उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में बड़ा बदलाव किया है. पार्टी ने बस्ती के रहने वाले हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव की अहम जिम्मेदारी दी है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम में हरीश द्विवेदी को शामिल किए जाने को यूपी के संगठन में एक मजबूत ब्राह्मण चेहरे को आगे बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. आइये जानते हैं कौन हैं हरीश द्विवेदी और कैसा रहा उनका सियासी सफर.

हरीश द्विवेदी लंबे समय से बीजेपी संगठन में सक्रिय हैं और केंद्रीय नेतृत्व के भरोसेमंद नेताओं में उनकी गिनती होती है. राष्ट्रीय महासचिव बनने से पहले वह बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. इसके अलावा उन्हें अलगअलग राज्यों में चुनाव प्रभारी और संगठनात्मक जिम्मेदारियां भी दी जाती रही हैं.
संघ और विद्यार्थी परिषद से शुरू हुआ सफर
हरीश द्विवेदी का राजनीतिकसंगठनात्मक सफर छात्र जीवन से शुरू हुआ. 22 अक्टूबर 1973 को एक मध्यमवर्गीय ब्राह्मण परिवार में जन्मे हरीश द्विवेदी के पिता साधुशरण दुबे किसान इंटर कॉलेज में शिक्षक रहे हैं. उन्होंने 1990 से 1992 के बीच अपने गांव की संघ शाखा में मुख्य शिक्षक के तौर पर काम किया. साल 1991 में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संपर्क में आए. इसके बाद संगठन में लगातार जिम्मेदारियां बढ़ती गईं.
1993 से 1995 तक वह विद्यार्थी परिषद, बस्ती के जिला प्रमुख रहे. 1994 से 1996 तक प्रदेश सहमंत्री और 1995 से 1998 तक एबीवीपी गोरखपुर के विभाग संगठन मंत्री की जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद 1998 से 2000 तक प्रयाग विभाग संगठन मंत्री और 2000 से 2003 तक प्रयागराज एवं सुल्तानपुर विभाग के संगठन मंत्री रहे.
बीजेपी और युवा मोर्चा में बढ़ी जिम्मेदारी
साल 2004 में हरीश द्विवेदी बीजेपी के संपर्क में आए. 2005 से 2007 तक वह तत्कालीन प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष केशरीनाथ त्रिपाठी के राजनीतिक सलाहकार रहे. इसी दौरान 2005 से 2007 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री और 2007 से 2010 तक प्रदेश उपाध्यक्ष रहे.
इसके बाद साल 2010 से 2013 तक हरीश द्विवेदी भाजपा युवा मोर्चा की यूपी इकाई के प्रदेश अध्यक्ष रहे. संगठन में इस दौरान उन्होंने युवाओं को जोड़ने और पार्टी के विभिन्न अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई. तिरंगा यात्रा जैसे अभियानों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही.
दो बार बस्ती से सांसद रहे
हरीश द्विवेदी ने चुनावी राजनीति में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई. 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्हें बस्ती सदर विधानसभा सीट से बीजेपी का टिकट मिला. इसके बाद 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बस्ती संसदीय सीट से बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की. सांसद रहते हुए उन्होंने ऊर्जा, सूचना एवं प्रौद्योगिकी, वित्त, प्राक्कलन और याचिका समेत कई महत्वपूर्ण संसदीय समितियों में सदस्य के रूप में जिम्मेदारी निभाई. उन्हें संसद की महत्वपूर्ण याचिका समिति का अध्यक्ष भी बनाया गया.
राष्ट्रीय संगठन में भी निभाई बड़ी भूमिका
हरीश द्विवेदी को जेपी नड्डा के नेतृत्व वाली बीजेपी की राष्ट्रीय टीम में राष्ट्रीय मंत्री की जिम्मेदारी भी मिली थी. इसके अलावा वह बिहार जैसे महत्वपूर्ण राज्य के सहप्रभारी रह चुके हैं. वर्तमान में वह संगठन की दृष्टि से महत्वपूर्ण असम के प्रभारी के तौर पर काम कर रहे हैं. हाल ही में पार्टी ने उन्हें राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनाव की जिम्मेदारी भी सौंपी थी.
2027 से पहले BJP का ब्राह्मण समीकरण?
हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने के बाद यूपी की राजनीति में इसके सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं. एक तरफ बीजेपी ओबीसी वोटरों को साधने के लिए अमरपाल मौर्य जैसे चेहरों को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी तरफ हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव बनाकर ब्राह्मण समाज के बीच संगठन का मजबूत चेहरा तैयार किया गया है.
यूपी में 2027 का विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. ऐसे में पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम में ओबीसी और ब्राह्मण दोनों वर्गों से जुड़े प्रभावशाली नेताओं को प्रमुख जिम्मेदारियां मिलना बीजेपी की व्यापक सामाजिक और संगठनात्मक रणनीति का संकेत माना जा रहा है.
हरीश द्विवेदी का लंबा संगठनात्मक अनुभव
संघविद्यार्थी परिषद की पृष्ठभूमि, दो बार सांसद रहने का अनुभव और अलगअलग राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालने का रिकॉर्ड उन्हें बीजेपी के लिए एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक चेहरा बनाता है. अब राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर उनकी नई भूमिका यूपी में बीजेपी के ब्राह्मण वोट बैंक को साधने के साथसाथ राष्ट्रीय स्तर पर संगठन को मजबूत करने में कितनी अहम होगी, इस पर भी नजर रहेगी.