कल जब जियो प्लेटफॉर्म्स दलाल स्ट्रीट पर लिस्ट होगा, तो यह भारत की टॉप दो लिस्टेड कंपनियों में शामिल हो सकता है. ग्रे मार्केट में 22% के प्रीमियम को देखते हुए, इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 12.5 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है. इस तरह, यह टेलीकॉम और डिजिटल सर्विस कंपनी भारती एयरटेल से आगे निकल जाएगी, जो अभी 12.25 लाख करोड़ रुपए की मार्केट वैल्यू के साथ भारत की दूसरी सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनी है. जियो केवल अपनी पैरेंट कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज से पीछे रहेगी, जिसका मार्केट कैपिटलाइजेशन 16.12 लाख करोड़ रुपए है.

अपने IPO प्राइस बैंड के अपर लेवल पर, जियो प्लेटफॉर्म्स की वैल्यू लगभग 10.3 लाख करोड़ रुपए है. लिस्टिंग के समय अगर इसमें करीब 15 फीसदी की बढ़त होती है, तो यह दूसरे नंबर पर आ जाएगी. वहीं, ग्रे मार्केट के 22 फीसदी के प्रीमियम के हिसाब से इसकी वैल्यू लगभग 12.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है. हालांकि, ग्रे मार्केट के आंकड़े सिर्फ एक संकेत होते हैं और ये असल लिस्टिंग प्राइस से अलग हो सकते हैं. असल लिस्टिंग प्राइस का पता कल सुबह 10 बजे चलेगा.
HDFC बैंक और ICICI बैंक अभी भारती एयरटेल के बाद आते हैं. भारत की अन्य बड़ी लिस्टेड कंपनियों में TCS, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो और लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया शामिल हैं. अगर ऐसा होता है, तो यह भारत में किसी नई लिस्टेड कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से अब तक का सबसे शानदार डेब्यू होगा.
IPO ने कई रिकॉर्ड तोड़े
- जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO भारत के कैपिटल मार्केट के इतिहास में सबसे बड़ा था, जिसका इश्यू साइज लगभग 30,200 करोड़ रुपए था.
- एंकर और पब्लिक बुकबिल्डिंग प्रक्रिया के ज़रिए इसके लिए कुल 7 लाख करोड़ रुपए से ज़्यादा की डिमांड आई.
- यह IPO खुलने के 100 मिनट के भीतर ही पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया. इसका 5,500 करोड़ रुपए का ‘क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर’ हिस्सा तो पहले 10 मिनट में ही सब्सक्राइब हो गया.
- तीसरे दिन के अंत तक, यह IPO 22.2 गुना सब्सक्राइब हो चुका था, जबकि QIB हिस्सा 70.55 गुना सब्सक्राइब हुआ. कुल 27 करोड़ शेयरों के मुकाबले, इसके लिए 655.68 करोड़ शेयरों की डिमांड आई.
- इस इश्यू के लिए लगभग 1.4 करोड़ आवेदन आए, जिनमें रिटेल और पहली बार निवेश करने वाले निवेशक भी शामिल थे.
- जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO को 1.38 करोड़ से ज़्यादा आवेदन मिले, जो दुनिया के किसी भी अन्य IPO के मुकाबले सबसे ज्यादा हैं.
- इस इश्यू ने वैश्विक स्तर पर भी एक नया मुकाम हासिल किया है. मेटा, अलीबाबा और स्पेसएक्स जैसी कंपनियों के बाद, जियो प्लेटफॉर्म्स दुनिया की चौथी ऐसी कंपनी बन गई है, जिसने अपने IPO के समय 100 अरब डॉलर से ज्यादा की इक्विटी वैल्यूएशन हासिल की है.
- IPO के ऑफर प्राइस के हिसाब से, जियो प्लेटफॉर्म्स की वैल्यूएशन पहले ही लगभग 10.3 लाख करोड़ रुपए आंकी गई है. इस तरह, शेयरों की ट्रेडिंग शुरू होने से पहले ही यह भारत की पांच सबसे मूल्यवान लिस्टेड कंपनियों में शामिल हो गई है.
- इस IPO में 27 करोड़ नए शेयर शामिल हैं, और इसमें ‘ऑफर फॉर सेल’ का कोई हिस्सा नहीं है. यानी, मौजूदा निवेशक अपने शेयर नहीं बेच रहे हैं.
- जियो प्लेटफॉर्म्स इस इश्यू से मिलने वाली रकम में से 27,500 करोड़ रुपए का इस्तेमाल अपने कर्ज़ को चुकाने या समय से पहले चुकाने के लिए करेगी, जबकि बाकी रकम का इस्तेमाल सामान्य कॉर्पोरेट कार्यों के लिए किया जाएगा.
- लिस्टिंग के बाद, रिलायंस ग्रुप कुल लिस्टेड मार्केट कैपिटलाइज़ेशन के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा लिस्टेड बिज़नेस ग्रुप बन जाएगा.
ब्रोकरेज फर्मों का क्या कहना है?
ब्रोकरेज फर्मों ने मध्यम से लंबी अवधि के निवेश के नजरिए से इस IPO में निवेश करने की सलाह दी है. मोतीलाल ओसवाल ने लिस्टिंग गेन और लंबी अवधि के निवेश, दोनों के लिए इस इश्यू में निवेश करने की सलाह दी है.
मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि जियो के पास मार्केट लीडरशिप, अच्छी कमाई में बढ़ोतरी और ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी व AI के क्षेत्र में भविष्य के कई अवसर मौजूद हैं. लंबी अवधि के निवेशकों को मुख्य रूप से ARPU में बढ़ोतरी, टैरिफ में वृद्धि और डिजिटल सेवाओं से होने वाली कमाई पर नजर रखनी चाहिए.
ब्रोकरेज फर्मों के अनुमान के अनुसार, 1,119 रुपए प्रति शेयर की कीमत पर, जियो प्लेटफॉर्म्स का वैल्यूएशन FY26 की कमाई का लगभग 33.3 गुना है. यह भारती एयरटेल के लगभग 40.7 गुना के प्राइसटूअर्निंग मल्टीपल से कम है. हालांकि, एयरटेल की तुलना में जियो का ‘रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड’ और प्रति यूजर औसत रेवेन्यू कम है.
सिस्टेमैटिक्स ने कहा कि जियो का वैल्यूएशन, रिलायंस इंडस्ट्रीज के कंसोलिडेटेड वैल्यूएशन से लगभग 19 फीसदी कम है. उन्होंने जियो को लेकर लंबी अवधि का सकारात्मक नजरिया बनाए रखा है.
ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि जियो का बड़ा कस्टमर बेस, अपनी खुद की टेक्नोलॉजी, मजबूत कैश जनरेशन और विकास के कई अवसर निवेशकों को भरोसा दिलाते हैं. साथ ही, उन्होंने कैपिटल एक्सपेंडिचर, प्रतिस्पर्धा, रेगुलेशन और काम को लागू करने से जुड़े जोखिमों की ओर भी इशारा किया है.