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भारत बनेगा मैन्युफैक्चरिंग हब! सेमीकंडक्टर और ऑटो कंपोनेंट कंपनियों के लिए आसान होंगे नियम, 60 दिनों में आएगा बड़ा बदलाव​

भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने और चिप व ऑटोकंपोनेंट निर्माण को रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने टोक्यो में घोषणा की है कि सरकार अगले 2 महीनों के भीतर नियमों में संशोधन करेगी और नए नियम लागू करेगी, ताकि […]

भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने और चिप व ऑटोकंपोनेंट निर्माण को रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने टोक्यो में घोषणा की है कि सरकार अगले 2 महीनों के भीतर नियमों में संशोधन करेगी और नए नियम लागू करेगी, ताकि सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट और ऑटोमोटिव कंपोनेंट बनाने वाली वैश्विक कंपनियों की सभी रेगुलेटरी चिंताओं को दूर किया जा सके.

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय मानक ब्यूरो के नियमों को आसान बनाने और अप्रूवल की प्रक्रिया को तेज करने का यह आश्वासन दो बड़े ग्लोबल कॉर्पोरेट्स द्वारा जताई गई चिंताओं के बाद आया है. हाल ही में स्वीकृत हुए 1,27,500 करोड़ रुपए के ‘सेमीकॉन 2.0’ मिशन और अगले डेढ़ साल में 50 अरब डॉलर के भारीभरकम निवेश लक्ष्य को हासिल करने के लिए, सरकार का यह 60 दिनों का एक्शन प्लान देश में ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ का एक नया अध्याय शुरू करने जा रहा है.

नियमों को आसान बनाने का ऐलान

कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा कि सेमीकंडक्टर और ऑटोमोटिव पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों की चिंताओं को दूर करने के लिए भारत अगले दो महीनों में नियमों में बदलाव करेगा और नए नियम लागू करेगा. टोक्यो में ‘निक्केई एशिया’ के साथ बातचीत में मंत्री ने बताया कि उन्होंने उन दो कंपनियों के साथ बैठक की जो भारत में सेमीकंडक्टर और ऑटोमोटिव पार्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग शुरू करना चाहती हैं, और बातचीत के दौरान उनकी चिंताओं का समाधान कर लिया गया. उन्होंने इस बात को भी खारिज कर दिया कि भारत को केवल एक “प्लस वन” डेस्टिनेशन के तौर पर देखा जाए.

बीआईएस के ढांचे को बनाया आसान

उन्होंने कहा कि मैंने उन्हें भरोसा दिलाया है कि अगले दो महीनों में भारत अपने नियमों में बदलाव करेगा, उनकी मांग को पूरा करने के लिए नए नियम लाएगा और यह पक्का करेगा कि जब वे भारत में मैन्युफैक्चरिंग शुरू करें, तो उन्हें कोई दिक्कत न हो. गोयल ने बताया कि सरकार ने ‘ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स’ के ढांचे को काफी आसान बना दिया है और मंजूरी की प्रक्रिया को सरल बनाने पर काम कर रही है, जिसमें वे सप्लायर भी शामिल हैं जो शायद बदले हुए नियमों के दायरे में नहीं आते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे मौके भी आ सकते हैं जब मांग सिर्फ किसी दूसरे देश से सामान आयात करने की हो… जो निष्पक्ष व्यापार के तरीकों के लिए सही नहीं है और जिसके बारे में अक्सर यह माना जाता है कि इसमें सामान बहुत कम कीमतों पर सप्लाई किया जाता है.

‘सेमीकॉन 2.0’ को मंजूरी

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थितियों में, जाहिर है कि इंडस्ट्री के कुछ सेक्टर की मांगों को पूरा करना बहुत मुश्किल होता है. और मैं इसके लिए कोई माफी नहीं मांगता, जब वे मुझसे मिलते हैं, तो मैं इस बारे में बहुत साफसाफ और खुलकर बात करता हूं. उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने भारत के सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विकास के लिए ‘सेमीकॉन 2.0’ को मंजूरी दे दी है. उन्होंने कहा कि प्राइवेट सेक्टर के साथ मिलकर, हम अगले एकडेढ़ साल में सेमीकंडक्टर और उससे जुड़ी इंडस्ट्री में लगभग 50 अरब डॉलर का निवेश शुरू करने की योजना बना रहे हैं. एक बार यह हो जाने के बाद, हम ‘सेमीकंडक्टर 3.0’ लेकर आएंगे, क्योंकि हमारे लिए यह एक सफर है.

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संपादकीय टीम

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