फिल्ममेकर्स अक्सर स्पोर्ट्स ड्रामा पर फिल्में बनाते रहते हैं। अब बुची बाबू सना भी इसी जॉनर पर एक मूवी लेकर आए हैं, जिसका नाम ‘पेद्दी’ है। इस मूवी में राम चरण, जान्हवी कपूर, बोमन ईरानी, दिव्येंदु, शिव राजकुमार और जगपति बाबू समेत कई सितारे नजर आए हैं। ‘पेद्दी’ की खास बात ये है कि इसमें किसी एक स्पोर्ट्स को नहीं, बल्कि क्रिकेट, दौड़ और पहलवानी तीन स्पोर्ट्स को एक साथ दिखाया गया है। अब यह फिल्म 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। ऐसे में चलिए आपको इसका रिव्यू बताते हैं कि आखिर कैसी है बुची बाबू और राम चरण की यह मूवी।

क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी शुरू होती है विजयनगरम जिले की पहाड़ियों के नीचे बसे एक गांव से, जिसका कोई आधिकारिक नाम नहीं है। नाम तो छोड़िए वहां रहने वाले लोगों के पास बुनियादी सुविधाएं तक नहीं है। न उन्हें मतदान का अधिकार है और न भी वहां कोई रेलवे स्टेशन है। इसी गांव में ‘पेद्दी’ (राम चरण) नाम का एक शख्स रहता है, जो एक खिलाड़ी है। वह उस गांव की एक गुड़ फैक्ट्री में काम करता है और पैसे लेकर स्थानीय क्रिकेट मैच खेलता है।
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एक दिन गांव के बुजुर्ग अपने गांव के लिए रेलवे स्टेशन की मांग करते हैं, लेकिन उनकी आवाज कोई नहीं सुनता। फिर कुछ ऐसा होता है, जिसके बाद ‘पेद्दी’ अपने लोगों का हक दिलाने के लिए हर हद तक जाने को तैयार हो जाता है। इसके बाद क्रिकेट से शुरू हुआ उसका सफर कुश्ती और एथलेटिक्स तक पहुंचता है। पेद्दी कैसे अपने गांव को पहचान दिलाता है और इसके लिए उसे कितनी लड़ाइयां लड़नी पड़ती है। यही फिल्म की कहानी है।
कैसा है सितारों का अभिनय?
अब बात आती है कि सितारों का अभिनय कैसा है। सबसे पहले बात करें राम चरण की, तो उन्होंने इस फिल्म को अपने उस दमदार अभिनय से संभाला है, जिसकी तुलना उनके अब तक के सबसे बेहतरीन काम से की जा सकती है। उन्होंने ‘पेद्दी’ के किरदार को पूरी शिद्दत के साथ पर्दे पर जिया है। उनका ट्रांसफॉर्मेशन, भाषा पर पकड़ और इमोशनल सीन्स काफी जबरदस्त है। फिल्म में शिव राजकुमार ‘पेद्दी’ के गुरु ‘गौरनायडू’ का किरदार निभा रहे हैं।
शिव राजकुमार सीमित लेकिन प्रभावी भूमिका में दिखाई देते हैं। उनके और राम चरण के बीच गुरु शिष्य वाला रिश्ता फिल्म की बड़ी ताकत बनकर उभरता है। ‘पेद्दी’ में जाह्नवी कपूर ने ‘अचियम्मा’ का किरदार निभाया है। शुरुआत में वह एक मजबूत, समझदार और आत्मविश्वासी महिला के रूप में दिखाई देती हैं, लेकिन बाद में उनका किरदार सिर्फ नायक का समर्थन करने और नाचने-गाने तक सीमित रह जाता है। वहीं, दिव्येंदु ‘रामबुज्जी’ के किरदार में नजर आए और उनका स्क्रीन टाइम भी कम था।
कैसा है ‘पेद्दी’ डायरेक्शन
‘पेद्दी’ की तुलना ‘दंगल’, ‘सुल्तान’ और ‘लगान’ जैसी फिल्मों से होना लाजिमी है, लेकिन बुच्ची बाबू सना ने इसे अपने अलग अंदाज में पर्दे पर दिखा कर जीवंत कर दिया है। स्क्रीनप्ले बहुत ही सधे हुए अंदाज में दर्शकों के भीतर एक इमोशनल कनेक्शन बनाता जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि हर एक बड़ा मोमेंट अपना असली असर छोड़े।
कहां रह गई कमी
‘पेद्दी’ का फर्स्ट हाफ काफी स्लो है और इसके कुछ सीन बिना मतलब लगते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं कई जगह देखकर लगा कि इसका समय तीन घंटे से ज्यादा का है, जो कम किया जा सकता था। यहां तक कि बोमन ईरानी ने इसमें ओलंपिक समिति के अधिकारी का किरदार निभाया है, जिसे यह समझने में बहुत समय लग जाता है कि ‘पेद्दी’ के गांव के लोगों ने किन-किन मुश्किलों का सामना किया है।
हालांकि, सेकंड हाफ में कहानी जोर पकड़ लेती है। लास्ट का आधा-पौना घंटा दर्शकों को इमोशनल कर देता है। तकनीकी पक्ष मजबूत है और सिनेमैटोग्राफी पर भी अच्छी पकड़ रखी गई। खेल के मैदान, कई इमोशनल और अन्य सीन को अच्छे से कैमरा में दिखाया गया।
कैसा है फिल्म का म्यूजिक
कई बार फिल्में नहीं चलती, लेकिन उसके गाने हिट हो जाते हैं। ‘पेद्दी’ के म्यूजिक की बात करें, तो यह पहले ही चार्टबस्टर में अपनी जगह बनाए हुए हैं। इसके गानों में ए आर रहमान का संगीत है, जो लोगों को काफी पसंद आ रहा है। ऐसे में हम इस मूवी को 5 में से 3.5 स्टार देंगे।
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