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3 साल पहले था पूरी तरह लकवाग्रस्त, अब खुद खा-पी रहा खाना; ‘डबल न्यूरल बायपास’ तकनीक ने किया कमाल​

वैज्ञानिकों ने ‘डबल न्यूरल बायपास’ नाम की एक ऐसी तकनीक पेश की है, जो न सिर्फ लकवाग्रस्त हाथों में मूवमेंट वापस ला रही है, बल्कि इंसान को चीजों को छूने और महसूस करने की ताकत भी लौटा रही है। रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगने के बाद इंसान का शरीर अक्सर लकवे का शिकार […]

वैज्ञानिकों ने ‘डबल न्यूरल बायपास’ नाम की एक ऐसी तकनीक पेश की है, जो न सिर्फ लकवाग्रस्त हाथों में मूवमेंट वापस ला रही है, बल्कि इंसान को चीजों को छूने और महसूस करने की ताकत भी लौटा रही है।

रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगने के बाद इंसान का शरीर अक्सर लकवे का शिकार हो जाता है और मेडिकल साइंस में इसे लंबे समय से एक लाइलाज स्थिति माना जाता रहा है।

मगर हाल ही में, जानीमानी मेडिकल पत्रिका नेचर मेडिसिन के कवर पेज पर नॉर्थवेल हेल्थ के ‘फेनस्टीन इंस्टीट्यूट्स फॉर मेडिकल रिसर्च’ की एक ऐसी रिसर्च छपी है, जिसने दुनिया को हैरत में डाल दिया है।

जी हां, इस स्टडी ने दुनिया के सामने ‘डबल न्यूरल बायपास’ नाम की एक ऐसी तकनीक पेश की है, जो न सिर्फ लकवाग्रस्त अंगों में मूवमेंट वापस ला सकती है, बल्कि इंसान को स्पर्श महसूस करने की ताकत भी लौटा सकती है।

निराशा से नई उम्मीद तक का सफर

न्यूयॉर्क के रहने वाले 48 साल के कीथ थॉमस की जिंदगी एक डाइविंग हादसे के बाद पूरी तरह बदल गई थी। इस दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी को इतना नुकसान पहुंचा कि वे सीने के नीचे पूरी तरह लकवाग्रस्त हो गए। चोट के 13 महीने बाद जब वे इस क्लिनिकल ट्रायल से जुड़े, तब हालात इतने खराब थे कि वे खुद से अपने हाथों को चेहरे तक भी नहीं ला सकते थे और उन्हें रोजमर्रा के हर छोटे काम के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था।

मगर तीन साल तक चले इस ट्रायल ने करिश्मा कर दिखाया। आज कीथ न केवल अपने हाथों से अपना खाना खा सकते हैं और पानी पी सकते हैं, बल्कि खुद अपनी नाक भी खुजा सकते हैं। यह सब उसी तकनीक का नतीजा है जिसे अब तक नामुमकिन समझा जाता था।

15 घंटे तक चली कीथ की ओपनस्कल सर्जरी

यह नई ‘डबल न्यूरल बायपास’ तकनीक दरअसल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्रेनकंप्यूटर इंटरफेस और इलेक्ट्रिक स्टिमुलेशन का एक बेहद एडवांस हाइब्रिड मॉडल है।

कीथ के दिमाग की 15 घंटे लंबी ओपनस्कल सर्जरी की गई, जिसमें उनके मस्तिष्क के अलगअलग हिस्सों में पांच माइक्रोइलेक्ट्रोड चिप्स लगाए गए। इनमें से कुछ मोटर कॉर्टेक्स और कुछ सेंसरी कॉर्टेक्स में फिट किए गए।

AI और स्पेशल सेंसर्स से कीथ ने हासिल की 87% सटीकता

जब कीथ अपने हाथ को हिलाने का सोचते हैं, तो AI उनके दिमाग की तरंगों को सटीकता से पढ़ लेता है। फिर यह सिस्टम उनके हाथ की मांसपेशियों पर लगे विशेष पैच के जरिए बिजली के हल्के संकेत भेजता है, जिससे उनका लकवाग्रस्त हाथ हरकत करने लगता है।

बता दें, उनके लिए एक खास 3Dप्रिंटेड डिवाइस बनाया गया है। जब वे इस डिवाइस की मदद से किसी चीज को पकड़ते हैं, तो इसके सेंसर्स सीधे दिमाग को सिग्नल भेजते हैं, जिससे कीथ को यह पता चलता है कि उन्होंने किसी चीज को छुआ है।

इस सिस्टम का नियंत्रण इतना बेहतरीन है कि कीथ बातचीत करते हुए भी खाली अंडे के छिलके को बिना तोड़े 87% बार आसानी से उठा और रख सकते हैं, जिससे साबित होता है कि इस तकनीक को इस्तेमाल करने में दिमाग पर ज्यादा जोर नहीं पड़ता।

सिर्फ बायपास नहीं, नर्वस सिस्टम की हो रही है ‘मरम्मत’

फेनस्टीन इंस्टीट्यूट्स के शोधकर्ता और इस स्टडी के प्रमुख लेखक डॉ. चाड बाउटन का कहना है कि यह तकनीक सिर्फ नसों की चोट को बायपास नहीं कर रही है, बल्कि यह नर्वस सिस्टम को नए सिरे से जोड़ रही है।

इस प्रक्रिया ने ‘न्यूरोप्लास्टिसिटी’ को ट्रिगर किया, यानी शरीर ने खुद अपने डैमेज हो चुके नर्वस सिस्टम में नए रास्ते बनाने शुरू कर दिए। 35 हफ्तों की इस थेरेपी के बाद कीथ के दाएं हाथ की ताकत 86% और बाएं हाथ की ताकत 62% तक बढ़ गई। साथ ही, ‘कॉर्टिकल मिररिंग’ नामक एक खास थेरेपी से कीथ के पूरी तरह सुन्न हो चुके अंगों में भी सेंसेशन वापस आ गया। सबसे बड़ी बात यह है कि मशीन का इस्तेमाल बंद करने के दो साल बाद भी कीथ के हाथों की ताकत और महसूस करने की क्षमता बनी हुई है।

फेनस्टीन इंस्टीट्यूट्स के प्रेसिडेंट डॉ. केविन जे. ट्रेसी और डॉ. बाउटन की यह टीम अब इस तकनीक को और बेहतर बनाने में जुटी है। भविष्य में इसका इस्तेमाल स्ट्रोक और लकवे के अन्य मरीजों पर भी करने की योजना है। हाल ही में इस टीम ने एक ‘इंटरह्यूमन न्यूरल बायपास’ का भी सफल परीक्षण किया है, जहां कीथ ने अपने ब्रेन इम्प्लांट की मदद से रीढ़ की हड्डी की चोट वाले एक अन्य मरीज का हाथ हिलाने में मदद की, जो मेडिकल साइंस में एक बिल्कुल नए युग की शुरुआत है।

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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