: आपदा में जान गंवाने वाले पीड़ितों की सहायता के लिए हर तरफ हाथ उठ रहे हैं। धर्मनगरी में भी अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के साधुसंत आपदा पीड़ितों की सहायता के लिए आगे आए हैं। 3 सितंबर, गुरूवार को कनखल के बड़ा उदासीन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की बैठक में साधुसंतों ने आपदा पीड़ितों और मृतकों के प्रति शोक संवेदनाएं व्यक्त की। इसके साथ ही धनराशि एकत्रित करके आपदा पीड़ितों के लिए भेजने की बात कही।

नेपाल के पीड़ितों को भेजी जाएंगे 38 लाख रुपये
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि नेपाल त्रासदी के बाद संत समाज में भी रोष है, क्योंकि नेपाल को भी भारत का संत समाज अपना ही मानता है। अखाड़ा परिषद की बैठक में साधु संतों ने करीब 38 लाख रुपये की राशि जमा की है। जिसे जिला प्रशासन के जरिये भेजने की व्यवस्था की जाएगी।
‘संत समाज नेपाल को भी अपना अंग ही मानता है’
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के मीडिया कोऑर्डिनेटर महामंडलेश्वर बाबा शंकर दास करौली ने कहा कि में हुई त्रासदी के बाद परिषद ने कुंभ की तैयारी के लिए बैठक आयोजित नहीं करके नेपाल पीड़ितों की सहायता के लिए बैठक आयोजित की और उन्हें सहायता पहुंचाने का कार्य किया है। संत समाज नेपाल को भी अपना अंग ही मानता है।
नेपाल बाढ़ में 1259 से ज्यादा लोगों की मौत
में आई भीषण बाढ़ के कारण अब तक करीब 1259 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, 5000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। पनबिजली परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे मजदूरों को खोजने के लिए राहत और बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं।
करीब 20 हजार नए घर बनाने की जरूरत
26 अगस्त को तिब्बत में ग्लेशियर टूटने के बाद नेपाल में आई बाढ़ से बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए हैं। बाढ़ से तबाह इलाकों में लोगों को दोबारा बसाने के लिए करीब 20 हजार घर बनाने की जरूरत पड़ेगी।
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