वर्ल्ड आईवीएफ डे उन कपल्स के लिए जागरूकता का मौका है जो पेरेंट्स बनने के सपने को पूरा करने के लिए इन विट्रो फर्टिलाइजेशन और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी जैसी मॉडर्न टेक्निक की हेल्प लेते हैं. साल 1978 में पहले आईवीएफ बेबी के जन्म के बाद से यह तकनीक लगातार डेवलप हुई. रिपोर्ट्स के मुताबिक 1978 से 2018 के बीच आईवीएफ और एआरटी की मदद से दुनियाभर में करीब 93 लाख से 1.23 करोड़ बच्चों का जन्म हुआ.

यूरोप, एशिया और उत्तरी अमेरिका में इसका सबसे अधिक इस्तेमाल हुआ, जबकि एशिया में एआरटी तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ा और 2018 तक दुनिया के एआरटी जन्मों में इसकी हिस्सेदारी करीब एकतिहाई तक पहुंच गई. आज आईवीएफ कई कपल्स के लिए उम्मीद की किरण बन चुका है.
हालांकि, इसकी सफलता केवल मेडिकल प्रक्रिया पर निर्भर नहीं करती, बल्कि कपल्स की लाइफस्टाइल, खानपान, मानसिक स्वास्थ्य और कुछ जरूरी हेल्दी आदतें भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं. आईवीएफ शुरू करने से पहले शरीर और मन दोनों को तैयार करना जरूरी होता है. एक्सपर्ट से जानें आईवीएफ से पहले और इसके दौरान खानपान कैसा करना चाहिए. साथ ही लाइफस्टाइल कैसा होना चाहिए.
डाइट और न्यूट्रिशन पर फोकस
डॉ. प्रतिमा पोद्दार का कहना है कि आईवीएफ की तैयारी कर रहे कपल्स को सबसे पहले अपनी डाइट और पोषण पर ध्यान देना चाहिए. शरीर को पर्याप्त पोषक तत्व मिलने से हार्मोन बैलेंस बेहतर रहता है और रिप्रोडक्टिव हेल्थ को सपोर्ट मिलता है. हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज, दालें, बीन्स, अंडे, नट्स और बीजों को खाने से फायदा होता है. फोलिक एसिड, विटामिन डी, आयरन, जिंक और ओमेगा3 जैसे पोषक तत्व महिलाओं और पुरुषों दोनों की फर्टिलिटी के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं.
एक्टिव रहना है बहुत जरूरी
एक्सरसाइज और एक्टिव लाइफस्टाइल भी आईवीएफ की तैयारी का अहम हिस्सा है. एक्सपर्ट कहती हैं कि हल्की एक्सरसाइज जैसे रोजाना वॉक करना, योग, प्राणायाम और स्ट्रेचिंग शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं. अच्छी फिजिकल एक्टिविटी से तनाव कम होता है और शरीर का मेटाबॉलिज्म बेहतर रहता है. वहीं आईवीएफ के दौरान बहुत ज्यादा भारी वर्कआउट या जरूरत से ज्यादा शारीरिक मेहनत से बचना चाहिए. वैसे ज्यादा वजन या बहुत कम वजन दोनों ही हार्मोनल बैलेंस को प्रभावित कर सकते हैं.
मेंटल हेल्थ
आईवीएफ के सफर में मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य का. आईवीएफ का प्रोसेस कई चरणों में पूरा होता है और इसमें कपल्स को चिंता, स्ट्रेस या इमोशनल प्रेशर महसूस हो सकता है. लंबे समय तक तनाव रहने से शरीर में हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं, जो स्वास्थ्य पर असर डाल सकते हैं. ऐसे में मेडिटेशन, पर्याप्त नींद, अपनी भावनाओं को परिवार या पार्टनर के साथ साझा करना और जरूरत पड़ने पर काउंसलर की मदद लेना फायदेमंद हो सकता है.
गलत आदतों को छोड़ें
धूम्रपान, शराब और तंबाकू जैसी आदतें महिलाओं और पुरुषों दोनों की फर्टिलिटी को नुकसान पहुंचा सकती हैं. ये एग और स्पर्म की क्वालिटी को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे प्रेगनेंट के चांस कम हो सकते हैं. इसके अलावा, ज्यादा मात्रा में कैफीन का सेवन भी सीमित करना चाहिए.
एक्सपर्ट कहती हैं कि आईवीएफ केवल एक मेडिकल प्रोसेस नहीं, बल्कि उम्मीद, सब्र और सही देखभाल का रास्ता है. आज की मॉडर्न टेक्निक्स ने आईवीएफ को पहले से ज्यादा सेफ और कारगर बनाया है. लेकिन इसके बेस्ट रिजल्ट्स के लिए कपल्स को अपनी लाइफस्टाइल में पॉजिटिव बदलाव करने चाहिए.