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ICRA की देश की इकोनॉमी पर आई रिपोर्ट, GDP के अनुमान से चौंक जाएंगे आप​

जब से मिडिल ईस्ट में वॉर शुरू हुआ है और सप्लाई की चिंताओं की वजह से कच्चे तेल की कीमतों के बाद खाद और दूसरे जरूरी सामानों की सप्लाई में कमी देखने को मिली है. उसके बाद से देश की इकोनॉमी को काफी बड़ा झटका लगा है. वास्तव में इस वॉर की वजह से कच्चे […]

जब से मिडिल ईस्ट में वॉर शुरू हुआ है और सप्लाई की चिंताओं की वजह से कच्चे तेल की कीमतों के बाद खाद और दूसरे जरूरी सामानों की सप्लाई में कमी देखने को मिली है. उसके बाद से देश की इकोनॉमी को काफी बड़ा झटका लगा है. वास्तव में इस वॉर की वजह से कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर है. खाद की कीमतों में भी इजाफा देखने को मिल रहा है. आयात के साथ निर्यात में रुकावट आने से देश की कमाई पर भी काफी ब्रेक लगी है. जिसकी वजह से देश की इकोनॉमी में भी काफी असर पड़ा है. इकरा की हालिया रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की ग्रोथ 7 फीसदी रहने अनुमान है, जोकि पहले के अनुमानित आंकड़े से कम है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर देश की ग्रोथ को लेकर किस तरह का अनुमान लगाया गया है.

इकरा की रिपोर्ट

रेटिंग एजेंसी इक्रा ने चालू वित्त वर्ष की अप्रैलजून तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि दर सात प्रतिशत रहने का अनुमान जताया, जो चार तिमाहियों का निचला स्तर होगा. जनवरीमार्च तिमाही में जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही थी. इक्रा रेटिंग्स ने जून तिमाही में औद्योगिक क्षेत्र की वृद्धि 7.7 प्रतिशत, कृषि क्षेत्र की चार प्रतिशत और सेवा क्षेत्र की 7.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. रेटिंग एजेंसी ने वित्त वर्ष 202627 की समूची अवधि के लिए देश के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जबकि वित्त वर्ष 202526 में यह 7.7 प्रतिशत थी.

किस बात को लेकर जताई चिंता?

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्रों के विभिन्न आंकड़ों से जून तिमाही में घरेलू गतिविधियों की अच्छी तस्वीर सामने आई है. इससे पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण तिमाही के दौरान जिंस कीमतों में वृद्धि के प्रभाव को लेकर जताई गई चिंताएं कम हुई हैं. उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि वास्तविक जीडीपी वृद्धि वित्त वर्ष 202627 की पहली तिमाही में घटकर सात प्रतिशत रह जाएगी, जो वित्त वर्ष 202526 की चौथी तिमाही में 7.8 प्रतिशत थी. यह तिमाही के लिए मौद्रिक नीति समिति के वृद्धि अनुमान के अनुरूप है. इक्रा ने कहा कि जून तिमाही में सेवा क्षेत्र की कंपनियों की कारोबारी धारणा में उल्लेखनीय कमजोरी आई. पश्चिम एशिया संकट और लगातार बढ़ती मजदूरी लागत के दबाव के बीच आशावाद की गति पांच साल के निचले स्तर पर आ गई.

कच्चे तेल की कीमत

नायर ने कहा कि 202627 में कच्चे तेल की औसत कीमत 8085 डॉलर प्रति बैरल रहने की धारणा के आधार पर समूचे वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और मानसून से जुड़ी अनिश्चितता के कारण वृद्धि के जोखिम नकारात्मक बने हुए हैं. हालांकि, उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ने की आशंका के बीच 202627 में मौजूदा कीमतों पर जीडीपी की वृद्धि चार साल के उच्च स्तर 13 प्रतिशत पर पहुंच सकती है, जबकि 202526 में यह 8.9 प्रतिशत रही थी.

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संपादकीय टीम

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