ISSF World Cup Shooting 25m Pistol: भारत की शूटर ईशा सिंह ने सोमवार को हांग्जो में आयोजित ISSF विश्व कप की महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर को हराकर स्वर्ण पदक जीता. 21 वर्षीय ईशा ने फाइनल में अपना धैर्य बनाए रखा और पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि मनु ने कांस्य पदक के लिए कड़ा संघर्ष किया. भारत ने इस यादगार डबल पोडियम फिनिश का शानदार जश्न मनाया.

यह परिणाम महिलाओं की पिस्टल निशानेबाजी में भारत की अविश्वसनीय गहराई की एक और याद दिलाता है. म्यूनिख में रिकॉर्ड बुक फिर से लिखने के कुछ ही हफ्तों बाद ईशा ने एक बार फिर उम्मीदों के दबाव को पार करते हुए एक और विश्व कप खिताब जीता. वहीं, मनु ने अपना ट्रेडमार्क लचीलापन दिखाया और एक तनावपूर्ण शूटऑफ से बचते हुए पोडियम पर जगह बनाई. इससे आगामी विश्व चैंपियनशिप और एशियाई खेलों से पहले उनकी लय बनी रहे.
भारतीय निशानेबाजों का कैसा रहा प्रदर्शन?
भारत ने क्वालीफिकेशन राउंड के दौरान ही अपना दबदबा कायम कर लिया था. मनु 58620x के स्कोर के साथ शीर्ष पर रहीं और ईशा उनसे केवल एक अंक पीछे 58518x पर रहकर फाइनल में पहुंचीं. पूर्व एशियाई खेलों की चैंपियन राही सरनोबत ने भी 58216x के स्कोर के साथ प्रभावित किया, जबकि सिमरनप्रीत कौर बराड़ और अभिज्ञा अशोक पाटिल ने ‘रैंकिंग पॉइंट्स ओनली’ के तहत खेलते हुए ठोस प्रदर्शन किया.
ईशा ने फाइनल में कैसे हासिल की जीत?
जब पदकों की दौड़ शुरू हुई, तो ईशा सबसे मजबूत बनकर उभरीं. उन्होंने पूरे फाइनल के दौरान खुद को शांत रखा और स्वर्ण पदक पक्का करने के लिए 40 हिट दर्ज किए. दूसरी ओर, मनु ने प्रतियोगिता में बने रहने के लिए एक महत्वपूर्ण शूटऑफ जीता और अंततः 28 हिट के साथ कांस्य पदक जीतकर अपने बढ़ते पदकों के संग्रह में एक और उपलब्धि जोड़ी.
दबाव के बीच ईशा ने खुद को कैसे संभाला?
म्यूनिख विश्व कप में 43 हिट के साथ सीनियर और जूनियर दोनों विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली ईशा ने स्वीकार किया कि हांग्जो की चुनौती जितनी तकनीकी थी, उतनी ही मानसिक भी थी. सफलता के साथ अपेक्षाएं भी बढ़ गईं, लेकिन हैदराबाद की यह शूटर उस बोझ को दूर करने में सफल रही. उन्होंने बताया कि पिछले पदक के कारण यह मैच उन पर काफी दबाव वाला था, लेकिन वह इसे पार करके खुश हैं. हांग्जो उनके लिए सुखद यादें लेकर आया, क्योंकि उन्होंने यहां 2023 एशियाई खेलों में चार पदक जीते थे.
मनु भाकर ने क्या कहा?
मनु स्वर्ण पदक से चूक गईं, लेकिन उनका मानना है कि यह कांस्य पदक उनके लिए एक महत्वपूर्ण आगे बढ़ने की सीढ़ी है. पेरिस ओलंपिक की दोहरी पदक विजेता ने कहा कि इस प्रतियोगिता से उन्हें भविष्य की दिशा के बारे में स्पष्टता मिली है. मनु ने यह भी कहा कि इस दबाव भरे फाइनल का अनुभव उन्हें विश्व चैंपियनशिप और एशियाई खेलों जैसे बड़े असाइनमेंट में काफी काम आएगा. ईशा का शानदार प्रदर्शन म्यूनिख के बाद यहां भी जारी रहा, वहीं मनु ने अपनी लय बरकरार रखते हुए एक और पोडियम फिनिश हासिल किया.