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कंगाली की कगार पर केरल! ₹5.07 लाख करोड़ का कर्ज, नई सरकार के श्वेत पत्र से मचा हड़कंप

कंगाली की कगार पर केरल! ₹5.07 लाख करोड़ का कर्ज, नई सरकार के श्वेत पत्र से मचा हड़कंप

तिरुवनंतपुरम : केरल की नई कांग्रेस नीत यूडीएफ सरकार ने गुरुवार को विधानसभा में राज्य की वित्तीय स्थिति पर एक श्वेत पत्र पेश कर बीते वामपंथी दल (LDF) के कार्यकाल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने ‘केरल की वित्तीय सेहत: एक स्थिति रिपोर्ट’ शीर्षक वाला यह दस्तावेज पेश करते हुए बताया कि राज्य की बकाया देनदारियां 5.07 लाख करोड़ रुपये के खतरनाक आंकड़े पर पहुंच गई हैं ।

कंगाली की कगार पर केरल! ₹5.07 लाख करोड़ का कर्ज, नई सरकार के श्वेत पत्र से मचा हड़कंप
कंगाली की कगार पर केरल! ₹5.07 लाख करोड़ का कर्ज, नई सरकार के श्वेत पत्र से मचा हड़कंप

श्वेत पत्र के मुताबिक, केरल अभी गंभीर वित्तीय तनाव से जूझ रहा है। सरकार की प्रति व्यक्ति आय (प्रति व्यक्ति आय) चिंताजनक रूप से कम है और यहां तक कि कर्ज के बोझ ने निवेश की क्षमता को भी लगभग खत्म कर दिया है ।

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‘एक रुपया भी बचता नहीं’

रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की कुल राजस्व प्राप्ति (TRR) का 77% हिस्सा सिर्फ प्रतिबद्ध खर्चों (कर्मचारियों का वेतन और पेंशन) में ही चला जाता है, जो देश के अन्य राज्यों के औसत 46.1% से कहीं अधिक है । स्थिति यह है कि TRR का 20.9% हिस्सा सिर्फ पुराने कर्जों पर ब्याज चुकाने में निकल जाता है। इसका मतलब है कि स्कूलों, सड़कों और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करने के लिए हर चार रुपये में से सिर्फ एक रुपया बचता है ।

‘बिना निवेश के उधारी’

श्वेत पत्र ने चेतावनी दी है कि केरल में ‘विकास के लिए उधार लो और फिर चुकाओ’ (Borrow to invest, growth will repay) का मूल सिद्धांत विफल हो रहा है। राज्य का पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का मात्र 1.3% रह गया है, जो भारतीय राज्यों में सबसे कम है । इसके विपरीत, राज्य का राजकोषीय घाटा सबसे अधिक में से एक बना हुआ है, जो दर्शाता है कि उधार लिया गया पैसा संपत्ति बनाने की बजाय रखरखाव में खर्च हो रहा है।

केआईआईएफबी पर निशाना

सरकार ने अपने श्वेत पत्र में पिछली LDF सरकार के दौरान बनाई गई केरल इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (KIIFB) जैसी ‘समानांतर संरचनाओं’ को इस संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन निकायों ने राजस्व को तो डुबोया ही है, साथ ही विशाल देनदारियां भी खड़ी कर दी हैं ।

राजनीतिक घमासान

जैसे ही यह रिपोर्ट सदन में पेश की गई, वाम दलों की ओर से हंगामा शुरू हो गया। पिछली LDF सरकार में वित्त मंत्री रहे के.एन. बालगोपाल ने इस श्वेत पत्र को ‘राजनीति से प्रेरित’ बताते हुए असहमति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज वित्त विभाग की बजाय एक बाहरी समिति से बनवाया गया, जो गलत है । उनसे पहले नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन ने दावा किया था कि उनकी सरकार छोड़ते समय खजाने में 5,429 करोड़ रुपये की नकदी थी ।

हालांकि, मुख्यमंत्री सतीशन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह श्वेत पत्र राज्य के सामने मौजूदा चुनौतियों की ‘वास्तविक तस्वीर’ है। उल्लेखनीय है कि सत्ता में आने के तुरंत बाद, सतीशन सरकार ने 19 मई को पूर्व कैबिनेट सचिव के.एम. चंद्रशेखर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था, जिसने यह रिपोर्ट तैयार की

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