EOS05 एक बेहद आधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है। यह भारत का पहला ऐसा इमेजिंग स्पेसक्राफ्ट है जो सीधे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से काम संभालेगा। पृथ्वी की सतह से लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर तैनात होकर यह उपग्रह भारत और उसके आसपास के पूरे क्षेत्र पर लगातार नजर रखेगा।
यह कक्षा पृथ्वी की घूर्णन गति के साथ तालमेल बनाकर चलती है। इसकी मदद से सीमा पार की संदिग्ध गतिविधियों पर तो नजर रहेगी ही, साथ ही खेती, जल प्रबंधन, जंगलों की स्थिति, समुद्री संसाधनों और शहरी नियोजन में भी सटीक डेटा हासिल होगा।
आपदा में बनेगा ‘संकटमोचन’
इस सैटेलाइट की सबसे बड़ी खासियत इसकी रियलटाइम इमेजिंग कैपेबिलिटी है। जब भी देश में अचानक बाढ़, जंगलों में आग या मौसम का रुख बदलने जैसी आपात स्थिति आएगी, EOS05 तुरंत वहां की तस्वीरें भेजेगा।
दृश्यमान , इन्फ्रारेड, मल्टीस्पेक्ट्रल और हाइपरस्पेक्ट्रल बैंड में तस्वीरें लेने की क्षमता के कारण यह उपग्रह खराब मौसम और रात के अंधेरे में भी साफ डेटा मुहैया कराने में सक्षम है।
रॉकेट और सैटेलाइट का तकनीकी पावरहाउस
51.7 मीटर ऊंचे और 420.5 टन वजनी GSLVF17 रॉकेट ने इस भारीभरकम उपग्रह को उसकी तय कक्षा में पूरी तरह सटीकता के साथ स्थापित कर दिया है। यह तीन चरणों वाला शक्तिशाली लॉन्च वाहन है, जो सॉलिड, लिक्विड और स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन का इस्तेमाल करता है।
इस बार अंतरिक्ष यान की सुरक्षा के लिए 4मीटर व्यास वाला विशेष पेलोड फेयरिंग लगाया गया था। सैटेलाइट अब अपने ऑनबोर्ड थ्रस्टर्स के जरिए अंतिम ऑर्बिट तक पहुंचेगा। जुलाई 2025 में NASAISRO के संयुक्त ‘NISAR’ मिशन की सफलता के बाद GSLV का यह लगातार दूसरा बड़ा कारनामा है।
मिशन के बाद किसने क्या कहा?
इसरो चीफ डॉ. वी. नारायणन ने कहा, “GSLVF17 वाहन ने एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS05 को उसकी तय कक्षा में बेहद सटीकता से पहुंचा दिया है। मैं इस कामयाबी की घोषणा करते हुए बेहद गर्व महसूस कर रहा हूं।”
मिशन डायरेक्टर थॉमस कुरियन ने कहा, “यह हम सभी के लिए बेहद गर्व का पल है। GSLV का यह 19वां सफल मिशन है। EOS05 अब तक का सबसे भारी सैटेलाइट है जिसे GSLV के जरिए GTO कक्षा में भेजा गया है। भले ही लॉन्च में कुछ मिनट लगते हैं, लेकिन इसके पीछे सालों की कड़ी मेहनत छिपी होती है।”
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, “भारत की अंतरिक्ष क्षमताएं लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। यह सैटेलाइट दृश्यमान, इन्फ्रारेड और हाइपरस्पेक्ट्रल बैंड के जरिए देश को एक अभूतपूर्व तकनीकी मजबूती देगा।”
GSLVF17 इतना खास क्यों है?
GSLVF17 तीन चरणों वाला प्रक्षेपण यान है। इसमें सॉलिड, लिक्विड और क्रायोजेनिक प्रोपल्शन तकनीक का इस्तेमाल होता है। जीएसएलवी मार्क2 में स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्टेज है। इसका मकसद भारी उपग्रहों को ज्यादा ऊर्जा वाली कक्षा तक पहुंचाना है।
इस मिशन में करीब 420.5 टन वजन वाले जीएसएलवीएफ17 के ऊपर 4 मीटर व्यास वाला ओजाइव कम्पोजिट पेलोड फेयरिंग लगाया गया था। यह उड़ान के दौरान सैटेलाइट को सुरक्षा देता है।
गगनयान और आने वाले बड़े प्लान
इस शानदार सफलता के बाद इसरो प्रमुख ने एक और बड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारत के पहले मानव रहित ‘गगनयान’ मिशन को इसी कैलेंडर वर्ष में लॉन्च करने के लिए तैयारियां बेहद तेज रफ्तार से चल रही हैं। इसके अलावा, चालू वित्तीय वर्ष में नेविगेशन सैटेलाइट NVS03 समेत छह और बड़े स्पेस मिशन लॉन्च किए जाएंगे।
इसरो प्रमुख ने यह भी बताया कि पहले मानवरहित गगनयान मिशन की तैयारी तेजी से चल रही है और इसी कैलेंडर वर्ष में इसके लॉन्च का लक्ष्य रखा गया है। वित्त वर्ष के दौरान छह और लॉन्च की योजना है। इनमें नेविगेशन सैटेलाइट एनवीएस03 भी शामिल है।
इस मिशन के साथ भारत ने सिर्फ एक और सैटेलाइट लॉन्च नहीं किया है। उसने धरती को ऊपर से देखने और बदलती परिस्थितियों पर तेजी से नजर रखने की अपनी क्षमता को और मजबूत किया है।