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मां की एक बात ने बदल दी जिंदगी… कर्ज में डूबे जे. राजमोहन पिल्लई बन गए 2 अरब डॉलर की कंपनी के मालिक​

दुनिया में वही इंसान असल में सफल है जो मुश्किल हालात में भी कभी हार न माने. बीटा ग्रुप के चेयरमैन जे. राजमोहन पिल्लई की जिंदगी ऐसी ही एक शानदार मिसाल है. 67 साल के राजमोहन पिल्लई आज 2 अरब डॉलर के विशाल बिजनेस साम्राज्य के मालिक हैं. वे एक ग्लोबल बिजनेसमैन होने के साथसाथ […]

दुनिया में वही इंसान असल में सफल है जो मुश्किल हालात में भी कभी हार न माने. बीटा ग्रुप के चेयरमैन जे. राजमोहन पिल्लई की जिंदगी ऐसी ही एक शानदार मिसाल है. 67 साल के राजमोहन पिल्लई आज 2 अरब डॉलर के विशाल बिजनेस साम्राज्य के मालिक हैं. वे एक ग्लोबल बिजनेसमैन होने के साथसाथ एक बेहतरीन लेखक भी हैं. आज उनका कारोबार काजू प्रोसेसिंग, न्यूट किंग जैसे फूड ब्रांड, लॉजिस्टिक्स से लेकर एंटरटेनमेंट तक फैला हुआ है. इसके अलावा वे कई भारतीय स्टार्टअप्स को फंड देकर नई प्रतिभाओं को भी आगे बढ़ा रहे हैं. लेकिन उनकी ये सफलता रातोंरात नहीं मिली है. इसके पीछे एक ऐसा संघर्ष छिपा है जो किसी भी आम इंसान को हिम्मत हारने पर मजबूर कर दे.

18 की उम्र में ही मिला चुनौतियों का पहाड़

राजमोहन की जिंदगी ने तब अचानक करवट ली जब वे बीकॉम फर्स्ट ईयर के छात्र थे. उनके पिता गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे. ऐसे वक्त में उन्हें अचानक परिवार का पूरा बिजनेस संभालना पड़ा. जब उन्होंने जिम्मेदारी ली तो पता चला कि उनका पारिवारिक बिजनेस बुरी तरह कर्ज में डूब चुका है. उनके परिवार की कुल संपत्ति करीब 3 करोड़ रुपये थी, जबकि देनदारी 40 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी थी. संपत्तियां कुर्क हो चुकी थीं. उनके पास जो कार थी, उसे भी अटैच कर लिया गया था. साथ ही उन पर 175 से ज्यादा कानूनी मामले चल रहे थे. ऐसे विपरीत हालात में भी उन्होंने सबसे पहले अपने मजदूरों की मजदूरी चुकाने का फैसला किया.

27 साल तक चला कर्ज चुकाने का सफर

युवा राजमोहन के पास कोई खास व्यावहारिक अनुभव नहीं था. बैंक लगातार पैसे मांग रहे थे. हर तरफ से उन्हें सिर्फ निराशा ही मिल रही थी. एक वक्त ऐसा भी था जब उन्हें हर महीने 55 लाख रुपये सिर्फ ब्याज के तौर पर चुकाने पड़ते थे. लेकिन उन्होंने भागने के बजाय हालात से लड़ने का साहसिक फैसला किया. अगले 27 सालों तक कर्ज चुकाना ही उनका इकलौता लक्ष्य बन गया. उन्होंने मुनाफा कमाने की जगह खुद को कर्जमुक्त करने पर सबसे ज्यादा फोकस किया. भाई राजन पिल्लई के अचानक निधन के बाद उन पर 103 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त कर्ज भी आ गया. इन सबके बावजूद वे डटे रहे. उन्होंने अपना सारा कर्ज पूरी तरह चुकता कर दिया.

मां की सीख बनी सबसे बड़ी ताकत

राजमोहन का संघर्ष सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं था. बचपन में वे डिस्लेक्सिया जैसी बीमारी से जूझ रहे थे. पढ़ाई में उन्हें काफी दिक्कत होती थी. उस वक्त उनकी मां ने उन्हें बहुत सपोर्ट किया. मां ने ही उन्हें अनुशासन सिखाया. जब 18 साल की उम्र में उन पर कर्ज का भारी बोझ पड़ा, तब भी उनकी मां ने ही उन्हें हौसला दिया. मां ने उन्हें याद दिलाया कि उनके परिवार ने समाज में एक बड़ा नाम कमाया है. उस नाम की रक्षा करना ही अब उनका सबसे बड़ा फर्ज है. मां की इसी बात ने उन्हें जिंदगी के सबसे मुश्किल वक्त में चट्टान की तरह खड़े रहने की प्रेरणा दी.

आज बीटा ग्रुप का डंका पूरी दुनिया में

आज दशकों की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने बीटा बिजनेस ग्रुप को एक मल्टीनेशनल कंपनी बना दिया है. काजू, बादाम, खजूर से लेकर पैकेज्ड फूड सेक्टर में उनकी कंपनी का बहुत बड़ा नाम है. बेवरेज, कंसल्टेंसी से लेकर लॉजिस्टिक्स तक में उनका कारोबार मजबूती से स्थापित है. राजमोहन पिल्लई की ये कहानी सिर्फ दौलत कमाने की कहानी नहीं है. ये कहानी उस 18 साल के लड़के की है जिसने अपने 27 साल सिर्फ अपने परिवार का सम्मान बचाने में लगा दिए. उन्होंने अपनी मेहनत से खुद अपनी तकदीर लिखी है. आज वे हर उस इंसान के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा बन चुके हैं जो जीवन की चुनौतियों से लड़कर आगे बढ़ना चाहता है.

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संपादकीय टीम

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