Wednesday, April 15, 2026
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Asha Bhosle: फिरोजी साड़ी, गले में माला और माथे पर बिंदी…अंतिम दर्शन के लिए आशा भोसले को ऐसे किया गया तैयार, तस्वीरें रुला देंगी!

Asha Bhosle Final Look: सुरों की मल्लिका और भारतीय संगीत जगत का एक चमकता सितारा हमेशा के लिए विदा हो गया. आशा भोसले, जिनकी आवाज ने कई दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज किया, वो अब सिर्फ यादें बनकर हमारे साथ रहेंगी. अपने अंतिम सफर पर निकलीं आशा भोसले की जो तस्वीरें सामने आई हैं, उन्होंने हर संगीत प्रेमी की आंखों को नम कर दिया है.

Asha Bhosle: फिरोजी साड़ी, गले में माला और माथे पर बिंदी…अंतिम दर्शन के लिए आशा भोसले को ऐसे किया गया तैयार, तस्वीरें रुला देंगी!
Asha Bhosle: फिरोजी साड़ी, गले में माला और माथे पर बिंदी…अंतिम दर्शन के लिए आशा भोसले को ऐसे किया गया तैयार, तस्वीरें रुला देंगी!

को साड़ियां बहुत पसंद थी, तैयार होने का उन्हें खूब शौक था. उनके अंतिम सफर के लिए बिल्कुल उसी सादगी और गरिमा के साथ तैयार किया गया था, जिसके लिए वह ताउम्र जानी गईं. आशा भोसले को पसंदीदा फिरोजी रंग की साड़ी पहनाई गई, उनके गले में एक मोती की माला के साथ फूलों की माला पहनाई गई. उनके माथे पर सजी बिंदी उनके उस अंदाज को बरकरार रखे हुए नजर आ रही है, जिसे दुनिया ने हमेशा सराहा. उन्हें देखकर ऐसा लगा मानो वो गहरी नींद में सो रही हों. उनके चेहरे पर वही सुकून था जो उनके गाए भजनों और गजलों में सुनाई देता था.

भावुक हुए सचिन तेंदुलकर

आशा भोसले के अंतिम दर्शन के लिए मनोरंजन और खेल जगत की तमाम दिग्गज हस्तियां मुंबई स्थित उनके आवास पर पहुंचीं. इस दौरान सबसे भावुक कर देने वाला पल वो था जब क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले वहां पहुंचे. सचिन, आशा ताई के बेहद करीब थे और उन्हें अपनी मां जैसा सम्मान देते थे. पार्थिव शरीर के पास खड़े होकर सचिन भावुक हो गए.

वहीं, पुरानी सहेली और दिग्गज अभिनेत्री आशा पारेख भी खुद को संभाल नहीं पाईं. बॉलीवुड के कई बड़े सितारे, जो कभी आशा जी के गानों पर थिरकते थे, आज वहां सिर झुकाए खामोश खड़े थे. हर किसी के चेहरे पर एक ही बात थी कि अब ‘दम मारो दम’ और ‘पिया तू अब तो आजा’ जैसी ऊर्जा देने वाली आवाज़ फिर कभी लाइव सुनने को नहीं मिलेगी.

संगीत के एक महान युग का समापन

1933 में जन्मीं आशा भोसले ने केवल 10 साल की उम्र से गायकी की शुरुआत की थी. उन्होंने हिंदी के अलावा मराठी, बंगाली, गुजराती और अंग्रेजी सहित 20 से अधिक भाषाओं में हजारों गाने गाए. उनके जाने से न केवल मंगेशकर परिवार, बल्कि पूरे संगीत जगत को एक ऐसी क्षति हुई है, जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं.

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