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पुरानी गाड़ी बेचने और खरीदने वालों के लिए राहत की तैयारी, ऑनरशिप ट्रांसफर करना होगा आसान​

पुरानी कार या बाइक खरीदने और बेचने वाले लोगों के लिए आने वाले समय में राहत मिल सकती है. केंद्र सरकार वाहन के मालिकाना हक को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए नई नीतियों पर काम कर रही है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने बुधवार को यह जानकारी दी. […]

पुरानी कार या बाइक खरीदने और बेचने वाले लोगों के लिए आने वाले समय में राहत मिल सकती है. केंद्र सरकार वाहन के मालिकाना हक को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए नई नीतियों पर काम कर रही है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने बुधवार को यह जानकारी दी.

मल्होत्रा ने कहा कि पुरानी गाड़ी बेचने के बाद उसके नए मालिक के नाम पर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट ट्रांसफर कराने में लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. केंद्र सरकार इन समस्याओं को दूर करने के लिए नीतियां तैयार कर रही है. हालांकि, इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सभी राज्यों की नीतियों और उनके लागू करने के तरीकों में एकरूपता लाना भी जरूरी है.

आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु सबसे आगे

India Tech.org और Consumer VOICE की ओर से जारी Ease of Vehicle Ownership Index में आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु ने पहला स्थान हासिल किया है. यह इंडेक्स बताता है कि अलगअलग राज्यों में पुरानी गाड़ी खरीदने और बेचने के बाद उसके मालिकाना हक को ट्रांसफर करना कितना आसान है.

इसमें राज्यों का मूल्यांकन कई आधारों पर किया गया है. इनमें सरकारी नीतियां, डिजिटल सुविधाएं, काम पूरा होने में लगने वाला समय, पारदर्शिता, जवाबदेही, डीलर की मदद और कुल खर्च शामिल हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, आंध्र प्रदेश में गाड़ी की RC ट्रांसफर होने में आमतौर पर 7 से 10 दिन लगते हैं. वहीं, उत्तर प्रदेश में इसी काम में 30 दिन से ज्यादा समय लग सकता है. रिपोर्ट में शामिल 15 राज्यों में से 13 राज्यों में ऑनलाइन आवेदन करने के बाद भी लोगों को दस्तावेजों की हार्ड कॉपी RTO में जमा करनी पड़ती है.

एक ही कार पर 66 हजार रुपये से ज्यादा का अंतर

रिपोर्ट में राज्यों के बीच रोड टैक्स के अंतर को भी बड़ी समस्या बताया गया है. उदाहरण के लिए, 6 लाख रुपये की पेट्रोल कार पर उत्तर प्रदेश में 3% रोड टैक्स लगता है, जबकि कर्नाटक और तेलंगाना में यह 14% तक है. इस अंतर के कारण एक ही कार की कीमत में 66 हजार रुपये से ज्यादा का फर्क आ सकता है.

समय पर RC ट्रांसफर के लिए दिए सुझाव

रिपोर्ट में केंद्र सरकार से सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स में बदलाव करने की सिफारिश की गई है. इसके तहत वाहन मालिकाना हक ट्रांसफर करने के लिए अलगअलग कामों की समयसीमा तय करने का सुझाव दिया गया है.

  • आवेदन को 12 दिन में मंजूरी दी जाए.
  • नई RC 23 दिन में भेज दी जाए.
  • दूसरे राज्य में गाड़ी ट्रांसफर करने के लिए NOC दो दिन में मिले.
  • रोड टैक्स का रिफंड 14 दिन में किया जाए.

गाड़ी बेचने के बाद भी RC ट्रांसफर का इंतजार

इस इंडेक्स के तहत 1,000 खरीदारों और विक्रेताओं पर एक सर्वे किया गया. इसमें सामने आया कि 39% लोगों ने गाड़ी बेच दी, लेकिन अब तक उनके नाम से RC ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी. वहीं, सिर्फ 9.6% लोगों ने बताया कि उनकी गाड़ी की RC ट्रांसफर होने में दो सप्ताह से कम समय लगा. इससे साफ है कि पुरानी गाड़ी खरीदने और बेचने के बाद मालिकाना हक बदलने की प्रक्रिया में अभी भी कई व्यावहारिक समस्याएं हैं.

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संपादकीय टीम

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