: के अमौसी इंडियन ऑयल एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में बुधवार को दूसरे दिन भी सिलेंडर ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल जारी रही। ट्रांसपोर्टरों ने अपने ट्रक खड़े रखे और सिलेंडर नहीं उठाए। इससे लखनऊ की सभी 80 इंडेन गैस एजेंसियों और बाराबंकी की कुछ एजेंसियों पर सप्लाई प्रभावित हुई।

192 गैस एजेंसियों तक सप्लाई का मिला था भरोसा
ट्रांसपोर्टर अतुल यादव और योगेश सिंह ने बताया कि 2023 में टेंडर के दौरान इंडियन ऑयल ने लखनऊ के साथ बाराबंकी, फैजाबाद, बहराइच, गोंडा, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और सीतापुर की कुल 192 गैस एजेंसियों तक सिलेंडर पहुंचाने का काम देने का वादा किया था। ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक, इस काम के लिए उन्होंने बैंक से लोन लेकर करीब 206 ट्रक खरीदे थे। टेंडर के समय हर गाड़ी को करीब 2.45 लाख रुपए प्रतिमाह का काम मिलने की बात कही गई थी।
80 से 90 हजार रुपए रह गई कमाई
ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि करीब एक साल पहले 192 एजेंसियों की जगह काम घटाकर लखनऊ की 80 एजेंसियों और बाराबंकी की कुछ एजेंसियों तक सीमित कर दिया गया। इससे उनकी मासिक कमाई घटकर 80 से 90 हजार रुपए रह गई। उनका कहना है कि ट्रकों की किस्त, ड्राइवरों का वेतन, डीजल और सिलेंडरों की लोडिंगअनलोडिंग का खर्च निकालना मुश्किल हो गया है। इस समस्या को लेकर अधिकारियों को कई बार पत्र भी दिए गए और पहले हड़ताल भी की गई, लेकिन समाधान नहीं हुआ।
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मांग पूरी होने तक हड़ताल जारी रखने का ऐलान
ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक, बुधवार को कंपनी के कुछ अधिकारियों ने बातचीत की कोशिश की, लेकिन वे अपनी मांग पर अड़े रहे। उनका कहना है कि जब तक सभी 192 एजेंसियों तक सिलेंडर पहुंचाने का काम नहीं दिया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। बुधवार को भी सभी ट्रक प्लांट के बाहर खड़े रहे और सिलेंडर नहीं उठाए।