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सुलगा फ्रांस, Gen-Z का प्रदर्शन हुआ हिंसक, कैसे हुई शुरुआत? पढ़ें पूरी कहानी​

फ्रांस में युवा सड़कों पर उतर आए हैं. मांग है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो. इसकी शुरुआत सितम्बर में पेरिस के उत्तरी हिस्से हुई थी जो अब पूरे देश में फैल गया गया है. दिलचस्प बात है कि स्कूलकॉलेजों में बढ़ती छात्रों की भीड़, जर्जर इमारतें और शिक्षकों की कमी सिर्फ भारत में नहीं […]

फ्रांस में युवा सड़कों पर उतर आए हैं. मांग है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो. इसकी शुरुआत सितम्बर में पेरिस के उत्तरी हिस्से हुई थी जो अब पूरे देश में फैल गया गया है. दिलचस्प बात है कि स्कूलकॉलेजों में बढ़ती छात्रों की भीड़, जर्जर इमारतें और शिक्षकों की कमी सिर्फ भारत में नहीं है, फ्रांस जैसा देश भी इससे जूझ रहा है. यही मुद्दे फ्रांस में विरोध कर रहे छात्रों उठाए हैं. पिछले एक हफ्ते में सैकड़ों स्कूलों को बंद कराए गए हैं.

प्रदर्शन अब हिंसक हो गया है. आंदोलन के दौरान कई जगह पुलिस और छात्रों के बीच झड़प हुई. लेंस शहर के पास हुए धमाके में छात्र का हाथ फ्रैक्चर हुआ. एक 14 साल के छात्र के सिर पर आंसू गैस गोला गिरने की खबर आई. जबड़े में दो जगह फ्रैक्चर होने के बाद सर्जरी हुई.

रॉयटर्स के मुताबिक, करीब 400 स्कूल बंद रहे और कई जगह हिंसा हुई. फ्रांस के शिक्षा मंत्री ने हिंसा को ‘हिंसक अल्पसंख्यकों का काम बताया है. न्याय मंत्रालय के मुताबिक गिरफ्तार 5,060 लोगों में से 87 प्रतिशत नाबालिग हैं. सरकार का आरोप है कि आंदोलन की शुरुआत हार्डलेफ्ट नेताओं ने की, लेकिन LFI सांसद लुई बोयार्ड ने इससे इनकार किया.

क्यों शुरू हुआ था प्रदर्शन?

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, पेरिस के उत्तर में स्थित एक उपनगरीय हाई स्कूल में हड़ताली शिक्षकों के समर्थन में शुरू हुआ प्रदर्शन अब एक राष्ट्रीय संकट में तब्दील हो गया है. 5,000 से अधिक लोगों को पुलिस हिरासत में लिया गया है, जिनमें से अधिकांश नाबालिग हैं. उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है.

प्रदर्शन कर रहे छात्रों की कई मांगे हैं.

छात्र, शिक्षक और पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. उत्तरपूर्वी शहर लेंस में एक छात्र ने कथित तौर पर ग्रेनेड उठाते समय अपना हाथ खो दिया और टूर्स में एक अन्य छात्र ने अपनी एक आंख की रोशनी खो दी.

मांगे मानी जाने के बाद भड़की चिंगारी

पेरिस के सेंटएक्सुपरी हाई स्कूल में 21 सितंबर को हुए शुरुआती विरोध प्रदर्शन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया. छात्र अपने शिक्षकों के साथ मिलकर कर्मचारियों और संसाधनों की कमी का विरोध कर रहे थे. जब उनकी मांगें मान ली गईं और स्कूल में अतिरिक्त कर्मचारी भेजे गए, तो हड़ताल समाप्त हो गई. लेकिन तब तक चिंगारी भड़क चुकी थी. यही मांग दूसरे स्कूलों के लिए भी की जाने लगी. नतीजा, प्रदर्शन पूरे देश में फैल गया. नतीजा, फ्रांस के शिक्षा मंत्रालय के लिए प्रदर्शन संकट बन गया.

सितंबर पर शुरू हुआ प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुका है.

छात्राें ने क्याक्या किया?

प्रदर्शन के साथ पेरिस और आसपास के इलाकों के हाई स्कूलों के छात्रों ने स्कूलों के गेट बंद करने शुरू कर दिए. कुछ ही दिनों में पूरे देश में, उत्तर में लिले से लेकर दक्षिण में मार्सिले तक, स्कूलों को बंद किया जाने लगा. छात्रों ने कूड़ेदानों में आग लगाई. बैरिकेड लगाए गए. शिक्षकों पर हमला हुए और पुलिस से झड़प की तस्वीरें सामने आईं.

विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से 100 से अधिक हाई स्कूलों को नुकसान पहुंचा. आलोचकों ने पुलिस पर अत्यधिक सख्ती बरतने का आरोप लगाया.

3.5 million people have protested in France & 800K alone demonstrated in Paris against the decision of a one man in a democratic country. This is what you call fight for democracy. https://t.co/y6kCfKcnDF

— GuntherEagleman🇺🇲 October 3, 2026

हिंसा और विरोध प्रदर्शनों की बढ़ती रफ्तार ने कई लोगों को चौंका दिया है, लेकिन शिकायतें पुरानी हैं. वहीं, आलोचकों का कहना है, सरकार की प्रतिक्रिया धीमी और संवेदनहीन रही है. भीड़भाड़ वाली, अपर्याप्त सुविधाओं वाली और कर्मचारियों की कमी वाली शिक्षा प्रणाली को अब छात्र अपने उद्देश्य के लिए पर्याप्त नहीं मानते. कई सालों से ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं जिनमें कक्षाओं में पर्याप्त डेस्क या कुर्सियां नहीं हैं, या अनुपस्थित शिक्षक की जगह किसी और को न भेजे जाने पर छात्रों की कक्षाएं रद्द कर दी जाती हैं.

Total chaos in France, police flee when hundreds of agitated school kids advanced, despite over 5,000 arrests.

These high school kids are simply protesting because France government raised education budget by 1.7% , which is below inflation rate of 3.4% 🪧📚 https://t.co/7KhBVvGWLe

— Trending Explained October 3, 2026

कई मोर्चों पर घिरी सरकार

  • फ्रांस की सबसे बड़ी मुश्किल है कि सरकार कई मोर्चों पर घिरी है. सिर्फ स्टूडेंट्स का प्रदर्शन ही नहीं, देश महंगाई से भी जूझ रहा है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस पर करीब 4 ट्रिलियन डॉलर का सरकारी कर्ज है. सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दर बढ़ने से इस लोन को संभालने का खर्च भी बढ़ रहा है.
  • फ्रांस की आबादी बूढ़ी होने के साथ यहां की पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च में इजाफा हो रहा है. रूस और यूक्रेन की जंग शुरू होने के बाद रक्षा खर्च भी बढ़ाया गया.
  • फ्रांस में प्रदर्शन सिर्फ स्कूलों तक सीमित नहीं है. सरकारी कर्मचारी, फायरफाइटर, स्वास्थ्यकर्मी और मछुआरों की भी अपनी अलगअलग मांगे हैं. इनको लेकर भी प्रदर्शन हो रहे हैं. ये सरकार की चिंता बढ़ा रहे हैं.
  • प्रदर्शनकारी सरकारी खर्च को बंंद करने को कह रहे हैं. वो वेतन रोकने के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं. सरकार उनकी मांगों पर कोई पुख्ता जवाब नहीं दे पा रही है.
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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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