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हॉस्पिटल के एक बिल में कैसे लगा सकते हैं दो हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी! ये रहा तरीका​

कई नौकरीपेशा लोगों के पास अक्सर 2 हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियां होती हैं. एक तो कॉर्पोरेट पॉलिसी, जो जॉब के दौरान कंपनी की ओर से मिलती है. दूसरी व्यक्ति की ओर से खुद भुगतान कर खरीदी जाती है. हर एक हेल्थ पॉलिसी की लिमिट होती है. ऐसे में सवाल ये है कि अगर इलाज के दौरान […]

कई नौकरीपेशा लोगों के पास अक्सर 2 हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियां होती हैं. एक तो कॉर्पोरेट पॉलिसी, जो जॉब के दौरान कंपनी की ओर से मिलती है. दूसरी व्यक्ति की ओर से खुद भुगतान कर खरीदी जाती है. हर एक हेल्थ पॉलिसी की लिमिट होती है. ऐसे में सवाल ये है कि अगर इलाज के दौरान हॉस्पिटल का बिल ज्यादा आ जाए तो क्या दोनों पॉलिसियों को इस्तेमाल किया जा सकता है?

अगर आपके पास दो हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियां हैं, तो अस्पताल का बड़ा बिल होने पर दूसरी पॉलिसी आपके लिए काफी काम आ सकती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एक ही इलाज के खर्च का दोनों पॉलिसियों से दो बार पैसा लिया जा सकता है. आमतौर पर पहले इंश्योरेंस से क्लेम का निपटारा किया जाता है. इसके बाद जो खर्च बच जाता है, उसे दूसरी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी से कवर किया जा सकता है. यानी दोनों कंपनियों से मिलाकर कुल खर्च तक ही भुगतान मिल सकता है.

दूसरी पॉलिसी का इस्तेमाल कैसे करें?

भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण के नियमों के अनुसार आप एक से ज्यादा पॉलिसियों से क्लेम ले सकते हैं. सबसे पहले आपको अपनी पहली पसंद या मैन इंश्योरेंस कंपनी के पास क्लेम फाइल करना होगा. पहली कंपनी से मिलने वाले सेटलमेंट/पेमेंट का अप्रूवल लेटर और डिस्चार्ज समरी की कॉपी लेनी होगी. इसके बाद, बचे हुए बिल के भुगतान के लिए पहली कंपनी के सेटलमेंट दस्तावेजों के सर्टिफिकेट के साथ दूसरी बीमा कंपनी के पास रीइम्बर्समेंट के लिए आवेदन करना होगा. हालांकि, दूसरी कंपनी को सभी चीजें बतानी होंगी. यह उस कंपनी की शर्तों पर भी निर्भर करता है.

पहली कंपनी क्लेम में देरी करे तो क्या करें?

अगर पहली इंश्योरेंस कंपनी क्लेम को लंबे समय तक लटकाती है, तो दूसरी पॉलिसी का क्लेम भी अटक सकता है. ऐसे में ग्राहक को पहले क्लेम का जल्द निपटारा कराने की कोशिश करनी चाहिए. सामान्य फॉलोअप से समस्या हल नहीं होती है तो कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी, TPA या इंश्योरेंस कंपनी की क्लेम टीम से संपर्क किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर कंपनी के ग्रिवांस रिड्रेसल ऑफिसर के पास भी शिकायत की जा सकती है.

कुल मिलाकर, दो हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियां होने से इलाज के बड़े खर्च उठाने में मदद मिल सकती है, लेकिन इससे एक ही खर्च का दो बार भुगतान लेने का अधिकार नहीं मिलता. इसलिए दोनों पॉलिसियों की जानकारी कंपनियों को देना और सभी मेडिकल व क्लेम दस्तावेजों की कॉपी संभालकर रखना जरूरी है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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