के बिजनौर विकास भवन के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन विभाग में 73 लाख रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ियों का मामला सामने आया है। आरोप है कि स्वयं सहायता समूहों और आउटलेट चलाने के नाम पर नियमों के खिलाफ भुगतान किए गए। मामला सामने आने के बाद मुख्य विकास अधिकारी ने जांच के आदेश दिए हैं। विभाग के कई अधिकारी और संविदा पर काम करने वाले DMM और BMM भी जांच के दायरे में हैं।

बैंक सखी पर 38 लाख रुपये निकालने का आरोप
मोहम्मदपुर देवमल CLF में बैंक सखी बद्रीनाथ पर अकाउंटेंट के साथ मिलकर समूह के 38 लाख रुपए निकालने का आरोप है। इस मामले की जांच की जा रही है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि पैसा किस तरह निकाला गया और इसमें किन लोगों की भूमिका थी।
दो आउटलेट के नाम पर 34 लाख के भुगतान पर सवाल
स्वरोजगार योजना के तहत सरकारी पैसे के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठे हैं। आरोप है कि दो आउटलेट के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर 1717 लाख रुपये का भुगतान किया गया। यानी दोनों आउटलेट के लिए कुल 34 लाख रुपये दिए गए।
उद्घाटन के नाम पर तीन बार भुगतान
आरोप है कि आउटलेट के उद्घाटन के नाम पर तीन बार में एक लाख रुपए का भुगतान किया गया। आउटलेट का संचालन कौन कर रहा था और उनका मालिक कौन है, इसे लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
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34 लाख के लोन का रीपेमेंट नहीं
34 लाख रुपए के लोन का रीपेमेंट नहीं होने का मामला भी जांच के दायरे में है। एक मामले में 35 लाख और दूसरे में 38 लाख रुपए की कथित वित्तीय गड़बड़ियों की जांच की जा रही है।अब CDO के आदेश पर होने वाली जांच में पता चलेगा कि सरकारी पैसे के भुगतान में कहां गड़बड़ी हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। फिलहाल ये आरोप हैं और जांच बाकी है।