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ईरान की लाइफलाइन काट दी… ट्रंप ने 6 तरफ से घेरा​

तेहरान: ईरान के होर्मोजगान प्रांत में बने सैन्य ठिकानों पर अमेरिका ने जो ताबड़तोड़ मिसाइलें बरसाई हैं, वो कोई मामूली हमला नहीं हैं. ये राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वो खतरनाक और शातिर ‘मास्टरप्लान’ है, जिसके जरिए होर्मुज स्ट्रेट में एक बहुत बड़े ग्राउंड ऑपरेशन की जमीन तैयार की जा रही है. अमेरिका इन हवाई हमलों […]

तेहरान: ईरान के होर्मोजगान प्रांत में बने सैन्य ठिकानों पर अमेरिका ने जो ताबड़तोड़ मिसाइलें बरसाई हैं, वो कोई मामूली हमला नहीं हैं. ये राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वो खतरनाक और शातिर ‘मास्टरप्लान’ है, जिसके जरिए होर्मुज स्ट्रेट में एक बहुत बड़े ग्राउंड ऑपरेशन की जमीन तैयार की जा रही है. अमेरिका इन हवाई हमलों से ईरान के पूरे डिफेंस सिस्टम को चुनचुनकर नेस्तनाबूत कर रहा है, ताकि जब अमेरिकी सेना जमीन पर कदम रखे तो उसे रोकने वाला कोई न बचे. सैन्य इतिहास में ये एक क्लासिक रणनीति रही है, जहां किसी भी बड़े जमीनी धावे से पहले दुश्मन की रीढ़ की हड्डी को पूरी तरह तोड़कर उसे अपाहिज बना दिया जाता है.

इस जंग में अमेरिका की सबसे घातक रणनीति है ‘लॉजिस्टिकल आइसोलेशन’, यानी ईरान का राशन, गोलाबारूद और हथियारों की सप्लाई लाइन को पूरी तरह से काट देना. अमेरिकी फाइटर जेट्स और मिसाइलें जानबूझकर ईरान के पुलों, सड़कों और रेलवे नेटवर्क्स को मटियामेट कर रही हैं. अमेरिका का सबसे बड़ा टारगेट ईरान का ‘बंदर अब्बास’ बंदरगाह है, जो अकेले पूरे ईरान के 85 परसेंट व्यापार को संभालता है.

बंदर अब्बास सिर्फ एक बंदरगाह नहीं, बल्कि ईरान की असली लाइफलाइन है. देश के कोनेकोने में मौजूद ईरानी सेना को हथियार, मिसाइलें, ईंधन और खानेपीने का सामान इसी रास्ते से पहुंचता है. अमेरिका का प्लान है कि बंदर अब्बास को बाकी के ईरान से पूरी तरह से अलगथलग कर दिया जाए. अगर ये बंदरगाह देश से कट गया तो ईरानी सेना के पास न तो गोलियां बचेंगी और न ही राशन, जिससे उनकी युद्ध लड़ने की क्षमता पूरी तरह दम तोड़ देगी.

ग्राउंड ऑपरेशन अमेरिका के लिए आसान नहीं होगा
भले ही अमेरिका ने आसमान से बम बरसाकर ईरान को भारी नुकसान पहुंचाया हो, लेकिन डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि होर्मोजगान प्रांत में जमीनी अभियान (शुरू करना अमेरिका के लिए एक खूनी दलदल साबित हो सकता है. भले ही ईरानी किलेबंदी आज कमजोर दिख रही हो, लेकिन जैसे ही अमेरिकी सैनिक इस धरती पर पैर रखेंगे, वो सीधे ईरान के बिछाए जाल में फंस जाएंगे और बैठेबिठाए आसान निशाना बन जाएंगे.

होर्मोजगान की तटरेखा करीब 900 से 1000 किलोमीटर लंबी है. इस उबड़खाबड़ इलाके में ईरान ने अपनी खतरनाक मिसाइलें, सुसाइड ड्रोन और घातक तोपखाने जमीन के अंदर बंकरों में छुपा रखे हैं. यहां तक कि खार्ग द्वीप जैसे छोटेछोटे टापुओं पर कब्जा करना और वहां टिके रहना भी अमेरिका के लिए बहुत भारी कीमत मांग सकता है.

भारी तबाही के बीच छिपी बड़ी चुनौती
ईरान ने बीते सालों में अपने कोस्टल डिफेंस सिस्टम को इस कदर खतरनाक तरीके से तैयार किया है कि वो किसी भी समुद्री हमले का सामना कर सकता है और दुश्मनों को बड़ा नुकसान भी पहुंचा सकता है. ईरान के छोटेछोटे द्वीपों पर एक्टिव मिसाइल बैटरियां आज भी सक्रिय हैं, जो किसी भी अमेरिकी जंगी जहाज को पल भर में निशाना बना सकती हैं.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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