नोएडा में अप्रैल में श्रमिकों का आंदोलन हुआ था. इस मामले में आकृति चौधरी पर एनएसए लगाया था. आरोप था कि उन्होंने आंदोलन को भड़काया. इसके खिलाफ आकृति ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया, जहां उन्हें बड़ी राहत मिली. कोर्ट ने NSA डिटेंशन रद्द करने के साथ ही उन्हें 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया. अब सवाल है कि ये 5 लाख रुपये कौन देगा? इसका जवाब आकृति के वकील राजवेंद्र सिंह ने दिया है.

आकृति के वकील राजवेंद्र सिंह ने बताया, वो एलएलबी फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट है. नोएडा में अप्रैल में जो मजदूरों का आंदोलन हुआ था, उसमें आकृति पर आरोप है कि उन्होंने आंदोलन को भड़काया. जबकि आकृति शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल थी. जब तोड़फोड़ की घटना हुई तब वो आंदोलन में शामिल ही नहीं थी. उन पर एनएसए लगाया गया, जिसे हमने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.
उन्होंने बताया, कोर्ट ने सुनवाई की और राज्य से कुछ कागजात मांगे थे लेकिन राज्य सरकार की ओर से कोई ऐसा सबूत नहीं मिला, जिससे उन पर आरोप सिद्ध होते हों. लिहाजा कोर्ट ने डिटेंशन ऑर्डर रद्द कर दिया. साथ ही सरकार से 5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है. ये मुआवजा नोएडा डीएम और जिन पुलिस अधिकारियों की रिकमेंडेशन पर एनएसए लगाया गया उनसे वसूला जाएगा.
कोर्ट ने क्या कहा?
हाई कोर्ट ने राज्य की ओर से पेश की गई कहानी और आकृति के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाए. कोर्ट ने पूछा, आखिर ऐसा कौन सा वीडियो साक्ष्य है, जिससे साबित होता है कि आकृति ने प्रदर्शनकारियों को पत्थरबाजी या आगजनी के लिए उकसाया था. इसे साबित करने के लिए राज्य सरकार की ओर से ऐसा कोई साक्ष्य पेश नहीं किया जा सका. आखिरकार कोर्ट ने NSA के तहत की गई हिरासत को रद्द कर दिया और 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया.
अफसरों की जेब से पैसा क्यों?
कोर्ट का ये आदेश इसलिए काफी अहम है क्योंकि मुआवजे की जिम्मेदारी सीधे प्रशासनिक अधिकारी के वेतन से जोड़ने की बात सामने आई है. इसका साफ संदेश है कि अगर किसी नागरिक की स्वतंत्रता पर कार्रवाई कानून और प्रक्रिया के मुताबिक नहीं हुई तो उसकी जिम्मेदारी सिर्फ सिस्टम की नहीं मानी जाएगी, बल्कि संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो सकती है.