अगर आप भी सोचते हैं कि 750 या उससे ज्यादा का सिबिल स्कोर आपको तुरंत लोन दिला देगा, तो आप गलतफहमी में हैं. सिबिल स्कोर 750 या उससे ज्यादा है, तो इसे अच्छा स्कोर माना जाता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बैंक आपको लोन जरूर देगा. यानी अच्छा क्रेडिट स्कोर लोन मिलने की गारंटी नहीं होता, बल्कि यह बैंक की प्रक्रिया का सिर्फ एक हिस्सा है. कई बार 750 से ज्यादा सिबिल स्कोर वाले ग्राहकों की लोन एप्लीकेशन भी बैंक झटके में खारिज कर देते हैं. बैंक केवल आपकी रीपेमेंट हिस्ट्री नहीं देखते, बल्कि आपकी मौजूदा आमदनी और वित्तीय आदतों का गहराई से मूल्यांकन करते हैं.

ज्यादा ईएमआई तो बैंक कर सकता है लोन रिजेक्ट
बैंक लोन देने से पहले यह देखते हैं कि आपकी मासिक कमाई का कितना हिस्सा पहले से कर्ज चुकाने में जा रहा है. इसे एफओआईआर यानी फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो कहा जाता है. अगर आपकी आय का 50 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा पहले से चल रही ईएमआई या क्रेडिट कार्ड बिल में जा रहा है, तो बैंक को लगता है कि नए लोन की ईएमआई चुकाना आपके लिए मुश्किल हो सकता है. ऐसे में 750+ सिबिल स्कोर होने के बावजूद लोन आवेदन खारिज हो सकता है.
क्रेडिट कार्ड की लिमिट ज्यादा इस्तेमाल करना भी भारी
अगर आप अपने क्रेडिट कार्ड की लिमिट का बड़ा हिस्सा लगातार इस्तेमाल करते हैं, तो इसका असर लोन आवेदन पर पड़ सकता है. इसे क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो कहा जाता है. उदाहरण के लिए, अगर कार्ड की लिमिट का 30 से 40 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा लगातार इस्तेमाल हो रहा है, तो बैंक इसे आपकी वित्तीय स्थिति पर दबाव के संकेत के तौर पर देख सकते हैं. इसलिए सिर्फ सिबिल स्कोर अच्छा होना काफी नहीं है, बल्कि आप अपनी उपलब्ध क्रेडिट लिमिट का इस्तेमाल किस तरह करते हैं, यह भी महत्वपूर्ण है.
नौकरी और लोन आवेदन का रिकॉर्ड भी देखा जाता है
बैंक आमतौर पर स्थिर आय वाले ग्राहकों को कम जोखिम वाला मानते हैं. अगर कोई व्यक्ति बारबार नौकरी बदलता है या कम समय तक एक ही जगह काम करता है, तो बैंक को उसकी भविष्य की आय को लेकर अनिश्चितता हो सकती है. इसके अलावा, एक ही समय में कई बैंकों में लोन के लिए आवेदन करने पर क्रेडिट रिपोर्ट में कई हार्ड इंक्वायरी दर्ज हो सकती हैं. इससे बैंक को लग सकता है कि व्यक्ति को कर्ज की ज्यादा जरूरत है, जिससे आवेदन खारिज होने का खतरा बढ़ सकता है.
| लोन रिजेक्शन की वजह | क्या होता है |
बैंक इसे कैसे देखता है
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| हाई एफओआईआर | आय का बड़ा हिस्सा ईएमआई में जाता है |
नई ईएमआई चुकाने की क्षमता कम
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| हाई क्रेडिट यूटिलाइजेशन | कार्ड लिमिट का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल |
क्रेडिट पर ज्यादा निर्भरता
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| अस्थिर नौकरी | बारबार नौकरी बदलना |
आय में अनिश्चितता का जोखिम
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| खराब क्रेडिट मिक्स | सिर्फ अनसिक्योर्ड कर्ज का इतिहास |
कर्ज का संतुलन कमजोर
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क्रेडिट मिक्स और गारंटर बनने का भी असर
बैंक आपके क्रेडिट इतिहास में अलगअलग तरह के कर्ज का रिकॉर्ड भी देखते हैं. अगर आपके पास सिर्फ पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड जैसे अनसिक्योर्ड लोन का इतिहास है, तो क्रेडिट मिक्स बैलेंस नहीं माना जा सकता है. इसके अलावा, अगर आपने किसी दूसरे व्यक्ति के लोन में गारंटर के तौर पर हस्ताक्षर किए हैं और उस व्यक्ति ने ईएमआई चुकाने में चूक की है, तो उसका असर आपकी लोन एलिजिबिलिटी पर भी पड़ सकता है. इसलिए अच्छा सिबिल स्कोर होने के साथ पूरी वित्तीय प्रोफाइल का मजबूत होना भी जरूरी है.