मंगलवार, 1 सितंबर 2026 ब्रेकिंग
नदियां उफान पर, गांवों में पानी… UP के 19 जिले बाढ़ से प्रभावित, प्रशासन अलर्ट… जानें काशी से प्रयागराज तक का हाल​ | Aparajita Flower for Skin: चेहरे को निखारेगा अपराजिता का फूल, जान लें इसका सीरम और फेस पैक बनाने का तरीका​ | पांच दिन में ₹8900 सस्ता हुआ गोल्ड, जानिए कितनी हो गई दिल्ली में कीमत​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Viral

Delhi Police SC: CJP प्रदर्शनों से जुड़ी 13 FIR रद्द करने की दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से की मांग, कोर्ट पहुंची पुलिस​

Delhi Police Supreme Court Hearing : दिल्ली में सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान हुई 13 FIR को रद्द करने को लेकर पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है। हालांकि, पुलिस ने 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी है। जिन्हें गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाला बताया गया है।  13 FIR रद्द […]

Delhi Police Supreme Court Hearing : दिल्ली में सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान हुई 13 FIR को रद्द करने को लेकर पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है। हालांकि, पुलिस ने 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी है। जिन्हें गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाला बताया गया है। 

13 FIR रद्द करने की सुप्रीम कोर्ट से मांग

दिल्ली पुलिस ने 20 से 25 जुलाई के बीच हुए CJP प्रदर्शन से जुड़े 13 मामलों में दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की है। पुलिस ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल किया है। पुलिस के अनुसार, इन प्रदर्शनों से जुड़ी घटनाओं पर दर्ज 13 FIR को खत्म करने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, पुलिस ने 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ अलग से FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी है, जिनकी पहचान गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के तौर पर की गई है।

 पुलिस का कहना है कि आगे की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 3 अगस्त के आदेश में बताए गए ‘क्रिमिनल एंटिसिडेंट्स’ के आधार पर की जाएगी। आवेदन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संबंधित घटनाओं को लेकर आम तौर पर नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी। केवल चिन्हित 2,873 लोगों के खिलाफ विशेष कार्रवाई का प्रस्ताव है।

2,873 लोगों पर अलग कार्रवाई का प्रस्ताव

दिल्ली पुलिस ने अपने आवेदन में कहा है कि 25 जुलाई को केंद्र सरकार की ओर से लिए गए फैसले के बाद यह कदम उठाया गया है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों में सभी लोगों के खिलाफ एक जैसी कार्रवाई नहीं की जाएगी। जिन लोगों की पहचान गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़े होने के तौर पर हुई है, केवल उनके खिलाफ अलग FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी गई है।

पुलिस ने  को यह भी बताया है कि प्रस्तावित FIR के बाद होने वाली जांच अदालत के 3 अगस्त के आदेश के मुताबिक की जाएगी। इस आदेश में ‘क्रिमिनल एंटिसिडेंट्स’ की व्याख्या की गई थी। ऐसे में अब अदालत के सामने यह मामला है कि प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों में किन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रखी जाए और किन मामलों को समाप्त किया जाए। पुलिस की इस मांग पर सुप्रीम कोर्ट के रुख पर सभी की नजर है।

NEET प्रदर्शन की FIR पर भी आज सुनवाई

इसी बीच प्रदर्शन से जुड़े FIR मामले में सुप्रीम कोर्ट मंगलवार, 1 सितंबर को सुनवाई करेगा। केंद्र सरकार ने NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की है। 

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने इस मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति दी है। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था।

 केंद्र ने कहा है कि वह प्रदर्शन से जुड़े मामलों में FIR खत्म कराने के लिए अंतरिम आवेदन दाखिल करना चाहता है और इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि यदि संबंधित पक्षों में सहमति बन रही है, तो उसे इस पर आपत्ति नहीं है।

3 अगस्त के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने दी थी सफाई

यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के 3 अगस्त के आदेश से भी जुड़ा है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि ‘क्रिमिनल एंटिसिडेंट्स’ का मतलब गंभीर और जघन्य अपराधों में शामिल लोगों से है। अदालत ने कहा था कि ऐसे मामलों के अलावा अन्य छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को संबंधित राज्य अपने कानून के अनुसार बंद या वापस ले सकते हैं। इसी आधार पर अब केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से प्रदर्शन से जुड़े मामलों को लेकर अलगअलग आवेदन सामने आए हैं।

20 जुलाई को की ओर से आयोजित संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी। प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था। इसके बाद प्रदर्शन से जुड़े कई लोगों पर मामले दर्ज किए गए थे। अब इन मामलों को खत्म करने और कुछ चिन्हित लोगों पर कार्रवाई जारी रखने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचा है।

 

जांच समिति ने भी की थी प्रदर्शन की जांच

प्रदर्शन की शुरुआत 20 जून को जंतरमंतर से हुई थी और बाद में यह आंदोलन देश के कई शहरों तक फैल गया था। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई शामिल थी। 25 जुलाई को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और CJP की अन्य मांगों को सरकार की ओर से स्वीकार किए जाने के बाद आंदोलन समाप्त हुआ था। प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस की कथित कार्रवाई समेत कई आरोप भी सामने आए थे। इन आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व शीर्ष अदालत के न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की थी। अब दिल्ली पुलिस की 13 FIR रद्द करने की मांग और 2,873 लोगों के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई के साथ मामला एक बार फिर चर्चा में है। वहीं, में होने वाली NEET FIR की सुनवाई से यह भी साफ हो सकता है कि प्रदर्शन से जुड़े छात्रों और अन्य लोगों के मामलों में आगे क्या कानूनी रास्ता अपनाया जाएगा।

संबंधित खबर पढ़ें :

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY