नई दिल्ली | देश में जनगणना 2027 को लेकर केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। गृह मंत्रालय ने जनगणना नियम, 1990 में संशोधन करते हुए निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को भी जनगणना कार्य में गणनाकार नियुक्त किए जाने का रास्ता स्पष्ट कर दिया है। नए नियमों के तहत अब सरकारी ही नहीं, बल्कि सहायता प्राप्त और गैरसहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षक भी जनगणना की जिम्मेदारी निभाने के लिए नियुक्त किए जा सकते हैं।

केंद्र सरकार की 16 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना के अनुसार, जनगणना कार्य के लिए नियुक्त किए जा सकने वाले लोगों की श्रेणी का विस्तार किया गया है।
1. निजी स्कूलों के शिक्षक भी होंगे पात्र: सरकारी, स्थानीय निकायों, सहायता प्राप्त और गैरसहायता प्राप्त निजी संस्थानों, समितियों तथा ट्रस्टों द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को गणनाकार बनाया जा सकता है।
2. अन्य कर्मचारियों को भी मौका: केंद्र और राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, बैंकों, कंपनियों और विभिन्न संस्थानों के लिपिकों एवं अधिकारियों को भी नियुक्त किया जा सकता है।
3. उपयुक्त व्यक्तियों की नियुक्ति का प्रावधान: राज्य सरकारें और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन जनगणना कार्य के लिए अन्य उपयुक्त व्यक्तियों को भी नियुक्त कर सकते हैं।
आखिर क्यों अहम है यह बदलाव?
जनगणना देश की आबादी, सामाजिक स्थिति और आर्थिक परिस्थितियों से जुड़ा एक बड़ा राष्ट्रीय अभियान है। इसके लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत होती है। निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को पात्रता के दायरे में शामिल करने से जनगणना के लिए उपलब्ध कर्मचारियों का दायरा बढ़ सकता है।
यह बदलाव ऐसे समय आया है, जब हरियाणा में गैरसहायता प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी पर लगाने के फैसले को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने 8 अक्टूबर को हरियाणा सरकार के दो संबंधित आदेशों पर रोक लगाई थी। इस मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2027 को निर्धारित बताई गई है।
हालांकि, नियमों में संशोधन का अर्थ यह नहीं है कि हर निजी शिक्षक की ड्यूटी अपनेआप लग जाएगी। नियुक्ति संबंधित सरकार या प्रशासन के निर्णय और लागू निर्देशों के अनुसार होगी।
जनगणना 2027 देश की आबादी की व्यापक गणना होगी। इसमें घरों, परिवारों और नागरिकों से संबंधित निर्धारित जानकारी जुटाई जाएगी। उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्यों में जनसंख्या गणना का कार्यक्रम दिसंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच निर्धारित किया गया है।