भुवनेश्वर में 8वें वेतन आयोग की बातचीत चल रही है. इस बीच, संभावित ‘फिटमेंट फैक्टर’ को लेकर केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच बहस जोर पकड़ रही है और यह बहुत महत्वपूर्ण बना हुआ है. फिटमेंट फैक्टर वेतन संशोधन प्रक्रिया का मुख्य हिस्सा है. यह तय करता है कि आने वाले दशक में मौजूदा और रिटायर हो चुके कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और अन्य लाभ कैसे तय किए जाएंगे.

कर्मचारी यूनियन, स्टेकहोल्डर और एसोसिएशन ज्यादा मल्टीप्लायर की मांग कर रहे हैं ताकि सरकारी कर्मचारियों, खासकर जूनियर लेवल के पदों पर काम करने वालों की बेसिक सैलरी में अच्छा सुधार हो सके. इस मामले में विशेषज्ञों का मानना ​​है कि फिटमेंट फैक्टर पर आखिरी सिफारिशें और सुझाव, कर्मचारियों की उम्मीदों और सरकार की वित्तीय स्थिति व जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाकर तय किए जाएंगे.

अभी किस बात पर ध्यान दे रहा है 8वां वेतन आयोग?

8वां वेतन आयोग अभी ओडिशा के भुवनेश्वर में 67 जुलाई को दो दिन की क्षेत्रीय स्टेकहोल्डर बैठक कर रहा है. इसमें आयोग कर्मचारी यूनियंस, पेंशनर्स और अन्य स्टेकहोल्डर्स से वेतन, भत्ते, पेंशन और सेवा की शर्तों पर राय ले रहा है. इसके बाद ये बैठकें 910 जुलाई को कोलकाता में होंगी. आयोग की रिपोर्ट 2027 के मिड तक आनी है, इसलिए उससे पहले आने वाले महीनों में और भी क्षेत्रीय बैठकें होने की उम्मीद है.

फिटमेंट फैक्टर मल्टीप्लायर पर इतना जोर क्यों?

सबसे बड़े सवालों में से एक यह है कि वेतन आयोग सही फिटमेंट फैक्टर कैसे तय करेगा. यह एक मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल बेसिक सैलरी को संशोधित करने के लिए किया जाता है. छठे वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्टर 1.86 था, जबकि सातवें वेतन आयोग ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर अपनाया, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी 7,000 से बढ़कर 18,000 रुपए हो गई. हालांकि, आयोग के गठन के आठ महीने से ज्सादा समय बीत जाने के बाद भी सरकार ने 8वें वेतन आयोग के लिए किसी प्रस्तावित आंकड़े का संकेत नहीं दिया है.

फिटमेंट फैक्टर वेतन के समीकरण का सिर्फ एक हिस्सा क्यों है?

हालांकि फिटमेंट फैक्टर बेसिक सैलरी में संशोधन तय करता है, लेकिन हाथ में आने वाली आखिरी सैलरी कई दूसरे फैक्टर्स पर निर्भर करती है, जिसमें महंगाई भत्ता , HRA, अन्य भत्ते, कटौती, प्रमोशन और सालाना इंक्रीमेंट भी शामिल होते हैं.

फैक्टर्स

8वें वेतन आयोग के तहत यह क्यों जरूरी है?

फिटमेंट फैक्टर

यह बेसिक पे में बढ़ोतरी तय करता है और संशोधित वेतन ढांचे का आधार बनता है.

हाउस रेंट अलाउंस

इसकी कैलकुलेशन संशोधित बेसिक पे के आधार पर की जाती है, इसलिए अंतिम HRA राशि के लिए फिटमेंट फैक्टर बहुत जरूरी है.

ट्रांसपोर्ट अलाउंस

यह मासिक टेकहोम सैलरी में जुड़ता है, लेकिन इसका असर संशोधित वेतन ढांचे पर निर्भर करता है.

एजुकेशन अलाउंस और अदर्स बेनिफिट्स

ये कुल वेतनभत्ते को बढ़ाते हैं और संशोधित होने पर कर्मचारियों के फाइनेंशियल पैकेज में सुधार कर सकते हैं.

पेंशन लाभ

पेंशन में संशोधन का सीधा संबंध बेसिक पे में बदलाव से होता है, इसलिए फिटमेंट फैक्टर रिटायर होने वाले कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण है.

सरकार की वित्तीय स्थिति

अंतिम फिटमेंट फैक्टर तय करते समय एक मुख्य बात यह ध्यान में रखी जाती है कि आयोग को कर्मचारियों के कल्याण और सार्वजनिक वित्त के बीच संतुलन बनाना होता है.

8वें वेतन आयोग के लिए फिटमेंट फैक्टर क्या हो सकता है?

बैंकबाजार के सीईओ, अधिल शेट्टी लाइव मिंट की रिपोर्ट में कहते हैं कि अभी तक फिटमेंट फैक्टर के बारे में कोई पक्की जानकारी नहीं है. अभी अनुमान 2.28 से 2.86 के बीच है, जबकि 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 था. फाइनल आंकड़ा महंगाई, सरकार की वित्तीय स्थिति और कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत पर निर्भर करेगा. हालांकि HRA और ट्रांसपोर्ट अलाउंस जैसे भत्ते कुल वेतन को बढ़ाते हैं, लेकिन वे कम फिटमेंट फ़ैक्टर की पूरी भरपाई नहीं कर सकते क्योंकि वे रिवाइज्ड बेसिक पे से जुड़े होते हैं.

इस लिहाज से, फिटमेंट फ़ैक्टर वेतन संशोधन का आधार बना रहता है और वेतन के कई अन्य हिस्सों की वैल्यू पर असर डालता है. हाउस रेंट अलाउंस , ट्रांसपोर्ट अलाउंस, बच्चों की शिक्षा का भत्ता, पेंशन बेनिफिट्स और सर्विस से जुड़े दूसरे बेनिफिट्स पर आयोग की सिफारिशें कुल सैलरी पैकेज पर काफी असर डाल सकती हैं, भले ही फिटमेंट फैक्टर कर्मचारियों की उम्मीदों से कम हो.

CA मोहित गोयल, प्रोपराइटर, मोहित एस गोयल एंड कंपनी मीडिया रिपोर्ट में कहते हैं कि मेरा मानना ​​है कि 8वें वेतन आयोग के तहत सबसे संभावित फिटमेंट फ़ैक्टर 1.90 से 2.10 के बीच हो सकता है. सरकार की वित्तीय सीमाओं को देखते हुए, 2.3 से ज्यादा फैक्टर की संभावना कम लगती है. हालांकि, फिटमेंट फैक्टर ही एकमात्र पैमाना नहीं होना चाहिए.

अगर इसके साथ HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस, बच्चों की शिक्षा का भत्ता और अन्य सेवा लाभों में सार्थक संशोधन किए जाएं, तो कम फिटमेंट फैक्टर के बावजूद एक अच्छा कुल सैलरी पैकेज मिल सकता है. मकसद कर्मचारियों की खरीदने की क्षमता और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाना होना चाहिए, ताकि सरकार और उसके कर्मचारियों दोनों के लिए उचित और व्यावहारिक नतीजा निकल सके.

विशेषज्ञों का अभी अनुमान है कि 8वें वेतन आयोग के लिए फिटमेंट फ़ैक्टर 1.90 से 2.86 के बीच होगा. अभी चल रही बातचीत और उसके बाद कोलकाता में होने वाली स्टेकहोल्डर मीटिंग्स, फिटमेंट फैक्टर पर आयोग की फाइनल सिफारिशें तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं. 1.1 करोड़ से ज्यादा केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए, फाइनल नतीजा सिर्फ एक मल्टीप्लायर से तय नहीं होगा, बल्कि आयोग की रिपोर्ट से बनने वाले कुल वेतन ढांचे से तय होगा.