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क्यों रूठ गए बादल? शुरुआती तेजी के बाद अचानक ‘कोमा’ में क्यों गया मानसून; वैज्ञानिकों ने खोला राज​

Weather Forecast: देश भर में गर्मी से राहत देने के लिए 4 जून, 2026 को समय से पहले दस्तक देने वाला दक्षिणपश्चिम मानसून अचानक एक ऐसे गहरे संकट में फंस गया है, जिसकी कल्पना मौसम वैज्ञानिकों ने भी नहीं की थी. शुरुआती तेजी दिखाने के बाद मानसून की रफ्तार देश भर में इतनी बुरी तरह […]

Weather Forecast: देश भर में गर्मी से राहत देने के लिए 4 जून, 2026 को समय से पहले दस्तक देने वाला दक्षिणपश्चिम मानसून अचानक एक ऐसे गहरे संकट में फंस गया है, जिसकी कल्पना मौसम वैज्ञानिकों ने भी नहीं की थी. शुरुआती तेजी दिखाने के बाद मानसून की रफ्तार देश भर में इतनी बुरी तरह थम गई है कि जून के महीने में बारिश की भारी कमी दर्ज की जा रही है. खेत सूखे हैं और किसान आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं.

भारतीय मौसम विज्ञानियों का कहना है कि मानसून के इस तरह अचानक ‘कोमा’ में चले जाने के पीछे कोई एक विलेन नहीं है. आमतौर पर मानसून की बेरुखी के लिए सिर्फ ‘अलनीनो’ को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है, लेकिन इस बार अंतरिक्ष और समुद्र के भीतर कई खतरनाक मौसम प्रणालियों ने मिलकर एक ऐसा चक्रव्यूह रचा, जिसने भारतीय मानसून की पूरी ऊर्जा को ही सोख लिया.

इन 5 कारणों ने रोका मानसून का रास्ता
मौसम वैज्ञानिकों ने मानसून के इस ब्रेकडाउन के पीछे मुख्य रूप से 5 बड़े खलनायकों की पहचान की है, जिन्होंने आपस में मिलकर भारत आ रहे बादलों का रास्ता रोक दिया है.

1. टाइफून जगमी का असर: जून की शुरुआत में हिंद महासागर में मानसून की एक जबरदस्त लहर उठी थी, जो भारत में भारी बारिश ला सकती थी. लेकिन प्रशांत महासागर में आए उष्णकटिबंधीय चक्रवात, जो बाद में टाइफून जगमी में बदल गया, उसने इस पूरी वायुमंडलीय ऊर्जा और नमी को बंगाल की खाड़ी से खींचकर अपनी तरफ मोड़ लिया.

2. पश्चिमी विक्षोभ का हमला: उत्तर भारत में बारबार आने वाले पश्चिमी विक्षोभ असामान्य रूप से काफी दक्षिण तक आ गए. इन प्रणालियों ने उत्तरपश्चिम से लगातार सूखी और गर्म हवाएं मैदानी इलाकों में भेजीं, जिससे मानसून के बादल बन ही नहीं पाए.

3. समानांतर हवाओं का धोखा: इस बार मानसून ट्रफ के साथ हवाएं मुड़ने और एक जगह जुटने के बजाय बिल्कुल सीधी और पश्चिमसेपूर्व की तरफ समानांतर बहने लगीं. इसके चलते बंगाल की खाड़ी में वह ‘लो प्रेशर एरिया’ बन ही नहीं पाया, जो मानसून को आगे खींचता है.

4. मैडेनजूलियन ऑसिलेशन की बेरुखी: दुनिया भर में चक्कर काटने वाली ट्रॉपिकल बारिश की लहर यानी MJO जून के पहले पखवाड़े में भारत के लिए बेहद प्रतिकूल स्थिति में रहा, जिससे हिंद महासागर के ऊपर बादलों को कोई सपोर्ट नहीं मिला.

5. उभरता हुआ अलनीनो: इसके साथ ही बैकग्राउंड में उभर रहे अलनीनो ने रहीसही कसर पूरी कर दी और आंधीतूफान वाले बादलों के बनने के माहौल को और कमजोर कर दिया.

जून के आखिरी हफ्ते में फिर से ‘दहाड़ेगा’ मानसून
मानसून की इस अभूतपूर्व सुस्ती के बाद अब आखिरकार आम जनता और किसानों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आ रही है. मौसम का अनुमान लगाने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक, मानसून के इस चक्रव्यूह के टूटने के दिन अब करीब आ गए हैं. मौसम विभाग के अनुसार, जून के चौथे हफ्ते में मैडेनजूलियन ऑसिलेशन भारत के लिए अनुकूल स्थिति में आ रहा है. इसके साथ ही ‘लो लेवल जेट’, ‘क्रॉसइक्वेटोरियल फ्लो’ और ऊपरी स्तर की पूर्वी हवाएं तेजी से मजबूत हो रही हैं. उम्मीद जताई जा रही है कि ये बदलाव उत्तरपश्चिम से आ रही सूखी हवाओं के असर को पूरी तरह धो डालेंगे और जून के अंत तक पूरे भारत में मानसून अपनी पूरी ताकत के साथ फिर से सक्रिय हो जाएगा.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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