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Diwali 2026: चीन या भारत, कहां है दुनिया की सबसे बड़ी पटाखा मार्केट, कौन सबसे बड़ा सप्लायर?​

दिवाली आ गई है और पटाखों की चर्चा भी हो रही है. लोग प्लान बना रहे हैं कि इस बार वे कौन से पटाखे घर लेकर आएंगे. आइए, इसी बहाने जानते हैं कि चीन या भारत, दुनिया की सबसे बड़ी पटाखा मार्केट कहां है और क्यों? कैसे बना गढ़, भारत हो या चीन, कितने देशों […]

दिवाली आ गई है और पटाखों की चर्चा भी हो रही है. लोग प्लान बना रहे हैं कि इस बार वे कौन से पटाखे घर लेकर आएंगे. आइए, इसी बहाने जानते हैं कि चीन या भारत, दुनिया की सबसे बड़ी पटाखा मार्केट कहां है और क्यों? कैसे बना गढ़, भारत हो या चीन, कितने देशों तक एक्सपोर्ट होते हैं पटाखे, कितना बड़ा कारोबार?

पटाखों की दुनिया में भारत और चीन, दोनों की बड़ी भूमिका है. लेकिन सबसे बड़ा बाजार कहने से पहले यह समझना जरूरी है कि बाजार का मतलब क्या है? घरेलू बिक्री, उत्पादन और दूसरे देशों को निर्यात. इन तीनों की तस्वीर एक जैसी नहीं है. भारत में दिवाली के कारण पटाखों की घरेलू मांग बहुत बड़ी है. इसका सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र तमिलनाडु का शिवकाशी है. चीन, खासकर हुनान प्रांत का लियुयांग, वैश्विक उत्पादन और निर्यात के लिए जाना जाता है. इसलिए घरेलू त्योहारों की खपत के लिहाज से भारत बेहद बड़ा बाजार है, जबकि अंतरराष्ट्रीय कारोबार में चीन की मजबूत मौजूदगी रही है. दोनों देशों की तुलना करते समय अलगअलग आंकड़ों और उनके साल को ध्यान में रखना चाहिए.

भारत में शिवकाशी की क्या है अहमियत?

शिवकाशी को भारत का प्रमुख पटाखा उत्पादन केंद्र माना जाता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में बिकने वाले पटाखों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र में बनता है. उद्योग से जुड़ी रिपोर्टों में यहां सैकड़ों से लेकर एक हजार से अधिक लाइसेंस प्राप्त इकाइयों का उल्लेख मिलता है. सटीक संख्या स्रोत और गिनती के तरीके के अनुसार बदल सकती है. शिवकाशी का महत्व सिर्फ फैक्टरियों तक सीमित नहीं है. यहां पटाखों के साथ पैकेजिंग, छपाई, कच्चे माल की आपूर्ति और परिवहन से जुड़े कारोबार भी विकसित हुए हैं. इससे यह जगह एक औद्योगिक क्लस्टर बन गई है. इस उद्योग से बड़ी संख्या में लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है.

शिवकाशी को भारत का प्रमुख पटाखा उत्पादन केंद्र माना जाता है. फोटो: PTI

शिवकाशी कैसे बना पटाखों का गढ़?

शिवकाशी के विकास की शुरुआत माचिस उद्योग से जुड़ी रही. समय के साथ स्थानीय उद्यमियों ने पटाखे बनाने का काम शुरू किया. इस कारोबार में कई परिवार पीढ़ियों से जुड़े रहे. अनुभव और कामगारों की उपलब्धता ने उत्पादन को बढ़ाने में मदद की. यहां की अपेक्षाकृत सूखी जलवायु भी एक वजह मानी जाती है. पटाखों के निर्माण में नमी और सुरक्षित भंडारण पर खास ध्यान देना पड़ता है. हालांकि, जलवायु अकेली वजह नहीं है. कारोबार का पुराना अनुभव, कुशल कामगार, आपूर्तिकर्ताओं का नेटवर्क और बाजार तक पहुंच भी उतने ही अहम हैं. शिवकाशी में छोटे और मध्यम आकार की इकाइयों का समूह बना. इससे अलगअलग तरह के उत्पाद बनाना और उन्हें देश के कई हिस्सों तक पहुंचाना आसान हुआ.

भारत 40 से अधिक देशों में पटाखे एक्सपोर्ट करता है.फोटो: PTI

भारत और चीन की ताकत अलगअलग

चीन का लियुयांग शहर पटाखों के वैश्विक कारोबार के लिए प्रसिद्ध है. चीन का उद्योग बड़े पैमाने पर उत्पादन और निर्यात से जुड़ा रहा है. भारत में शिवकाशी का मुख्य आधार घरेलू मांग है, खासकर दिवाली और दूसरे त्योहारों के आसपास. इसलिए यह कहना ठीक नहीं होगा कि हर पैमाने पर एक ही देश सबसे बड़ा है. भारत का त्योहारकेंद्रित घरेलू बाजार बहुत बड़ा है. दूसरी ओर, चीन की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति और निर्यात में मजबूत भूमिका है. हाल की कुछ रिपोर्टें भारतीय निर्माताओं की निर्यात में रुचि बढ़ने की बात करती हैं, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि भारत ने वैश्विक निर्यात में चीन को पीछे छोड़ दिया है.

भारत से किन देशों को पटाखे भेजे जाते हैं?

भारत से पटाखों का निर्यात होता है, लेकिन उपलब्ध व्यापार आंकड़ों के अनुसार इसका आकार घरेलू कारोबार की तुलना में छोटा है. भारत के पटाखा निर्यात का मूल्य लगभग 7.57 लाख अमेरिकी डॉलर बताया गया है. इन आंकड़ों में वियतनाम, बुल्गारिया और अमेरिका जैसे देश दर्ज हैं. कुछ उद्योगसंबंधी स्रोतों में भारत के पटाखों के 40 से अधिक देशों तक पहुंचने का दावा भी मिलता है.

भारत में दिवाली के कारण पटाखों का घरेलू बाजार बहुत बड़ा है. फोटो: PTI

कारोबार कितना बड़ा है?

भारत के पटाखा कारोबार के कुल आकार को लेकर अलगअलग अनुमान सामने आते हैं. मीडिया रिपोर्टस में घरेलू बाजार का आकार कई हजार करोड़ रुपये बताया गया है. इन अनुमानों में उत्पादन मूल्य, थोक बिक्री और खुदरा बिक्री को अलगअलग तरीके से जोड़ा जा सकता है. शिवकाशी का कारोबार इस उद्योग का बड़ा हिस्सा है. दिवाली इस बिक्री का सबसे अहम मौसम है. फिर भी कारोबार केवल दिवाली तक सीमित नहीं है. कुछ उत्पाद दूसरे त्योहारों, शादियों और सार्वजनिक आयोजनों में भी इस्तेमाल होते हैं. निर्यात बढ़ाने की कोशिशें भी उद्योग के भविष्य का हिस्सा हैं. शिवकाशी के निर्माताओं की वैश्विक बाजार में विस्तार की कोशिशों का उल्लेख है.

भारत में पटाखे का कारोबार सिर्फ दिवाली तक सीमित नहीं है. फोटो: PTI

पटाखा उद्योग के सामने चुनौतियां?

पटाखा उद्योग पर सुरक्षा नियमों और पर्यावरण संबंधी निर्देशों का असर पड़ता है. उत्पादों के निर्माण, भंडारण और बिक्री में नियमों का पालन जरूरी है. कच्चे माल और परिवहन की लागत भी कारोबार को प्रभावित कर सकती है. इसके अलावा, प्रदूषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता के कारण कई जगहों पर पटाखों की बिक्री या इस्तेमाल परशिवकाशी नियम लागू होते हैं. नियम राज्य और समय के अनुसार बदल सकते हैं. हरित पटाखों को लेकर भी चर्चा बढ़ी है. ऐसे उत्पादों को नियमों के अनुरूप बनाना और उनकी पहचान सुनिश्चित करना उद्योग के लिए जरूरी है. उपभोक्ताओं को भी केवल अधिकृत विक्रेताओं से सामान खरीदना चाहिए और सुरक्षा निर्देशों का पालन करना चाहिए.

इस तरह यह कहा जा सकता है कि भारत में दिवाली के कारण पटाखों का घरेलू बाजार बहुत बड़ा है. इस बाजार का प्रमुख उत्पादन केंद्र शिवकाशी है. वहां का उद्योग पुराने अनुभव, कामगारों, सहायक कारोबारों और देशव्यापी मांग के सहारे विकसित हुआ है. चीन का लियुयांग वैश्विक उत्पादन और निर्यात के लिए जाना जाता है. भारत का निर्यात बढ़ाने की कोशिश जारी है, लेकिन उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि फिलहाल भारतीय पटाखा निर्यात घरेलू बाजार से काफी छोटा है. घरेलू त्योहारआधारित मांग में भारत बेहद मजबूत है, जबकि वैश्विक निर्यात में चीन की भूमिका महत्वपूर्ण रही है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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