Saturday, April 25, 2026
Viral

OMG! फूलों से फैलाती है खूबसूरती और पत्तों में छिपा है ‘जहर’, पौधे के रूप में धरती पर मौजूद है प्रकृति का ‘श्राप’

भारत में कई ऐसे पौधे हैं जो देखने में बेहद सुंदर लगते हैं, लेकिन उनके प्रभाव उतने ही खतरनाक हो सकते हैं. ऐसा ही एक पौधा है लैंटाना, जिसे अक्सर भारत का श्राप कहा जाता है. इसकी रंग-बिरंगी छोटी-छोटी फूलों की गुच्छेदार बनावट लोगों को आकर्षित करती है, लेकिन इसके पीछे छिपे नुकसान काफी गंभीर हैं. लैंटाना एक आक्रामक प्रजाति (इनवेसिव स्पीशीज़) का पौधा है, जो बहुत तेजी से फैलने की क्षमता रखता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रह सकता है. चाहे सूखा इलाका हो या खारा पानी, यह आसानी से वहां उग जाता है.

OMG! फूलों से फैलाती है खूबसूरती और पत्तों में छिपा है ‘जहर’, पौधे के रूप में धरती पर मौजूद है प्रकृति का ‘श्राप’
OMG! फूलों से फैलाती है खूबसूरती और पत्तों में छिपा है ‘जहर’, पौधे के रूप में धरती पर मौजूद है प्रकृति का ‘श्राप’

यही कारण है कि एक बार जहां यह फैलना शुरू करता है, वहां से इसे पूरी तरह हटाना बेहद मुश्किल हो जाता है. धीरे-धीरे यह आसपास के इलाके पर कब्जा जमा लेता है और अन्य पौधों को बढ़ने का मौका ही नहीं देता. इस पौधे का एक खतरनाक पहलू इसकी जहरीली प्रकृति भी है. इसके पत्ते अगर मवेशी या अन्य जानवर खा लें, तो उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, लैंटाना के सेवन से जानवरों के लिवर को नुकसान पहुंचता है और कई मामलों में उनके अंग काम करना बंद कर सकते हैं. इसके अलावा, ये स्किन को सूरज की रोशनी के प्रति अधिक संवेदनशील बना देता है, जिससे स्किन संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं.

खूबसूरती से फैलाता है भ्रम

हालांकि, लैंटाना के बारे में एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि इसके कुछ हिस्सों का उपयोग Traditional Medicine में किया जाता है. कुछ स्थानों पर इसके पूरी तरह पके हुए फल खाने योग्य माने जाते हैं. लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि इसके कच्चे फल जहरीले होते हैं और उनका सेवन नुकसानदायक हो सकता है. यही वजह है कि इस पौधे को लेकर लोगों के बीच भ्रम बना रहता है कि यह पूरी तरह हानिकारक है या आंशिक रूप से उपयोगी.

लैंटाना का प्रभाव केवल जानवरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी एक बड़ा खतरा बन चुका है. यह पौधा अपने आसपास की मिट्टी में ऐसे रसायन छोड़ता है जो अन्य पौधों की वृद्धि को रोकते हैं. इस प्रक्रिया को एलीलोपैथी कहा जाता है. इसका मतलब यह है कि यह अपने आसपास की जमीन को इस तरह प्रभावित करता है कि वहां अन्य पौधों का उगना मुश्किल हो जाता है. इसके कारण स्थानीय वनस्पतियां धीरे-धीरे खत्म होने लगती हैं और जैव विविधता पर भी असर पड़ता है.

कैसे असर करता है ये?

भारत के कई जंगलों में लैंटाना तेजी से फैल चुका है. रिपोर्ट्स के अनुसार, यह देश के लगभग 40 प्रतिशत टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है. इसकी घनी झाड़ियां जमीन पर इस तरह फैल जाती हैं कि घास और अन्य छोटे पौधों को सूर्य की रोशनी नहीं मिल पाती. इसका सीधा असर शाकाहारी जानवरों पर पड़ता है, जैसे हिरण, जिन्हें भोजन के लिए घास की जरूरत होती है. जब उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं मिलता, तो उन्हें अपने प्राकृतिक आवास को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है.

इसका असर पूरे Ecosystem पर देखने को मिलता है. जब शाकाहारी जानवर कम होते हैं या क्षेत्र छोड़ देते हैं, तो उनके ऊपर निर्भर रहने वाले मांसाहारी जीवों की संख्या भी प्रभावित होती है. इस तरह एक पौधा पूरे फूड साइकिल को प्रभावित कर सकता है. लैंटाना से जुड़ा एक और बड़ा खतरा जंगल की आग से भी है. इस पौधे में मौजूद तेल जल्दी आग पकड़ लेते हैं. इसे लैडर फ्यूल के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि यह जमीन पर लगी आग को ऊपर पेड़ों तक पहुंचाने में मदद करता है. इससे आग तेजी से फैलती है और अधिक विनाशकारी बन जाती है. जंगलों में आग लगने की घटनाओं में इसकी भूमिका कई बार देखी जा चुकी है. कुल मिलाकर, लैंटाना एक ऐसा पौधा है जो अपनी खूबसूरती के कारण आकर्षित जरूर करता है, लेकिन इसके प्रभाव काफी हानिकारक हैं. यह न केवल जानवरों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि जंगलों की प्राकृतिक संतुलन को भी बिगाड़ देता है.

khabarmonkey@gmail.com

Leave a Reply