Thursday, April 16, 2026
Health

Non alcoholic fatty liver: नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर क्या है? किन लोगों को इस बीमारी का खतरा

दुनियाभर में लिवर से जुड़ी बीमारी तेजी से बढ़ रही है. आलम ये है कि साल 2050 तक दुनियाभर में 1.8 अरब लोगों को फैटी लिवर की बीमारी होने रिस्क है. ये दावा मेडिकल जर्नल लैंसेट की स्टडी में किया गया है. स्टडी में इस बीमारी को MASLD (Metabolic Dysfunction Associated Steatotic Liver Disease) नाम दिया गया है. इसे फैटी लिवर (NAFLD) के नाम से जाना जाता था. NAFLD मतलब नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर यानी शराब न पीने के बाद भी लिवर का फैटी होना.

Non alcoholic fatty liver: नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर क्या है? किन लोगों को इस बीमारी का खतरा
Non alcoholic fatty liver: नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर क्या है? किन लोगों को इस बीमारी का खतरा

फैटी लिवर की शुरुआत ग्रेड 1 से होकर लिवर सिरोसिस तक जाती है. सिरोसिस में लिवर ख़राब हो जाता है और कुछ मामलों में liver ट्रांसप्लांट तक की ज़रूरत पड़ती है. पहले ये बीमारी शराब पीने वालों को jyada होती थी, लेकिन अब जो लोग शराब नहीं पीते उनको भी हो रही है

NAFLD क्यों हो रहा है?

इस बीमारी के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण ख़राब लाइफस्टाइल है. लोग कम एक्सरसाइज कर रहे हैं इससे मोटापा बढ़ रहा है. दूसरा सबसे बड़ा कारण हाई बीपी है. ख़राब खानपान और मानसिक तनाव से बीपी बढ़ रहा है जो लिवर पर भी असर कर रहा है. कई मामलों में तो लक्षण भी काफ़ी देरी से पहचान में आ रहे हैं. इस वजह से लोगों को बाद में ज़्यादा परेशानी हो रही है.

शराब न पीने वालों में फैटी लिवर आम

शराब न पीने वाले लोगों को अब फैटी लिवर हो रहा है और ये मामले शराब पीने वालों में जो फैटी लिवर होता है उसी तरह से हो रहा है.यानी अब ख़राब ख़ान पान और बिगड़ा हुआ लाइफस्टाइल लिवर पर शराब जैसा ही असर डाल रहे हैं. ख़ासतौर पर ज़्यादा फ़ास्ट फ़ूड लिवर पर असर कर रहा है. जो लोग ग़लत खानपान कर रहे हैं और एक्सरसाइज भी नहीं कर थे हैं वो लोग फैटी लिवर का सबसे ज़्यादा शिकार हो रहे हैं. बीते कुछ सालों में लोगों में फ़ास्ट फ़ूड खाने का चलन बढ़ा है. इस वजह से मोटापा बढ़ा है जो फैटी लिवर ka कारण बन रहा है. अगर ये बीमारी इसी तरफ़ बढ़ती रही तो साल 2050 तक पूरी दुनिया में 1.8 अरब लोग इसका शिकार हो सकते हैं.

किसे ज्यादा खतरा?

बुजुर्गों में ज्यादा खतरा है लेकिन सबसे ज्यादा केस युवाओं (35-39 साल पुरुष में हैं. महिलाओं की बात करें तो उनमें 55 से अधिक साल वाली महिलाओं में केस हैं, लेकिन सबसे ज़्यादा मामले युवा वर्ग में हैं और ख़तरा सबसे ज़्यादा बुजुर्गों को है. स्टडी में बताया gaya है कि समय पर लक्षण पहचानकर बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है.

लक्षण क्या होते हैं?

हमेशा थकान रहना

पेट के दाईं तरफ हल्का दर्द

अपच

भूख कम लगना

बचाव कैसे करें

खानपान का ध्यान रखें

तो एक्सरसाइज करें

फैटी फूड्स से बचें

बीपी कंट्रोल में रखें

अगर लक्षण दिख रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह लें.

khabarmonkey@gmail.com

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