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Michael Biopic: माइकल जैक्सन की बायोपिक को ले न डूबे ये 5 बड़ी गलतियां

5 Reasons Why Michael Failed to Impress: माइकल जैक्सन यानी पॉप संगीत की दुनिया में एक ऐसा नाम जिसने सरहदों को मिटा दिया, जिसने डांस के मायने बदल दिए और जो विवादों से लेकर शोहरत के शिखर तक, हर जगह छाया रहा. पिछले कुछ सालों में हमने ‘बोहेमियन रैप्सोडी’ और ‘रॉकेटमैन’ जैसी शानदार बायोपिक्स देखीं, लेकिन जब बात माइकल जैक्सन की आती है, तो लेवल थोड़ा और ऊपर होना चाहिए था. एंटोनी फूक्वा के निर्देशन में बनी फिल्म ‘माइकल’ रिलीज तो हो गई है, लेकिन यह फिल्म उस लेजेंड के कद के सामने काफी छोटी नजर आती है. आइए नजर डालते हैं फिल्म की 5 बड़ी कमियों पर.

Michael Biopic: माइकल जैक्सन की बायोपिक को ले न डूबे ये 5 बड़ी गलतियां
Michael Biopic: माइकल जैक्सन की बायोपिक को ले न डूबे ये 5 बड़ी गलतियां

1. सिर्फ ‘ऊपर-ऊपर’ की कहानी: किसी भी बायोपिक का मकसद होता है कि वो उस इंसान के उन पहलुओं को दिखाए, जिनसे दुनिया अनजान है. लेकिन ‘माइकल’ बहुत ही सतही लगती है. फिल्म को देखकर ऐसा लगता है जैसे आप कोई फिल्म नहीं बल्कि माइकल जैक्सन के जीवन का एक ‘कोलाज’ देख रहे हैं. निर्देशक ने कहानी की गहराई में उतरने के बजाय सिर्फ मशहूर घटनाओं को छूने की कोशिश की है, जो फैंस को निराश करती है.

2. खराब एडिटिंग और भागती हुई स्क्रिप्ट

फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी एडिटिंग है. सीन्स इतनी जल्दी-जल्दी बदलते हैं कि दर्शक को किसी भी इमोशन के साथ जुड़ने का वक्त ही नहीं मिलता. माइकल जैक्सन के खुद के म्यूजिक वीडियो ‘एपिक’ और लंबे होते थे जो कहानी कहते थे, लेकिन विडंबना देखिए कि उनकी बायोपिक किसी जल्दबाजी में बनी म्यूजिक रील की तरह लगती है. न किरदार पनप पाते हैं, न ही कहानी ठहर पाती है.

3. वही घिसा-पिटा पिता-पुत्र का विवाद

फिल्म ने माइकल और उनके पिता जोसेफ जैक्सन के रिश्तों को केंद्र में रखा है. पिता का सख्त होना और बच्चों पर अत्याचार करना, ये एंगल हम फिल्मों में हजारों बार देख चुके हैं. हकीकत होने के बावजूद, फिल्म में इसे इतने नीरस तरीके से दिखाया गया है कि ये आपको बांधने में नाकाम रहता है. फिल्म देखते हुए ऐसे लगता है कि बार-बार कुछ पुराने सीन दोहराए जा रहे हैं.

4. बाकी किरदारों का ‘फर्नीचर’ बन जाना

माइकल जैक्सन की जिंदगी में उनके भाइयों, निया लॉन्ग और माइल्स टेलर जैसे किरदारों का बड़ा महत्व था. लेकिन फिल्म में ये सब सिर्फ बैकग्राउंड डेकोरेशन की तरह इस्तेमाल हुए हैं. जैक्सन ब्रदर्स, जिनके साथ माइकल ने सालों काम किया, उन्हें फिल्म में लगभग गायब ही कर दिया गया है. इतने बड़े कलाकारों का होना भी फिल्म के लिए फायदेमंद साबित नहीं हो रहा है क्योंकि उनके पास करने के लिए कुछ खास था ही नहीं.

5. विजन की कमी: फिल्म या टीवी मूवी?

एंटोनी फूक्वा एक बेहतरीन डायरेक्टर हैं, लेकिन यहां उनका विजन ही धुंधला नजर आता है. फिल्म को देखकर ऐसा अहसास ही नहीं होता कि आप सिनेमा हॉल में कोई ‘लार्जर दैन लाइफ’ चीज देख रहे हैं. सिनेमाटोग्राफी और सेट डिजाइन इतने साधारण हैं कि ये किसी हाई-बजट टीवी फिल्म जैसा फील देते हैं. ‘किंग ऑफ पॉप’ जैसा विजनरी कलाकार, जो हमेशा कुछ नया और बेस्ट करना चाहता था, उसकी बायोपिक ‘मिनिमम’ मेहनत पर टिकी हुई लगती है.

हां, माइकल के भतीजे जाफर जैक्सन ने इस रोल के लिए अपनी पूरी जान लगा दी है. उनके लुक्स और उनके डांस मूव्स कई जगह आपको असली माइकल की याद दिलाएंगे. साथ ही, फिल्म का म्यूजिक इसका सबसे मजबूत पक्ष है. ‘थ्रिलर’ से लेकर ‘बैड’ एरा के गानों का सफर आपको झूमने पर मजबूर कर देता है. लेकिन ईमानदारी से कहें तो, ये गाने जैक्सन की अपनी लेगेसी हैं, इसमें फिल्म के मेकर्स का कोई कमाल नहीं है.

कुल मिलाकर ‘माइकल’ एक औसत फिल्म है जो सिर्फ एक ट्रिब्यूट बनकर रह गई है. ये उस कलाकार के साथ इंसाफ नहीं करती, जिसने संगीत की दुनिया को बदल दिया. अगर आप माइकल जैक्सन के कट्टर फैन हैं, तो शायद गानों के लिए इसे देख लें, वरना एक सिनेमाई अनुभव के तौर पर ये फिल्म आपको खाली हाथ ही वापस भेजेगी.

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