: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट के बाद निधन हो गया। नाना पाटेकर अपनी दमदार अदाकारी के लिए जाने जाते थे, लेकिन उनकी जिंदगी का एक ऐसा दौर भी रहा जब वह चेन स्मोकर हुआ करते थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि 56 साल की उम्र तक वह रोजाना करीब 60 सिगरेट पीते थे। इसके बाद उन्होंने अचानक स्मोकिंग छोड़ने का फैसला किया था।

56 साल की उम्र तक रोज पीते थे 60 सिगरेट
नाना पाटेकर ने एक इंटरव्यू में अपनी स्मोकिंग की आदत के बारे में खुलकर बात की थी। उन्होंने बताया था कि 56 साल की उम्र तक वह हर दिन करीब 60 सिगरेट पी जाते थे। लंबे समय तक इतनी ज्यादा मात्रा में सिगरेट पीने के बावजूद एक दिन उन्होंने इस आदत को पूरी तरह छोड़ने का फैसला कर लिया।
नाना ने बताया था कि उन्होंने 200708 के दौरान अचानक स्मोकिंग छोड़ दी थी। उन्होंने इसके लिए किसी दवा या लंबे इलाज का सहारा लेने की बात नहीं कही थी, बल्कि एक भावुक कर देने वाली घटना ने उन्हें यह फैसला लेने के लिए प्रेरित किया।
एक महिला की बात ने बदल दी जिंदगी
नाना पाटेकर ने एक दूसरे इंटरव्यू में स्मोकिंग छोड़ने की वजह बताई थी। उन्होंने बताया था कि उनके एक दोस्त की पत्नी, जिन्हें वह अपनी बहन की तरह मानते थे, ने अपने इकलौते बेटे को खो दिया था।
उस दौरान नाना को खांसी हो रही थी। उन्हें खांसते देखकर उस महिला ने उनसे ऐसी बात कही, जिसने नाना को अंदर तक प्रभावित किया। उन्होंने महसूस किया कि जिंदगी कितनी अनिश्चित है और अपने स्वास्थ्य को लेकर गंभीर होना जरूरी है। इसके बाद नाना ने स्मोकिंग छोड़ने का फैसला किया और फिर दोबारा सिगरेट नहीं पी।
नाना की कहानी में छिपा बड़ा सबक
नाना पाटेकर की स्मोकिंग छोड़ने की कहानी सिर्फ एक अभिनेता की निजी जिंदगी का किस्सा नहीं है, बल्कि यह बताती है कि किसी भी उम्र में खराब आदत को छोड़ा जा सकता है। 56 साल की उम्र तक रोज करीब 60 सिगरेट पीने वाले नाना ने एक भावुक घटना के बाद अचानक इस आदत से दूरी बना ली थी।
उनकी कहानी यह भी बताती है कि स्वास्थ्य को लेकर लिया गया एक फैसला जिंदगी की दिशा बदल सकता है। हालांकि किसी व्यक्ति की मौत का सीधा कारण केवल उसकी पुरानी स्मोकिंग की आदत को मानना उचित नहीं होगा। नाना पाटेकर की मौत की परिस्थितियों के बारे में उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ था।
स्मोकिंग दिल के लिए क्यों है खतरनाक?
स्मोकिंग और हृदय स्वास्थ्य के बीच सीधा संबंध माना जाता है। सिगरेट के धुएं में मौजूद हानिकारक रसायन शरीर की रक्त वाहिकाओं और दिल पर असर डाल सकते हैं। लंबे समय तक स्मोकिंग करने से धमनियों में प्लाक जमा होने की समस्या यानी एथेरोस्क्लेरोसिस का खतरा बढ़ सकता है।
इससे शरीर में ब्लड फ्लो प्रभावित हो सकता है और दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। खास बात यह है कि स्मोकिंग से नुकसान सिर्फ उन लोगों को नहीं होता जो रोजाना ज्यादा सिगरेट पीते हैं। कम या कभीकभार स्मोकिंग करने वालों के लिए भी इसका जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता।
हार्ट अटैक और स्ट्रोक का बढ़ सकता है खतरा
स्मोकिंग से पेरिफेरल आर्टरी डिजीज का खतरा भी बढ़ सकता है। इस स्थिति में धमनियों में प्लाक जमा होने के कारण शरीर के अलगअलग हिस्सों तक रक्त पहुंचाने वाली नसें संकरी या ब्लॉक हो सकती हैं।
स्मोकिंग की आदत को हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से भी जोड़ा जाता है। वहीं हाई ब्लड प्रेशर , हाई कोलेस्ट्रॉल और मोटापा जैसी स्थितियों में हृदय संबंधी जोखिम और बढ़ सकता है।