Wednesday, April 29, 2026
Health

Adulteration in Papaya: केमिकल से पके हुए पपीते की कैसे करें पहचान? ये तरीके आएंगे काम

Adulteration in Papaya: फल जहां सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. वहीं अब बाजारों में इनकी क्वालिटी को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. कई फल ऐसे हैं जिन्हें केमिकल से पका जा रहा है, जिसे खाने के बाद सेहत को काफी नुकसान पहुंच रहा है. इसी में से एक पपीता भी है. जिसे उसे जल्दी पकाने और ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए कई बार केमिकल्स की मदद से तैयार किया जाता है. बाहर से देखने में ये पपीते बिल्कुल फ्रेश और आकर्षक लगते हैं, लेकिन अंदर से उनकी गुणवत्ता और पोषण पर असर पड़ सकता है. यही वजह है कि उपभोक्ताओं के लिए यह जानना बेहद जरूरी हो गया है कि वे जो फल खरीद रहे हैं, वह प्राकृतिक रूप से पका है या उसे आर्टिफिशिल तरीके से पकाया गया है.

Adulteration in Papaya: केमिकल से पके हुए पपीते की कैसे करें पहचान? ये तरीके आएंगे काम
Adulteration in Papaya: केमिकल से पके हुए पपीते की कैसे करें पहचान? ये तरीके आएंगे काम

एक्सपर्ट बताते हैं कि केमिकल से पकाए गए फलों का नियमित सेवन सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए. ऐसे में अगर आप भी खरीदने जा रहे हैं तो जरूरी है कि उसकी पहचान करनी आनी चाहिए. आइए जानते हैं ऐसे आसान तरीके, जिनकी मदद से आप केमिकल से पके पपीते की पहचान कर सकते हैं और सेहत को नुकसान पहुंचने से बचा सकते हैं.

क्या कहता है FSSAI?

पपीते जैसे फलों को जल्दी पकाने के लिए अवैध रूप से कैल्शियम कार्बाइड (Calcium Carbide) का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो पूरी तरह बैन है. यह केमिकल नमी के संपर्क में आकर ऐसी गैस छोड़ता है, जो फल को आर्टिफिशियल रूप से जल्दी पका देती है, लेकिन इसमें आर्सेनिक और फॉस्फोरस जैसे हानिकारक तत्व हो सकते हैं. FSSAI के अनुसार इस तरह की मिलावट से फल की क्वालिटी खराब हो जाती है. जिससे ये लंबे समय तक खाने से सेहत को नुकसान हो सकता है. इसलिए जरूरी है कि फल खाने से पहले असली और नकली की पहचान कर लें.

रंग (Color) से पहचान करें- प्राकृतिक रूप से पका पपीता हल्के पीले से नारंगी रंग का होता है और उसका रंग समान रूप से फैला होता है. जबकि केमिकल से पके पपीते में अक्सर ऊपर से बहुत ज्यादा चमकीला पीला रंग दिखता है, लेकिन कहीं-कहीं हरे धब्बे भी रह जाते हैं.

खुशबू (Smell) पर ध्यान दें- नेचुरली पका पपीता मीठी और हल्की खुशबू देता है. अगर पपीते में कोई खास सुगंध नहीं है या अजीब-सी गंध आ रही है, तो यह केमिकल से पकाया गया हो सकता है.

छिलके की बनावट (Texture) जांचें- प्राकृतिक पपीते का छिलका मुलायम और थोड़ा दबाने पर हल्का सा दब जाता है. लेकिन वहीं केमिकल से पका पपीता बाहर से ज्यादा सख्त या असमान रूप से नरम हो सकता है.

अंदर का गूदा (Pulp) देखें- कटने पर अगर पपीते का गूदा बहुत ज्यादा सख्त, फीका या टेस्टलेस लगे, तो यह संकेत हो सकता है कि वह नेचुरल रूप से नहीं पका है. असली पका पपीता अंदर से रसदार और मीठा होता है.

जल्दी खराब होना- केमिकल से पके पपीते जल्दी सड़ने लगते हैं या अंदर से खराब निकल सकते हैं, जबकि प्राकृतिक रूप से पका पपीता थोड़े समय तक ताजा रहता है. अगर पपीता बाहर से सही दिखे लेकिन अंदर से जल्दी खराब हो जाए, तो सावधान होने की जरूरत है.

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