आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी का व्रत किया जा रहा है। यह जुलाई महीने की पहली एकादशी भी है। इस बार योगिनी एकादशी पर 2 घंटे से ज्यादा के समय के लिए भद्रा का साया रहेगा। भद्रा का साया स्वर्ग में होगा। योगिनी एकादशी व्रत करने से जातक के सभी रोग और पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन के अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। जो भी योगिनी एकादशी का व्रत करता है, उसको 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य की प्राप्ति होती है।
तिथि और मुहूर्त

वैदिक पंचांग के मुताबिक इस बार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरूआत 10 जुलाई की सुबह 08:16 मिनट पर हो रही है। वहीं 11 जुलाई की सुबह 05:22 मिनट तक यह मान्य रहेगी। वहीं 11 जुलाई को सुबह 10:32 मिनट पर हरि वासर खत्म हो रहा है। इस कारण से योगिनी एकादशी का व्रत दो दिन रखा जाएगा।
वहीं 10 जुलाई 2026 को गृहस्थ लोग योगिनी एकादशी का व्रत रखेंगे और 11 जुलाई को वैष्णव संप्रदाय के लोग यह व्रत करेंगे। 10 जुलाई को योगिनी एकादशी की पूजा सुबह 08:16 बजे से तक सकते हैं। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 10:42 मिनट तक रहेगा।
पारण समय
10 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत करने वाले लोग 11 जुलाई की दोपहर 01:50 मिनट से लेकर शाम 04:36 मिनट के बीच व्रत का पारण कर सकते हैं। वहीं जो लोग 11 जुलाई को व्रत करेंगे, वह 12 जुलाई की सुबह 05:32 मिनट से लेकर सुबह 08:18 मिनट तक व्रत पारण करेंगे।
योगिनी एकादशी पर भद्रा का साया
बता दें कि 10 जुलाई 2026 की सुबह 05:31 मिनट से भद्रा शुरू होगी, जोकि सुबह 08:16 मिनट तक रहेगी। यह भद्रा 2 घंटे से ज्यादा समय तक है, लेकिन भद्रा का वास स्वर्ग में है। ऐसे में धरती पर भद्रा का अशुभ प्रभाव नहीं होगा। इसलिए आप बिना किसी चिंता के व्रत और पूजा कर सकते हैं।