Saharanpur News: उत्तर प्रदेश में सहारनपुर जिले के देवबंद में करीब 11 साल पुराने महिला से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में फास्ट ट्रैक अदालत ने दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है. पुलिसकर्मियों पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली पीड़िता को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद इंसाफ की पहली बड़ी कामयाबी मिली है. सहारनपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय ने तत्कालीन एसएचओ ब्रजमोहन यादव और तत्कालीन इंस्पेक्टर वेदपाल सिंह को दोषी करार दिया है. अदालत ने सजा सुनाने के लिए कल 6 नवंबर की तारीख निर्धारित की है. फैसला सुनाए जाने के बाद दोनों दोषियों को पुलिस ने अदालत परिसर से ही हिरासत में लेकर जेल भेज दिया.

मामला 6 अगस्त 2015 का है।देवबंद की ही रहने वाली एक पीड़िता अपने पति की गिरफ्तारी के बाद उसके संबंध में जानकारी लेने देवबंद कोतवाली पहुंची थी. वह अपने परिवार की दो महिला सदस्यों के साथ थाने गई थी. आरोप है कि उस समय तैनात दरोगा पंकज धामा ने एसएचओ से मिलवाने की बात कहकर उसे थाने के क्वार्टर में पहुंचा दिया. वहां तत्कालीन एसएचओ ब्रजमोहन यादव, एसआई वेदपाल सिंह, दरोगा पंकज धामा और एक अन्य सिपाही मौजूद थे.
गैंगरेप का लगाया था आरोप
पीड़िता का आरोप था कि चारों पुलिसकर्मियों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया. इस दौरान जब उसके साथ आई महिला ने विरोध करते हुए हस्तक्षेप किया तो उसके साथ भी मारपीट की गई. घटना के बाद पीड़िता ने थाने में शिकायत दी, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने उसकी सुनवाई नहीं की. स्थानीय पुलिस से न्याय नहीं मिलने पर पीड़िता ने तत्कालीन एसएसपी से भी शिकायत की, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली. इसके बाद उसने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मामले में एफआईआर दर्ज हुई और जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई.
पीड़िता के अधिवक्ता राजीव तोमर के मुताबिक, सीबीसीआईडी ने जांच के बाद मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी. इसके बाद पीड़िता की ओर से अदालत में फाइनल रिपोर्ट के खिलाफ प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की गई. साथ ही अलग से शिकायत भी पेश की गई. अदालत ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376डी और 506 के तहत मुकदमे का संज्ञान लिया.
चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ हुई थी शिकायत
अधिवक्ता राजीव तोमर ने बताया कि शुरुआती आरोपों में चार पुलिसकर्मियों के नाम सामने आए थे. इनमें तत्कालीन एसएचओ ब्रजमोहन यादव, एसआई वेदपाल सिंह, दरोगा पंकज धामा और एक अन्य सिपाही शामिल थे. हालांकि बाद में मुकदमे का ट्रायल ब्रजमोहन यादव और वेदपाल सिंह के खिलाफ चला. उनके मुताबिक दरोगा पंकज धामा ने खुद को मानसिक रूप से अस्वस्थ साबित करने के लिए मेडिकल दस्तावेज प्रस्तुत किए थे, जबकि चौथे सिपाही के खिलाफ मुकदमा आगे नहीं बढ़ सका.
मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय में हुई. अभियोजन पक्ष की ओर से पीड़िता उसके साथ मौजूद महिला अन्य गवाहों और चिकित्सक के बयान दर्ज कराए गए. बचाव पक्ष की ओर से भी गवाह पेश किए गए. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने बुधवार को दोनों आरोपियों को दोषी करार दे दिया और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया कल कोर्ट के द्वारा आरोपियों की सजा का ऐलान किया जायेगा.
कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला
अधिवक्ता राजीव तोमर ने बताया कि अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया है. अब 6 नवंबर को सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी. उन्होंने कहा कि आईपीसी की धारा 376डी के तहत कम से कम 20 साल की सजा से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है. इसके साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है. उन्होंने अदालत से पीड़िता को उचित मुआवजा दिलाने और दोषियों पर भारी जुर्माना लगाने की मांग की है.
पीड़िता ने अदालत के फैसले पर संतोष जताया है. उसका कहना है कि करीब 11 साल तक उसने इंसाफ के लिए संघर्ष किया. इस दौरान उसे मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा. पीड़िता ने उम्मीद जताई कि अदालत दोषियों को फांसी की सजा सुनाएगी.