Wednesday, April 15, 2026
Viral

होर्मुज बना जंग का मैदान…ईरान-अमेरिका आमने-सामने, क्या फिर छिड़ेगी जंग?

इस वक्त पूरी दुनिया को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की फिक्र है, जहां से दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल गुजरता है लेकिन अभी वहां किसी भी वक्त जंग की शुरुआत हो सकती है. अमेरिका से युद्ध के बीच ही ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की तालाबंदी कर दी थी. वहां से गुजरने वाले जहाजों से वो टोल वसूलने की योजना बना चुका है लेकिन अब ट्रंप ने भी वहां पर नाकाबंदी शुरू कर दी है. शाम साढ़े सात बजे डेडलाइन खत्म होते ही अमेरिकी नेवी ने होर्मुज के पास अपनी विशाल सेना की तैनाती कर दी यानी ईरानी बंदरगाहों पर जहाजों की आवाजाही पर ब्रेक लगाने का काम अमेरिकी नेवी ने शुरू कर दिया है यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास अमेरिकी नेवी सुपर एक्टिव मोड में है.

होर्मुज बना जंग का मैदान…ईरान-अमेरिका आमने-सामने, क्या फिर छिड़ेगी जंग?
होर्मुज बना जंग का मैदान…ईरान-अमेरिका आमने-सामने, क्या फिर छिड़ेगी जंग?

ईरान की नेवी ने अमेरिकी नौसेना को वहां से दूर रहने की सख्त चेतावनी दी है. नेतन्याहू ने आग में घी डालते हुए अमेरिकी नाकाबंदी का समर्थन किया है. होर्मुज का असर पूरी दुनिया पर पड़ना शुरु हो चुका है और इसी वजह से, होर्मुज से महंगाई वाली माइन्स का विस्फोट होना शुरू भी हो चुका है. अमेरिकी नाकाबंदी के बाद ट्रंप ने देर शाम ईरान को नई धमकी दी.

ईरानी जहाज US नेवी के करीब आया तो नष्ट कर देंगे- ट्रंप

ट्रंप ने कहा कि नाकाबंदी के दौरान अगर कोई भी ईरानी जहाज यूएस नेवी के करीब आया तो उसे तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा. ये कार्रवाई बहुत बेरहम होगी, वैसे ही होगी, जैसे अमेरिकी नौसेना समंदर में नावों पर सवार ड्रग डीलरों के खिलाफ कार्रवाई करती है. होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नाकाबंदी ईरान के लिए बेहद गंभीर हैं और अमेरिका के खिलाफ ईरान के तेवर उससे भी ज्यादा विस्फोटक क्योंकि अमेरिकी नौसेना ईरान के पोर्ट पर आने-जाने वाले शिप को रोकना शुरू कर चुकी है तो IRGC का कहना है कि वो अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को ध्वस्त करने के लिए पूरी ताकत लगाएगा.

होर्मुज में नौसेना के जहाजों पर हमला करेंगे- IRGC

अमेरिका का कहना है कि होर्मुज पर उसकी नई नीति सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी जबकि, IRGC का कहना है कि वो होर्मुज में नौसेना के जहाजों पर हमला करेगा. अमेरिका का कहना है कि होर्मुज से गैर-ईरान रूट वाले जहाज प्रभावित नहीं होंगे जबकि ईरान का कहना है कि जो भी मिलिट्री शिप होर्मुज की ओर बढ़ेगा उसपर एक्शन लेंगे. अमेरिका का कहना है कि इस ऑपरेशन में उसके साथ कई पश्चिमी देश शामिल हैं. हालांकि, ब्रिटेन ने आज ही ट्रंप के इस दावे से खुद को अलग कर लिया है. पीएम कीर स्टार्मर ने कहा की होर्मुज की नाकाबंदी में हम अमेरिका के साथ नहीं हैं. ब्रिटेन के साथ ऑस्ट्रेलिया ने भी इस मुद्दे पर ट्रंप का साथ छोड़ दिया है जबकि, IRGC का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से ईरान के कंट्रोल में है.

नाकाबंदी से ईरान से तेल निर्यात पर जबरदस्त असर पड़ेगा

अमेरिका की दाल यहां भी नहीं गलने वाली है. अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री जहाजों को US नेवी से संपर्क बनाए रखने की सलाह दी है तो वहीं, IRGC ने कहा है कि सिर्फ मित्र देशों के कमर्शियल शिप को यहां से गुजरने की परमीशन दी जाएगी. अमेरिका की इस नाकेबंदी के बाद ईरान के किन-किन पोर्ट्स पर असर पड़ सकता है और इसका ईरान क्या जवाब दे सकता है समझना जरुरी है. इस वक्त अरब सागर में अमेरिका का विमान वाहक पोत USS अब्राहम लिंकन मौजूद है और चीन जैसे एशियाई देश से ईरान जाने वाले जहाजों के बीच में वो नाकाबंदी के बाद सबसे बड़ा रोड़ा बन सकता है. होर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी से ईरान से तेल निर्यात पर जबरदस्त असर पड़ेगा.

खर्ग आइलैंड और बंदर अब्बास पोर्ट प्रभावित हो सकता है. खर्ग से ईरान की 90% तेल वाली जरूरत पूरी होती है. वहीं, इस नाकाबंदी से ईरान के जास्क टर्मिनल और बंदर खुमैनी पर भी बुरा असर होगा. ईरान ने धमकी दी है कि वो खाड़ी में मौजूद अमेरिकी मददगार देशों के पोर्ट को टारगेट करेगा. फारस की खाड़ी या ओमान सागर में कोई बंदरगाह सुरक्षित नहीं बचेंगे. ईरानी टारगेट वाली एक लिस्ट भी वायरल है.

संयुक्त अरब अमीरात में फुजैराह तेल बंदरगाह, जेबेल अली बंदरगाह और अल हमरिया पोर्ट ईरान के टारगेट पर आ सकते हैं. सऊदी अरब में किंग फहद औद्योगिक बंदरगाह, रास तनूरा रिफाइनरी/बंदरगाह और यानबू बंदरगाह को ईरान निशाने पर ले सकता है. बहरीन में खलीफा बिन सलमान बंदरगाह पर ईरान ड्रोन मिसाइलों की वर्षा कर सकता है और कुवैत में शुएबा बंदरगाह को बर्बाद कर सकता है। ईरान ने कहा है कि ‘बंदरगाहों की सुरक्षा या तो सबके लिए होगी या किसी के लिए नहीं होगी.

‘दुश्मन बचकर नहीं जाएंगे, 10 लाख सैनिक युद्ध के लिए तैयार’

होर्मुज पर अमेरिका लगातार ईरान को चेतावनी दे रहा है तो IRGC ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी वक्त अमेरिकी नौसेना पर हमला कर सकते हैं. ईरान के 10 लाख सैनिक युद्ध के लिए तैयार हैं. ग्राउंड ऑपरेशन हुआ तो दुश्मन बचकर नहीं जाएंगे. ईरानी संसद के स्पीकर कालिबाफ ने चेतावनी दी और कहा कि 47 वर्षों से अबतक ईरान ने कभी सरेंडर नहीं किया और अमेरिका ने इस बार अगर होर्मुज पर जंग लड़ी तो हम भी युद्ध से जवाब देंगे. इस बीच IRGC होर्मुज स्ट्रेट में ड्रोन से जहाजों पर नजर रख रही है. IRGC का कहना है कि कोई भी गलत कदम दुश्मन के लिए भंवर में फंसने जैसा होगा, जबकि ईरान की नौसेना ने एक वीडियो जारी करते हुए एक बड़ा दावा किया है.

होर्मुज में नाकाबंदी के लिए अमेरिका अपनी सबसे बड़ी सैन्य तैनाती कर रहा है. कुछ जानकारों को ये शक है, कि इसी तैनाती के लिए ट्रंप ने 2 हफ्ते के सीज फायर का प्लान बनाया था. सच क्या है नहीं मालूम लेकिन पश्चिमी एशिया की ओर अमेरिकी वॉरप्लेन की बड़ी मूवमेंट देखी गई है. ऐसा इसलिए है क्योंकि नाकाबंदी को सफल बनाने के लिए उसे अपनी नेवी और वायुसेना की पूरी ताकत दिखानी होगी. ईरानी बंदरगाहों में आने जाने वाले जहाजों को रोकने के लिए मसल पावर की जरूरत पड़ सकती है.

ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए कई विकल्प तलाश रहे ट्रंप

वहीं, अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट से बारूदी सुरंगों को नष्ट करना होगा. कहा जा रहा है कि ईरानी माइंस साफ करने के लिए अमेरिका माइंसवीपर भेजेगा. ट्रंप का कहना है कि एडवांस और पारंपरिक जहाजों की तैनाती होगी. ट्रंप ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए कई विकल्प तलाश रहे हैं. अमेरिकी सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी समय ईरान के रणनीतिक ठिकाने टारगेट किए जा सकें. ऐसी खबरें हैं कि पेंटागन ईरान में संभावित टारगेट की लिस्ट तैयार कर रहा है. ट्रंप का मानना है कि सैन्य शक्ति के दम पर ही ईरान को झुकाया जा सकता है.

ब्यूरो रिपोर्ट, टीवी9 भारतवर्ष

khabarmonkey@gmail.com

Leave a Reply