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बागपत के ‘हवेली वाले’ का बेटा कैसे बना DGP? मौत के बाद भाई बोले- ‘अनुराग ऐसे इंसान नहीं, जो सुसाइड करते’​

Tripura DGP Anurag Dhankar death News: त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक अनुराग धनकड़ के अगरतला स्थित पुलिस मुख्यालय में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर ने पूरे बागपत जिले को गमगीन कर दिया है. जैसे ही घटना की सूचना उनके पैतृक गांव बिहारीपुर पहुंची, पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई. परिजन तुरंत त्रिपुरा के […]

Tripura DGP Anurag Dhankar death News: त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक अनुराग धनकड़ के अगरतला स्थित पुलिस मुख्यालय में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर ने पूरे बागपत जिले को गमगीन कर दिया है. जैसे ही घटना की सूचना उनके पैतृक गांव बिहारीपुर पहुंची, पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई. परिजन तुरंत त्रिपुरा के लिए रवाना हो गए हैं. फिलहाल उनके अंतिम संस्कार को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. वहीं, उनकी मौत के कारणों की जांच जारी है.

अनुराग धनकड़ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बिहारीपुर गांव के निवासी थे. गांव में उनका परिवार आज भी “हवेली वाले” परिवार के नाम से जाना जाता है. ग्रामीण बताते हैं कि अनुराग और उनके दोनों भाइयों का जन्म गांव की इसी पैतृक हवेली में हुआ था. हालांकि नौकरी और जिम्मेदारियों के चलते पूरा परिवार वर्षों पहले गांव छोड़कर बाहर बस गया. ग्रामीणों के मुताबिक, करीब 25 साल पहले अनुराग धनकड़ गांव में एक शादी समारोह में शामिल होने आए थे. इसके बाद वह दोबारा गांव नहीं आ सके. उनकी पैतृक हवेली आज भी गांव में मौजूद है, लेकिन लंबे समय से बंद पड़ी है.

गांव के स्कूल से शुरू हुई पढ़ाई

अनुराग धनकड़ ने अपनी शुरुआती शिक्षा बिहारीपुर के प्राथमिक विद्यालय से प्राप्त की. इसके बाद सरूरपुर खेड़की स्थित इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की. उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने बड़ौत के जनता वैदिक महाविद्यालय से बीएससी की डिग्री हासिल की. पढ़ाई पूरी करने के बाद उनकी नियुक्ति बड़ौत स्थित सिंडिकेट बैंक में फील्ड ऑफिसर के पद पर हुई. नौकरी करते हुए उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी जारी रखी और वर्ष 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी बने. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और देश की कई प्रमुख जांच एवं सुरक्षा एजेंसियों में अहम जिम्मेदारियां निभाईं.

तीन दशक से अधिक लंबे करियर में अनुराग धनकड़ ने सीबीआई में एसपी, डीआईजी, ज्वाइंट डायरेक्टर और एडिशनल डायरेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया. उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक घोटाले से जुड़े नीरव मोदी मामले की जांच में भी अहम भूमिका निभाई. इसके अलावा वह सीमा सुरक्षा बल , केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में आईजी तथा संयुक्त राष्ट्र के कोसोवो मिशन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके थे. गृह मंत्रालय के अधीन गठित 1984 के सिख विरोधी दंगों की विशेष जांच टीम के अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने कार्य किया.

मई 2025 में उन्हें त्रिपुरा का पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया था. इससे पहले वह राज्य के खुफिया विभाग में उप महानिदेशक के पद पर भी सेवाएं दे चुके थे.

10 जुलाई को आखिरी बार आए थे बड़ौत

परिजनों के अनुसार अनुराग धनकड़ 10 जुलाई को अपनी पत्नी कल्पना के साथ बड़ौत आए थे. वह दिल्ली में एक बैठक में शामिल होने के बाद छोटे भाई रविराज धनकड़ से मिलने पहुंचे थे. परिवार के साथ उन्होंने काफी समय बिताया और सामान्य बातचीत की. परिजनों का कहना है कि उस दौरान उनके व्यवहार से ऐसा बिल्कुल नहीं लगा कि वह किसी मानसिक तनाव से गुजर रहे थे.

अनुराग धनकड़ का विवाह मुजफ्फरनगर जिले के बुढ़ाना क्षेत्र के शाहपुर गांव में हुआ था. परिवार में उनकी पत्नी कल्पना, मां रगबीरी देवी और एक बेटा है, जो वर्तमान में कनाडा में रहता है.

‘ऐसे इंसान आत्महत्या नहीं कर सकते’

अनुराग धनकड़ के ममेरे भाई अमित कुमार ने बताया कि वह बेहद मिलनसार, सादगी पसंद और संतुलित व्यक्तित्व के अधिकारी थे. उन्होंने कहा कि मीडिया में आत्महत्या की जो बातें सामने आ रही हैं, उन पर उन्हें विश्वास नहीं होता.

उनके मुताबिक, अनुराग धनकड़ हर परिस्थिति का धैर्य और समझदारी से सामना करने वाले व्यक्ति थे. उन्होंने पूरे सेवा जीवन में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी. जब भी बागपत आते थे, गांव और परिवार के लोगों से आत्मीयता के साथ मिलते थे. बड़े पद पर होने के बावजूद उनमें कभी अहंकार नहीं था.

गांव में पसरा सन्नाटा, निष्पक्ष जांच की मांग

बिहारीपुर गांव के लोगों का कहना है कि अनुराग धनकड़ केवल परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे गांव का गौरव थे. एक साधारण ग्रामीण परिवेश से निकलकर देश के शीर्ष पुलिस अधिकारी बनने तक का उनका सफर युवाओं के लिए प्रेरणा है.

उधर, बागपत के पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय ने बताया कि मीडिया के माध्यम से अनुराग धनकड़ के निधन की जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम को उनके पैतृक गांव भेजा गया, लेकिन वहां परिवार का कोई सदस्य नहीं मिला और पैतृक मकान बंद मिला. उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार कहां होगा, इसकी अभी आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. फिलहाल अनुराग धनकड़ के निधन की परिस्थितियों की जांच जारी है. परिवार और ग्रामीणों को उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष होगी और उनकी मौत से जुड़े सभी सवालों के जवाब सामने आएंगे.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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