शरद पूर्णिमा के बाद से कार्तिक मास की शुरुआत होती है। कार्तिक जिसे दामोदर का महीना भी कहा जाता है। यह महीना भगवान कृष्ण के प्रति अपना प्यार को और भी ज्यादा गहरा करने का है। भगवान श्री कृष्ण के भक्त इस महीने को बेहद ही पवित्र मानते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस महीने में भगवान श्री कृष्ण की पूजाअर्चना और नाम जप करने से साल के किसी भी दूसरे समय की तुलना में 1000 गुना ज्यादा आशीर्वाद प्राप्त होता है।
कब से शुरु हो रहा है कार्तिक महीना?
इस साल कार्तिक दामोदर महीना 25 अक्तूबर से शुरु होकर 24 नवंबर 2026 तक रहने वाला है। इस अवधि में भगवान श्रीकृष्ण के भक्त कई सारी मनोकामनाएं मांगते हैं, धार्मिक कार्य और दान करते हैं। कार्तिक मास में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा उनके बाल्यकाल दामोदर के रुप में की जाती है, जिन्हें उनकी मां यशोदा ने बचपन की शरारतों की सजा के तौर पर कमर से बांध दिया था।
कार्तिक दामोदर महीने का महत्व
सनातन धर्म में कार्तिक दामोदर महीने का महत्व इसलिए इतना अधिक है, क्योंकि इस महीने में भगवान ने काफी सारी लीलाएं की हैं, जो कुछ इस तरह हैं
शरद पूर्णिमा: खासकर इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राधारानी और गोपियों के साथ रास किया था। शरद पूर्णिमा की रात से ही कार्तिक मास की शुरुआत होती है।
बहुलाष्टमी: इस दिन राधाकुंज के आविर्भाव का स्मरणोत्सव होता है। बहुलाष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी ने श्यामकुंड और राधा कुंड का निर्माण किया था।
रमा एकादशी: कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष में रमा एकादशी का व्रत रखा जाता है। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का एक नाम रमा भी है, इसलिए इस एकादशी को रमा एकादशी के नाम से जाना जाता है। रमा एकादशी के दिन भगवान विष्णु पूर्णावतार केशव स्वरुप की भी पूजाअर्चना की जाती है। इस दिन व्रत रखने से जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती है।
धनतेरस: दिवाली पर्व की शुरुआत धनतेरस होती है। इस दिन भगवान धनवंतरी अमृत और आयुर्वेद से संबंधित औषधि से लेकर प्रकट हुए थे।
नरका चतुर्दशी: इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था।
दामोदर लीला: इसी महीने में दिवाली के दिन मां यशोदा ने भगवान कृष्ण को उखल से बांध दिया था, जिसके बाद उनका नाम दामोदर पड़ा।
दिवाली: कार्तिक मास में भगवान श्रीराम 14 साल के वनवास से अयोध्या वापिस लौटे थे। इस दिन सभी अयोध्यावासियों ने दीये जलाए थे।
गोवर्धन पूजा: दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा की जाती है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बाएं हाथ की कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाया था। इस दिन भगवान को 56 भोग लगाए जाते हैं।
गोपाष्टमी: इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गाय चराना शुरु किया।
देवउठनी एकादशी: कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी पर 4 महीने के बाद भगवान विष्णु योग निद्रा से उठते हैं। इसलिए इसको देवउठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन शादीविवाह के शुभ कार्य होने लगते हैं।
तुलसी विवाह: इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और तुलसी देवी का विवाह कराया जाता है।
वहीं, कार्तिक मास में दीपदान का विशेष महत्व माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने केलिए दीपदान जरुर करें।
इसके अतिरिक्त, कार्तिक दामोदर मास को लेकर स्कंदपुराण में कहा गया है कि,
‘मासानां कार्तिकः श्रेष्ठो देवानां मधुसूदनः।
तीर्थ नारायणाख्यं हि त्रितयं दुर्लभं कलौ।’
मतलब भगवान विष्णु और विष्णु तीर्थ के समान ही कार्तिक का महीना श्रेष्ठ और दुर्लभ है।