मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के कारण अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने का निर्देश मिलने के बाद अब फिल्म निर्माता किरण राव उनके समर्थन में उतर आई हैं। ‘आई हेट लव स्टोरीज’ और ‘मेरे ब्रदर की दुल्हन’ जैसी फिल्मों में नजर आ चुके इमरान खान भारतीय मूल के विदेशी नागरिक हैं। मुंबई स्थित विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय ने आप्रवास और विदेशी विषयक अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए उन्हें यह नोटिस जारी किया है।

मुंबई स्थित विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय की ओर से उन्हें आप्रवास और विदेशी विषयक अधिनियम के प्रावधानों के कथित उल्लंघन के आरोप में नोटिस जारी किया है। अभिनेता के खिलाफ एफआरआरओ ने यह कार्रवाई भारतीय जनता पार्टी के नेता किरीट सोमैया की शिकायत के बाद की। भाजपा नेता ने आरोप लगाया था कि इमरान का जन्म और शिक्षा अमेरिका में हुई, लेकिन उन्होंने भारत में रहकर रोजीरोटी कमाई और फिर ‘‘सरकार का विरोध करने वाली राजनीतिक गतिविधियों में भाग लिया।’’
इमरान के मामा आमिर खान की पूर्व पत्नी किरण राव ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा, “43 साल की उम्र में से 40 साल भारत में बिताए। यहीं पढ़ाई की, यहीं काम किया, यहीं सफलता और असफलता देखी, यहीं प्यार मिला और यहीं लड़ाई लड़ी।” मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में आयोजित विरोध प्रदर्शन में इमरान ने हिस्सा लिया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने इमरान, उनकी साथी लेखा वाशिंगटन और उनकी चचेरी बहन जैन मैरी खान को कुछ समय के लिए हिरासत में ले लिया था। अभिनेता ने पुलिस वाहन में बैठे अपनी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा था, “लगता है मैं सैर पर जा रहा हूं।”
इमरान ने हिरासत में लिए जाने से पहले संवाददाताओं से कहा था, “मेरी कोई मांग नहीं है। मैं यहां एक नागरिक के रूप में आया हूं, एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जो इस शहर में रहता है। मैं यह देखने आया हूं कि कहीं भी आनेजाने की आजादी पर पाबंदी क्यों लगाई जा रही है और लोगों की आवाजों को क्यों दबाया जा रहा है।” अभिनेता के वकील ने पुष्टि की है कि वे इस नोटिस को मुंबई उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे।
आगे की कानूनी लड़ाई
इस पूरे मामले के बाद, अभिनेता इमरान खान के वकीलों ने साफ कर दिया है कि वे FRRO द्वारा दिए गए इस देश छोड़ने के नोटिस को मुंबई उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे। यह मामला OCI कार्ड धारकों के अधिकारों और देश में राजनीतिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी को लेकर एक बड़ी बहस बन गया है।
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