Sonia Gandhi Emergency: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 1975 में देश में लगाए गए आपातकाल को गलत फैसला बताया है। अपनी किताब ‘बिलोंगिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ को लेकर चर्चा में आईं सोनिया गांधी ने एक इंटरव्यू में कहा कि इंदिरा गांधी को भी बाद में अपनी गलती का एहसास हुआ था। उन्होंने यह भी बताया कि आपातकाल लगाने के फैसले पर गांधी परिवार में ही मतभेद थे। उनके मुताबिक, राजीव गांधी इस फैसले के खिलाफ थे, जबकि संजय गांधी इसके पक्ष में थे।

राजीव गांधी ने इंदिरा गांधी को दी थी सलाह
सोनिया गांधी ने इंटरव्यू में बताया कि राजीव गांधी नहीं चाहते थे कि देश में आपातकाल लगाया जाए। उन्होंने इंदिरा गांधी से कहा था कि आपातकाल लगाने के बजाय चुनाव होने तक इंतजार करना चाहिए। वहीं, राजीव गांधी के छोटे भाई संजय गांधी आपातकाल लागू करने के पक्ष में थे। सोनिया गांधी के मुताबिक, अगर संजय गांधी पर समय रहते लगाम लगाई गई होती, तो उस दौरान हुए बड़े नुकसान को रोका जा सकता था। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी मूल रूप से लोकतांत्रिक विचारों वाली नेता थीं और आपातकाल के दौरान वह खुद भी सहज नहीं थीं।
इंदिरा गांधी ने ज्यादती के लिए मांगी थी माफी
सोनिया गांधी ने कहा कि आपातकाल के लिए सिर्फ संजय गांधी जिम्मेदार नहीं थे। उस समय कांग्रेस के कई बड़े नेताओं का भी इंदिरा गांधी पर दबाव था। उनके मुताबिक, राजीव गांधी जैसे कुछ ही नेता थे, जिन्होंने इस फैसले से अलग राय रखी थी। सोनिया ने यह भी कहा कि आपातकाल के दौरान जो कुछ हुआ, वह संविधान के दायरे में रहकर किया गया था। हालांकि, इंदिरा गांधी ने उस समय हुई ज्यादतियों के लिए माफी भी मांगी थी।
बाबरी मस्जिद विध्वंस याद कर भावुक हुईं सोनिया
इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस घटना को देखने के बाद वह भावुक हो गई थीं। उन्हें लगा कि महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू ने जिस धर्म निरपेक्ष भारत का सपना देखा था, उसे बचाने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी होगी। सोनिया गांधी ने यह भी माना कि कांग्रेस की कुछ गलतियों के कारण बीजेपी तेजी से उभरी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कई मामलों में जरूरत से ज्यादा निश्चिंत हो गई थी। पार्टी का रवैया भी ढीला पड़ गया था और कई मामलों में लापरवाही हुई।
1975 से 1977 तक देश में लागू रहा था आपातकाल
25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने देश में आपातकाल लगाने की घोषणा की थी। यह 21 मार्च 1977 तक लागू रहा। इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं पर पाबंदियां लगाई गईं, विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया और प्रेस की आजादी भी प्रभावित हुई। अब सोनिया गांधी के ताजा बयान के बाद एक बार फिर देश की राजनीति में इमरजेंसी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।