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World Liver Day: एनर्जी ड्रिंक लिवर को कर रहीं खराब, रिसर्च में दावा

आज के समय में एनर्जी ड्रिंक का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. थकान दूर करने, तुरंत एनर्जी पाने और काम या पढ़ाई में फोकस बढ़ाने के लिए कई लोग इनका सेवन करने लगे हैं. खासकर युवा वर्ग इसे अपनी डेली लाइफस्टाइल का हिस्सा बना रहा है. देर रात तक जागना, लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करना और फास्ट लाइफस्टाइल ने इन ड्रिंक्स की मांग और बढ़ा दी है. लेकिन विश्व लिवर दिवस के मौके पर विशेषज्ञों ने एक गंभीर चेतावनी दी है कि एनर्जी ड्रिंक्स का बढ़ता सेवन युवाओं के लिवर पर भारी पड़ रहा है.

World Liver Day: एनर्जी ड्रिंक लिवर को कर रहीं खराब, रिसर्च में दावा
World Liver Day: एनर्जी ड्रिंक लिवर को कर रहीं खराब, रिसर्च में दावा

पहले जो से जुड़ी बीमारियां अधिक उम्र के लोगों में देखने को मिलती थीं, अब वही समस्याएं 20 से 30 साल के युवाओं में भी तेजी से सामने आ रही हैं. हाल की मेडिकल रिपोर्ट्स और BMJ Case Reports में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, इन ड्रिंक्स में मौजूद ज्यादा कैफीन, शुगर और केमिकल्स लिवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि यह आदत अब एक छिपा हुआ खतरा बनती जा रही है, जो लंबे समय में गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है. बिना जानकारी के बार-बार सेवन करना जोखिम को और बढ़ा देता है. आइए इस रिसर्च के बारे में डिटेल में जानते हैं.

एनर्जी ड्रिंक्स का ज्यादा सेवन लिवर के लिए क्यों खतरनाक? क्या कहती है रिसर्च

में सामने आया कि एनर्जी ड्रिंक्स का अधिक सेवन लिवर के लिए गंभीर नुकसानदेह हो सकता है. इस स्टडी के अनुसार, इनमें मौजूद नियासिन यानी विटामिन बी3 की अधिक मात्रा लिवर पर जहरीला प्रभाव डाल सकती है, जिससे एक्यूट हेपेटाइटिस जैसी स्थिति बन सकती है. इसके अलावा, इन ड्रिंक्स में हाई शुगर, कैफीन और टॉरिन जैसे तत्व होते हैं, जो लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं.

कई बार इनमें कैफीन की मात्रा सुरक्षित सीमा से भी अधिक होती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है. लगातार सेवन से लिवर में फैट जमा होने लगता है, जिससे सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है. समय के साथ यह स्थिति लिवर की क्षमता को प्रभावित कर सकती है और गंभीर रोगों का खतरा बढ़ा सकती है. अगर समय रहते इस आदत को नहीं रोका गया, तो लिवर डैमेज का खतरा काफी बढ़ सकता है.

युवाओं में तेजी से बढ़ रहे लिवर रोग, 25 से 30% शहरी आबादी प्रभावित

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में युवाओं के बीच लिवर से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. खासकर 20 से 30 वर्ष के आयु वर्ग में फैटी लिवर और अन्य लिवर रोगों के मामले अधिक देखने को मिल रहे हैं. इसका एक बड़ा कारण एनर्जी ड्रिंक्स, मीठे पेय पदार्थ और अनहेल्दी लाइफस्टाइल है.

रिपोर्ट्स बताती हैं कि शहरी आबादी का लगभग 25 से 30% हिस्सा नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) से प्रभावित हो सकता है. यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब लोग लंबे समय तक इन पेय पदार्थों का सेवन करते रहते हैं और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं. फिजिकल एक्टिविटी की कमी और खराब खानपान भी इस समस्या को और बढ़ाते हैं. ऐसे में समय रहते जागरूक होना बेहद जरूरी है.

शराब के साथ सेवन और लगातार आदत बनना सबसे बड़ा खतरा

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि एनर्जी ड्रिंक्स को शराब के साथ मिलाकर पीना बेहद खतरनाक हो सकता है. कैफीन का प्रभाव शराब के नशे को छिपा देता है, जिससे व्यक्ति अपनी सीमा से अधिक शराब का सेवन कर लेता है. इससे लिवर पर डबल असर पड़ता है और नुकसान तेजी से बढ़ता है. लगातार और अधिक मात्रा में सेवन करने से लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी गंभीर स्थितियां विकसित हो सकती हैं.

इसके अलावा, यह आदत धीरे-धीरे लत का रूप भी ले सकती है, जिससे व्यक्ति के लिए इसे छोड़ना मुश्किल हो जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस आदत को समय रहते कंट्रोल करना बेहद जरूरी है, साथ ही संतुलित डाइट, नियमित व्यायाम और जागरूकता ही इससे बचाव के सबसे प्रभावी तरीके हैं.

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