Thursday, April 16, 2026
Entertainment

Asha Bhosle: ‘देवी’ जैसी लता और ‘दोस्त’ जैसी आशा, संगीत जगत की उस ‘ताई’ की कहानी जिसने हर किसी का हाथ थामा

Tribute To Asha Bhosle: भारतीय सिनेमा में मंगेशकर बहनों का दबदबा ऐसा था कि उनके बिना संगीत की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. लेकिन इन दोनों बहनों के व्यक्तित्व में जमीन-आसमान का फर्क था. हाल ही में आशा भोसले ने इस दुनिया को अलविदा कहा, इसी मौके पर हमने उनके सफर को करीब से देखने वाले मीडिया के जानकारों से चर्चा की, उनसे की बातचीत के मुताबिक जहां लता दीदी अपनी सादगी, अनुशासन और उनकी छवि के कारण इंडस्ट्री से एक सम्मानजनक दूरी बनाए रखती थीं, वहीं आशा भोंसले एक ऐसी शख्सियत थीं, जिनके पास कोई जूनियर कलाकार भी बिना हिचकिचाहट जा सकता था.

Asha Bhosle: ‘देवी’ जैसी लता और ‘दोस्त’ जैसी आशा, संगीत जगत की उस ‘ताई’ की कहानी जिसने हर किसी का हाथ थामा
Asha Bhosle: ‘देवी’ जैसी लता और ‘दोस्त’ जैसी आशा, संगीत जगत की उस ‘ताई’ की कहानी जिसने हर किसी का हाथ थामा

इंडस्ट्री के पुराने जानकार बताते हैं कि लता मंगेशकर से बात करते समय बड़े-बड़े दिग्गज भी अपने शब्दों को तोलते थे. उनकी उपस्थिति में एक गरिमापूर्ण शांति रहती थी. इसके उलट, ‘शिफ्टिंग विंड’ यानी बहती हवा की तरह थीं, चुलबुली, बेबाक और सबके साथ घुलमिल जाने वाली.

सभी का पूछती थीं हालचाल

सीनियर फिल्म जर्नलिस्ट लिपिका वर्मा कहती हैं, आशा ताई खुद को ‘सेलेब्रिटी’ की दीवार में कैद नहीं करती थीं. उनसे जुड़ा एक किस्सा याद किया जाता है कि एक बार उनके बेटे ने उनसे पूछा कि आप घर के वॉचमैन से लेकर धोबी तक से उनका हाल-चाल क्यों पूछती हैं? तब आशा जी का जवाब था, “गाना गाने का मतलब ये नहीं कि मैं इंसान नहीं हूं, मैं एक साधारण महिला हूं.” शायद यही वो अंदाज़ था जिसने उन्हें पूरी फिल्म इंडस्ट्री का चहेता बना दिया.

जब आशा ने थामा नए सितारों का हाथ

फिल्म क्रिटिक आरती सक्सेना कहती हैं कि आशा भोंसले केवल अपनी आवाज के लिए नहीं, बल्कि दूसरों को आगे बढ़ाने के अपने जज़्बे के लिए भी जानी जाती थीं. आज के कई बड़े नाम उनकी मदद के गवाह हैं,

  • अदनान सामी: अदनान सामी जब मात्र 10 साल के थे, तब आशा जी ने लंदन में उनकी प्रतिभा को पहचाना था और उन्हें संगीत में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया था. बाद में उन्होंने अदनान के साथ ‘कभी तो नजर मिलाओ’ जैसे सुपरहिट एलबम गाकर उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई.
  • सुदेश भोसले: मशहूर गायक सुदेश भोसले का तो पूरा जीवन ही आशा ताई ने बदल दिया. उन्होंने ही सुदेश को आर.डी. बर्मन से मिलवाया था, जिसके बाद उनका करियर चमक उठा. आज भी उनके अंतिम संस्कार के समय सुदेश भोसले ने गाना गाते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी.
  • ललित पंडित: संगीतकार ललित पंडित याद करते हैं कि वे बचपन में इतने छोटे थे कि रिकॉर्डिंग के दौरान आशा ताई खुद उनका हाथ पकड़कर उन्हें मेज़ पर खड़ा करती थीं ताकि वे माइक तक पहुंच सकें.
  • तबू और अन्य सितारे: आशा जी के रिश्तों की गर्माहट ऐसी थी कि उन्होंने तबू को उनके जन्मदिन पर गिटार गिफ्ट किया था, जिसे तबू अपनी सबसे कीमती संपत्ति मानती हैं.
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रेखा और आशा: आवाज और अदा का अटूट रिश्ता

एक्ट्रेस रेखा और आशा भोसले का रिश्ता प्रोफेशनल से कहीं ज्यादा पर्सनल था. रेखा ने एक बार भावुक होकर कहा था कि आशा ताई “मेरे व्यक्तित्व का एक अभिन्न हिस्सा” हैं. फिल्म ‘उमराव जान’ की सफलता का पूरा श्रेय रेखा ने आशा जी को दिया. रेखा का कहना था, “फिल्म में मैंने जो कुछ भी किया, वो सिर्फ आशा ताई के निर्देशों की वजह से था. मैं तो बस उनके पीछे-पीछे चल रही थी.”

इंडस्ट्री की ‘अन्नपूर्णा’

फिल्म जगत में एक कहावत मशहूर थी,”अगर आशा भोसले ने आपके लिए खाना पकाया है, तो समझ लीजिए कि वे आपको बहुत पसंद करती हैं.” संजय लीला भंसाली जैसे निर्देशक उनके हाथों के बने खाने के मुरीद रहे हैं. वे अक्सर 60-70 लोगों के लिए बड़े-बड़े पतीलों में खाना बनाती थीं.

राज कपूर से उन्होंने ‘पेशावरी बिरयानी’ सीखी, तो आर.डी. बर्मन की दादी से ‘बंगाली प्रॉन्स करी’. कपूर खानदान के लोग आज भी उनकी ‘पाया करी’ और ‘दाल’ के लिए फरमाइश करते थे. उनके लिए खाना बनाना एक ‘तनाव दूर करने’ का जरिया था और खाना खिलाना उनका प्यार जताने का.

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रिश्तों की खूबसूरती

कई बार आशा और के बीच दुश्मनी की बातें लोगों की चर्चा का विषय बनती थीं. लेकिन लिपिका वर्मा कहती हैं कि भले ही दुनिया ने लता और आशा के बीच ‘नंबर 1’ की जंग देखी, लेकिन मंगेशकर परिवार के लिए वे ‘बंद मुट्ठी’ की तरह थे. आशा भोसले खुद कहती थीं कि सुबह झगड़ा होता था लेकिन रात को हम साथ खाना खाते थे. तो लता दीदी ने हमेशा कहा कि “जो आशा गा सकती है, वो कोई नहीं गा सकता.”

शाहरुख खान से लेकर अक्षय कुमार तक, हर किसी ने आशा ताई के निधन पर यही कहा कि उनकी आवाज कभी पुरानी नहीं होगी. शाहरुख ने याद किया कि कैसे वे हमेशा उन्हें अपनी दुआएं और आशीर्वाद देती रहती थीं. आशा भोसले का जाना केवल एक आवाज का जाना नहीं है, बल्कि उस ‘ममता’ और ‘दोस्ती’ का जाना है जिसने फिल्म इंडस्ट्री के कई कलाकारों को एक परिवार का हिस्सा महसूस कराया. उनकी आवाज और उनकी वो संजीदगी हमेशा हमारे बीच गूंजती रहेगी.

khabarmonkey@gmail.com

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