आत्मनिर्भर भारत की और कदम बढ़ाते हुए मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि स्कीम को मार्च 2030 तक बढ़ाने का फैसला किया है. आपको बता दें सरकार ने इस स्कीम की शुरुआत कोविड महामारी के दौरान रेहड़ी-पटरी और ठेला वाले छोटे कारोबारियों के लिए शुरू किया था, जो सरकार की और से मिली आर्थिक मदद से अपना खुदका रोजगार कर सकें. आइए जानते हैं प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि स्कीम के बारे में विस्तार से
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75.5 लाख से अधिक वेंडर्स को मिला फायदा
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक देशभर में 75.5 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स इस योजना का लाभ उठा चुके हैं. इनके लिए 112 लाख से ज्यादा ऋण स्वीकृत किए गए हैं. योजना के तहत कुल 17,800 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है. इसके अलावा लाभार्थियों को लगभग 800 करोड़ रुपये ब्याज सब्सिडी और डिजिटल लेनदेन प्रोत्साहन के रूप में दिए गए हैं.
बिना गारंटी के मिलता है ऋण
PM स्वनिधि योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को बिना किसी गारंटी के चरणबद्ध तरीके से ऋण दिया जाता है. पहली बार 15,000 रुपये, दूसरी बार 25,000 रुपये और तीसरी बार 50,000 रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है. समय पर ऋण चुकाने वाले लाभार्थियों को 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सब्सिडी भी मिलती है. साथ ही उन्हें भविष्य में अधिक राशि का ऋण लेने की सुविधा भी दी जाती है.
डिजिटल भुगतान को मिला बढ़ावा
योजना के जरिए स्ट्रीट वेंडर्स को डिजिटल लेनदेन अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है. डिजिटल भुगतान करने पर 1,600 रुपये तक का कैशबैक दिया जाता है. अब तक 55 लाख से अधिक वेंडर्स ने 841 करोड़ से ज्यादा डिजिटल लेनदेन किए हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 8.96 लाख करोड़ रुपये रही है. पात्र लाभार्थियों को 30,000 रुपये तक का यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड भी उपलब्ध कराया जा रहा है.
महिलाओं और कमजोर वर्गों पर खास फोकस
योजना के लाभार्थियों में करीब 46 प्रतिशत महिलाएं हैं, जबकि लगभग 70 प्रतिशत लोग वंचित और कमजोर वर्गों से आते हैं. सरकार की “स्वनिधि से समृद्धि” पहल के तहत 50 लाख से अधिक परिवारों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा गया है. स्वतंत्र अध्ययनों के अनुसार, योजना से लाभार्थियों की आय में औसतन 20 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है. इसके साथ ही करीब 95 प्रतिशत लाभार्थियों ने पहली बार किसी औपचारिक बैंकिंग संस्था से ऋण प्राप्त किया, जिससे वित्तीय समावेशन को भी नई मजबूती मिली है.












