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गोल्ड एक्सचेंज करने से पहले जान लें टैक्स के नियम, वरना बढ़ सकती है परेशानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील की है. ऐसे में कई लोग पुराने गहनों को बदलकर नए डिजाइन के गहने बनवाने पर विचार कर सकते हैं. लेकिन यह सिर्फ साधारण एक्सचेंज नहीं होता, बल्कि इसे पूंजीगत संपत्ति (Capital Asset) का ट्रांसफर माना जाता है, जिस पर कैपिटल गेन टैक्स लग सकता है.

गोल्ड एक्सचेंज करने से पहले जान लें टैक्स के नियम, वरना बढ़ सकती है परेशानी
गोल्ड एक्सचेंज करने से पहले जान लें टैक्स के नियम, वरना बढ़ सकती है परेशानी

जब पुराने गहनों की कीमत को नए गहनों की कीमत में एडजस्ट किया जाता है, तो टैक्स के हिसाब से इसे बिक्री माना जाता है. पुराने गहनों की खरीद कीमत और उनकी मौजूदा कीमत के बीच का अंतर मुनाफा माना जाता है और इसी पर कैपिटल गेन टैक्स लगता है. टैक्स इस बात पर निर्भर करेगा कि गहने कितने समय तक आपके पास रहे.

पुराने सोने पर कितना टैक्स लगेगा?

अगर सोने के गहने 24 महीने से ज्यादा समय तक रखे गए हैं, तो उस पर होने वाला मुनाफा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा और उस पर 12.5% टैक्स लगेगा. वहीं, अगर गहने 24 महीने या उससे कम समय तक रखे गए हैं, तो मुनाफा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा. ऐसे में टैक्स आपकी आयकर स्लैब के हिसाब से लगेगा.

ITR में जानकारी देना जरूरी

सोने के गहनों की बिक्री या एक्सचेंज से जुड़ी हर जानकारी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में दिखाना जरूरी है. कैपिटल गेन की जानकारी Schedule CG में भरनी होती है, ताकि आयकर विभाग की जांच या नोटिस से बचा जा सके. AKM Global के टैक्स पार्टनर संदीप सहगल के मुताबिक, जिन ज्वेलर्स का ऑडिट होता है, उन्हें 2 लाख रुपये से ज्यादा के कैश ट्रांजैक्शन की जानकारी सरकार को देनी होती है. यह जानकारी एनुअल इंफोर्मेशन सिस्टम (AIS) में दिखाई देती है. इसलिए ITR में दी गई जानकारी AIS से मेल खानी चाहिए.

विरासत में मिले गहनों पर नियम

अगर विरासत में मिले गहने 1 अप्रैल 2001 से पहले खरीदे गए थे, तो टैक्स कैलकुलेशन के लिए उस तारीख का फेयर मार्केट वैल्यू (FMV) खरीद कीमत माना जा सकता है. Nangia and Co के वरिष्ठ पार्टनर नीरज अग्रवाल के अनुसार, अगर 2001 के बाद खरीदे गए गहनों के दस्तावेज नहीं हैं, तो सरकार से रजिस्टर्ड वैल्यूअर की रिपोर्ट बहुत जरूरी हो जाती है. इससे आयकर जांच के समय सबूत मिल जाता है. उन्होंने कहा कि गहनों को पिछले मालिक ने कितने समय तक रखा था, वह अवधि भी यह तय करने में शामिल होगी कि मुनाफा लॉन्ग टर्म है या शॉर्ट टर्म.

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पुराने गहने बदलवाने पर कटौती भी होती है

पुराने गहनों को पिघलाने, साफ करने और रिफाइन करने में कुछ सोना खराब होता है. इसके लिए ज्वेलर्स 5% से 8% तक वेस्टेज चार्ज काटते हैं. इसके अलावा गहनों में लगे पत्थर, मोती, मीनाकारी या दूसरी गैर-सोने की चीजों को हटाकर सिर्फ शुद्ध सोने का वजन माना जाता है. कुछ ज्वेलर्स बाजार जोखिम और कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए अतिरिक्त कटौती भी कर सकते हैं.

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