लता मंगेशकर का 1999 में एक इंटरव्यू किया था. उसी इंटरव्यू में लता मंगेशकर ने अपनी छोटी बहन और सिंगर आशा भोसले को लेकर मन की बात कही थी. जब लता मंगेशकर से सवाल हुआ कि कहा जाता है आपने अपनी बहन को बढ़ने नहीं दिया? इस पर लता मंगेशकर ने दो टूक कहा, “आशा को बढ़ने नहीं दिया होता तो आशा का आज इतना नाम होता?”

“हम दोनों का स्टाइल अलग था”

कहती हैं, “पहली बात तो ये कि एक तो आशा हमारे यहां थी ही नहीं. उसके बाद उसका नाम हुआ. दूसरी बात ये थी कि आशा का स्टाइल अलग था और मेरा स्टाइल अलग था. हम दो बहने हैं, आवाजें भी हमारी मिलती जुलती हैं, लेकिन वो बहुत अलग स्टाइल के गाने गाती थी और मैं अलग स्टाइल के गाती थी. और बहन के साथ ये करने का तो मैं तो कभी सोच ही नहीं सकती हूं.”

“मैं कितनी अच्छी हूं, मैं कितनी बुरी हूं”

जब उनसे सवाल हुआ कि आज भी वैसे ही प्यार कायम है तो लता मंगेशकर ने हां में जवाब दिया था और कहा था कि हम लोगों का अच्छा ही है. उन्होंने कहा था कि हम लोग आज भी साथ हैं. दोनों में तल्खी का भ्रम कैसे फैला और फिल्म ‘साज़’ को लेकर पूछे गए सवाल पर लता मंगेशकर ने कहा था, “सब लोग कोशिश करते हैं (भ्रम फैलाने की).”

फिल्म पर आगे वो कहती हैं, “वो सब गलत था. मैं इस तरह की पोलिटिक्स में पड़ना भी नहीं चाहती हूं…इसका क्या खंडन करें, और जब आदमी खंडन करने जाता है तो लोगों को लगता है कि इन्होंने इसलिए खंडन किया है कि कुछ था. पर जब था ही नहीं कुछ तो मैं क्यों खंडन करूं. मुझे बताया गया था कि ऐसा हो रहा है, वैसा हो रहा है. मैंने कहा था कि मुझे कोई इंट्रस्ट नहीं है. मैं क्या हूं मुझे मालूम है. मैं कितनी अच्छी हूं, मैं कितनी बुरी हूं, मैं जानती हूं. और वाकई में मैंने किसका बुरा किया और किसका अच्छा किया ये भी मैं जानती हूं. पर अगर बातें फैलानी है तो मैं खंडन क्यों करूं.

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