Sambhal Anokhi Shav Yatra: उत्तर प्रदेश के संभल जिले के रजपुरा थाना क्षेत्र स्थित ब्यौरा गांव में बुधवार तड़के एक बेहद अनोखी और भावुक कर देने वाली घटना देखने को मिली। गांव की 74 वर्षीय बुजुर्ग महिला रामबेटी देवी का बुधवार तड़के करीब चार बजे निधन हो गया था। तीन दिन पहले तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अलीगढ़ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों ने नम आंखों से अपनी इस वरिष्ठ मुखिया को विदाई देने की तैयारी शुरू की।

पालतू हाथियों का अनोखा लगाव और जुड़ाव
रामबेटी देवी के परिवार में पिछले दो सौ सालों से भी अधिक समय से हाथियों को पालने की एक ऐतिहासिक परंपरा चली आ रही है। पिता के निधन के बाद से ही रामबेटी देवी खुद अपने परिवार के दोनों पालतू हाथियों की देखभाल बहुत प्यार और अपनापन के साथ कर रही थीं। परमा और मोहन नाम के ये दोनों हाथी परिवार के सदस्यों की तरह ही उनकी गोद में पलेबढ़े थे। परिजनों के अनुसार ये दोनों हाथी रामबेटी देवी के बहुत लाडले थे और उनके बिना एक पल भी नहीं रहते थे।
गाजेबाजे के साथ निकली भव्य शव यात्रा
जब महिला की अंतिम यात्रा घर से निकली, तो उसमें सबसे आगे यही दोनों पालतू हाथी परमा और मोहन चल रहे थे। गाजेबाजे और आकर्षक झांकियों के साथ निकाली गई इस शव यात्रा में एक अलग ही नजारा देखने को मिला। अपनी मालकिन की अर्थी के आगेआगे दोनों हाथियों को चलते देख राहगीर और स्थानीय निवासी पूरी तरह हैरान रह गए। हाथियों के इस अनोखे और अनुशासित व्यवहार ने वहां मौजूद हर व्यक्ति का दिल छू लिया। यह नजारा इंसान और जानवरों के बीच के गहरे रिश्ते का सुंदर प्रतीक बना।
यात्रा में उमड़ी भारी जनमेदिनी का सैलाब
रामबेटी देवी को अंतिम विदाई देने के लिए आसपास के 12 से अधिक गांवों के लगभग डेढ़ हजार से ज्यादा लोग ब्यौरा गांव पहुंचे थे। ब्यौरा गांव से लेकर राजघाट गंगा तट तक लगभग 15 किलोमीटर लंबी यह अंतिम यात्रा निकाली गई। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति और हाथियों के साथ चल रहे जुलूस के कारण सड़क पर काफी लंबा जाम भी लग गया। पुलिस और स्थानीय प्रशासन को यातायात व्यवस्था संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी, फिर भी लोग शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ते रहे।
राजघाट गंगा तट पर सम्मानपूर्वक विदाई
लगभग 15 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद यह अंतिम यात्रा राजघाट गंगा तट पहुंची, जहां पूरे विधिविधान और सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। गंगा नदी के पावन तट पर परिजनों, ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने अश्रुपूरित आंखों से रामबेटी देवी को अपनी अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान परिवार के दोनों पालतू हाथी भी तट के पास शांत खड़े रहे। संभल के ब्यौरा गांव की यह घटना इंसान और बेजुबान जानवरों के निस्वार्थ प्रेम की एक अमर मिसाल के रूप में याद रखी जाएगी।